वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता, शरीर की कोशिकाओं से ही खत्म किया जा सकेगा दिमागी बुखार

अध्ययन की प्रथम लेखक कियारा पवन ने बताया कि रैट माडल में हमने पाया कि मेनिंजाइटिस में न्यूट्रोफिल्स नामक प्रतिरक्षी कोशिकाएं मस्तिष्क में जालनुमा एक संरचना बनाती हैं। लेकिन यह संरचना मस्तिष्क में सूजन पैदा करती है और अपशिष्ट उत्पादों को बाहर निकलने से रोकता है।

Neel RajputTue, 26 Oct 2021 11:03 AM (IST)
कोपेनहेगन और लुंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने चूहों पर किया प्रयोग

कोपेनहेगन (डेनमार्क), एएनआइ। मेनिंजाइटिस यानी मस्तिष्क ज्वर के संभावित इलाज की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। कोपेनहेगन और लुंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने चूहों पर किए एक अध्ययन में मेनिंजाइटिस के बैक्टीरियल संक्रमण को शरीर के ही प्रतिरक्षी कोशिकाओं के जरिये खत्म करने में सफलता पाई है। मतलब यह कि इस संक्रमण को एंटीबायोटिक के बगैर ही खत्म किया जा सकता है। यह निष्कर्ष ‘ऐनल्ज आफ न्यूरोलाजी’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

अध्ययन की प्रथम लेखक कियारा पवन ने बताया कि रैट माडल में हमने पाया कि मेनिंजाइटिस में न्यूट्रोफिल्स नामक प्रतिरक्षी कोशिकाएं मस्तिष्क में जालनुमा एक संरचना बनाती हैं। लेकिन यह संरचना मस्तिष्क में सूजन पैदा करती है और अपशिष्ट उत्पादों को बाहर निकलने से रोकता है। ऐसे में हमने पाया कि यदि इस संरचना को नष्ट कर दिया जाए, तब भी प्रतिरक्षी कोशिकाएं (इम्यून सेल्स) बैक्टीरिया को मारते हैं और वह भी मस्तिष्क में बगैर सूजन पैदा किए।

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि प्रतिरक्षी कोशिकाएं मस्तिष्क की ङिाल्ली में प्रवेश कर एक जाल बनाते हैं, लेकिन यह सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड के आवागमन को भी रोकता है। मस्तिष्क की सक्रिय कोशिकाओं द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट की सफाई के लिए सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड ही जिम्मेदार होता है, जो रक्त वाहिका के साथ ही ऊतकों में प्रवेश करता है। यह फ्लूइड (तरल) एक परिवहन तंत्र बनाता है, जिसे ग्लिम्फेटिक सिस्टम कहते हैं। इसका काम मस्तिष्क में प्रोटीन के मैल (प्लैक) को जमा नहीं होने देना है। यह स्थिति खासकर अल्जाइमर में बनती है। ग्लिम्फेटिक सिस्टम स्ट्रोक या अन्य बीमारियों में भी मस्तिष्क में सूजन रोकने में अहम भूमिका निभाता है।

मस्तिष्क में होने वाले सूजन मस्तिष्क तक पहुंचने वाली रक्त वाहिकाएं दब जाती हैं, जिससे कि सांस को नियंत्रित करने वाला मस्तिष्क का हिस्सा काम करना बंद कर देता है।

डीएनऐज के प्रयोग से मिले सकारात्मक परिणाम

शोधकर्ताओं ने बताया कि संक्रमित चूहों को डीएनऐज की डोज दिए जाने पर पाया गया कि न्यूट्रोफिल्स से निर्मित प्रतिरक्षी जाल गल गया। मस्तिष्क में सूजन कम हुआ और संक्रमित मस्तिष्क से मेटाबोलिक अपशिष्ट को हटाने में भी मदद मिली। जबकि इसके विपरीत एंटीबायोटिक वाला इलाज सूजन कम करने या अपशिष्ट की सफाई करने में उतना कारगर नहीं रहा। इसके आधार पर शोधकर्ता अब उम्मीद कर रहे हैं कि मेनिंजाइटिस के रोगियों के इलाज के लिए डीएनऐज आधारित ड्रग का वैश्विक ट्रायल होगा। इसका यह फायदा भी होगा कि बैक्टीरिया के एंटीबायोटिक प्रतिरोधी होने का भी खतरा कम होगा। अब इस बात की जांच करनी है कि अन्य रोगों में भी मेटोबोलिक अपशिष्ट को किस प्रकार से बाहर किया जाए।

एंजाइम से हो सकता है इलाज

शोधकर्ताओं ने बताया कि यह अध्ययन इस मायने में अहम है कि मेनिंजाइटिस का इलाज एक ऐसे एंजाइम से किया जा सकता है, जो न्यूट्रोफिल्स द्वारा निर्मित जाल को हटाए। इस आधार पर शोधकर्ताओं ने यह सिद्धांत प्रतिपादित किया है कि यदि प्रतिरक्षी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बगैर जाल को गला दिया जाए तो उससे सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड का आवागमन बना रहेगा। यह जालनुमा संरचना मुख्यतौर पर डीएनए से बनी होती है, इसलिए शोधकर्ताओं ने डीएनए को काटने वाले ड्रग्स का उपयोग किया, जिसे डीएनऐज नाम दिया गया है। यह ड्रग मेनिंजाइटिस पैदा करने वाले बैक्टीरिया न्यूमोकाकस से संक्रमित चूहों को दिया गया।

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