हामिद करजई ने तालिबान को दी सलाह- वैश्विक मान्यता हासिल करने की कोशिश से पहले जीतें अफगान लोगों का प्यार

टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार वायस आफ अमेरिका (वीओए) के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने तालिबान को चुनावों के जरिए या लोया जिरगा (एक राष्ट्रीय भव्य सभा) आयोजित करके राष्ट्रीय वैधता हासिल करने की सलाह दी है।

Neel RajputTue, 19 Oct 2021 12:19 PM (IST)
हामिद करजई ने पाकिस्तान को अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों से दूर रहने को कहा है

काबुल, एएनआइ। अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने तालिबान को सलाह दी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त करने के लिए उसे पहले अफगान के लोगों का प्यार जीतना होगा। उन्होंने एक साक्षात्कार के दौरान यह बात कही है। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, वायस आफ अमेरिका (वीओए) के साथ एक साक्षात्कार में, उन्होंने तालिबान को चुनावों के जरिए या लोया जिरगा (एक राष्ट्रीय भव्य सभा) आयोजित करके राष्ट्रीय वैधता हासिल करने की सलाह दी है।

इसके अलावा, करजई ने यह भी कहा कि इस्लामिक अमीरात के पास देश चलाने के लिए एक संविधान होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रीय वैधता और अंतरराष्ट्रीय मान्यता महत्वपूर्ण हैं। इसके लिए काम करना चाहिए और पहला कदम लोया जिरगा के माध्यम से राष्ट्रीय वैधता का मार्ग प्रशस्त करना है या फिर अफगानिस्तान के संविधान को लागू करना चाहिए। राष्ट्रीय वैधता या तो चुनावों के माध्यम से हासिल की जा सकती है या लोया जिरगा आयोजित करके प्राप्त की जा सकती है।'

पाकिस्तान को भी लगाई लताड़

करजई ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को काबुल के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधों को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों और सिद्धांतों पर आधारित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है। करजई ने कहा, 'इन दिनों पाकिस्तान इस तरह से बोलता है जैसे कि वह हमारा प्रतिनिधित्व करता है। नहीं, पाकिस्तान, अफगानिस्तान या उसके लोगों का प्रतिनिधि नहीं है।'

टोलो न्यूज के मुताबिक, इस बीच, कई अंतरराष्ट्रीय संबंध विश्लेषकों का मानना है कि लोया जिरगा वर्तमान समय में मुमकिन नहीं है इसलिए दुनिया को इस्लामिक अमीरात से जुड़ने के लिए कोई और वैकल्पिक तरीका निकालना चाहिए।

एक अंतरराष्ट्रीय संबंध विश्लेषक अहमद खान अंदार ने कहा, 'अब तक किसी भी सरकार ने तालिबान की नेतृत्व वाली अफगानिस्तान सरकार को मान्यता नहीं दी है, जो कि वहां के लोगों के लिए अच्छा नहीं है क्योंकि यहां लोग गरीबी में जी रहे हैं। दुनिया को सरकार (इस्लामिक अमीरात) के साथ जुड़ना चाहिए।' विश्वविद्यालय के एक लेक्चरर ख्वाजा फहीम अब्बास ने कहा, 'मौजूदा खराब आर्थिक स्थिति में, सरकार लोया जिरगा नहीं रख सकती है। अंतरराष्ट्रीय मान्यता के लिए अन्य विकल्प तलाशे जाने चाहिए।'

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