ब्राजील के वाइपर का जहर बन सकता है कोरोना के खिलाफ लड़ाई का औजार, अध्ययन में किया गया दावा

इस महीने वैज्ञानिक पत्रिका मॉलिक्यूल्स में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि जराकुसु पिट वाइपर द्वारा निर्मित मॉलिक्यूल ने बंदर की कोशिकाओं में वायरस के संक्रमण वृद्धि क्षमता को 75 फीसद तक बाधित कर दिया। शोधकर्ता मॉलिक्यूल की विभिन्न खुराक की दक्षता का मूल्यांकन करेंगे।

Arun Kumar SinghWed, 01 Sep 2021 04:46 PM (IST)
जराकुसु ब्राजील के सबसे बड़े सांपों में से एक है

साओ पाउलो, रायटर्स। दुनिया के वैज्ञानिक कोरोना वायरस की दवा बनाने के करीब हैं। ब्राजील के शोधकर्ताओं ने पाया कि एक प्रकार के सांप के जहर में एक मॉलिक्यूल ने बंदर की कोशिकाओं में कोरोना वायरस संक्रमण की बढ़ोत्तरी को रोक दिया है, जो कोविड के कारण वायरस का मुकाबला करने के लिए एक दवा की ओर एक संभावित पहला कदम हो सकता है।

वाइपर के मॉलिक्यूल से वायरस की संख्‍या वृद्धि में आती है बाधा

इस महीने वैज्ञानिक पत्रिका मॉलक्यूल्स में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि जराकुसु पिट वाइपर द्वारा निर्मित मॉलिक्यूल ने बंदर कोशिकाओं में वायरस संक्रमण की वृद्धि क्षमता को 75 फीसद तक बाधित कर दिया। साओ पाउलो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और अध्ययन के लेखक राफेल गुइडो ने कहा कि हम यह दिखाने में सक्षम थे कि सांप के जहर का यह घटक वायरस से एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रोटीन को बाधित करने में सक्षम था।

मॉलिक्यूल एक पेप्टाइड या अमीनो एसिड की श्रृंखला है, जो पीएलप्रो नामक कोरोना के एक एंजाइम से जुड़ सकता है, जो अन्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना वायरस के प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण है। गुइडो ने एक साक्षात्कार में कहा कि इसके लिए सांपों को पकड़ना या उठाना अनावश्यक है। पहले से ही अपने एंटी बैक्‍टीरियल क्‍वालिटी (जीवाणुरोधी गुणों) के लिए जाना जाता है, पेप्टाइड को प्रयोगशाला में संश्लेषित किया जा सकता है!

सांप को लेकर कही यह बात

वहीं, साओ पाउलो में बुटान इंस्टीट्यूट के जैविक संग्रह को चलाने वाले एक पशु चिकित्सक ग्यूसेप पुएर्टो ने कहा कि हम ब्राजील के आसपास जराकुसु (एक प्रकार का वाइपर सांप) का शिकार करने के लिए बाहर जाने वाले लोगों के बारे में सावधान रहें। यह सोचकर कि वे दुनिया को बचाने जा रहे हैं ... ऐसा नहीं है। यह विष ही नहीं है, जो कोरोना का इलाज करेगा।" जराकुसु ब्राजील के सबसे बड़े सांपों में से एक है, जिसकी लंबाई 6 फीट (2 मीटर) तक है। यह तटीय अटलांटिक वन में रहता है और बोलीविया, पराग्वे और अर्जेंटीना में भी पाया जाता है।

शोध में शामिल स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ साओ पाउलो (यूनेस्प) के एक बयान के अनुसार, शोधकर्ता मॉलिक्यूल की विभिन्न खुराक की दक्षता का मूल्यांकन करेंगे। क्या यह वायरस को पहली जगह में कोशिकाओं में प्रवेश करने से रोकने में सक्षम है। वे मानव कोशिकाओं में पदार्थ का टेस्‍ट करने की उम्मीद करते हैं, लेकिन इसके लिए कोई समयरेखा नहीं दी है।

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