बेरूत धमाके को हुआ एक वर्ष पूरा लेकिन नहीं हुआ लोगों का दर्द दूर, जहन से नहीं निकलता ये हादसा

बेरूत धमाके को एक वर्ष पूरा हो गया है। इस दिन को यहां पर रहने वाला कोई शख्‍स नहीं भूला है। इस एक वर्ष में लोगों की परेशानियां बढ़ी हैं कम नहीं हुईं। अब लोगों का गुस्‍सा सरकार के प्रति भी दिखाई देने लगा है।

Kamal VermaWed, 04 Aug 2021 02:59 PM (IST)
बेरूत धमाके में लोगों ने काफी कुछ खोया है।

बेरूत (रायटर)। बेरूत बंदरगाह पर हुए जबरदस्‍त धमाके को आज एक वर्ष पूरा हो गया है। इस एक वर्ष के दौरान लोगों ने काफी कुछ बदलते हुए देखा, लेकिन इस दौरान यहां रहने वालों की परेशानियां लगातार बढ़ी ही हैं। बेरूत हमले में प्रभावित लोगों को एक वर्ष बाद भी इस बात का अफसोस और गुस्‍सा है कि उन्‍हें न्‍याय नहीं मिल सका है। इस धमाके में 200 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग घायल हुए थे। बेरूत के व्‍यस्‍त बंदरगाह पर हुए भी जबरदस्‍त धमाके की गूंज ढाई सौ किमी दूर साइप्रस तक सुनाई दी थी। ये धमाका बंदरगाह के स्‍टोरेज में रखे कई टन अमोनियम नाइट्रेट में हुआ था। हैरानी की बात ये है कि ये इस जगह पर काफी समय से रखा था और इसको लेकर सरकार के पास कोई जानकारी तक नहीं थी।

जिस वक्‍त यहां पर धमाका हुआ था तो उस जगह जहां पर अमोनियम नाइट्रेट का भंडार जमा था काफी बड़ा गड्ढ़ा हो गया था। बंदरगाह की पूरी इमारत ही धराशायी हो गई थी। हजारों मकानों को नुकसान पहुंचा था और सैकड़ों मकान गिर गए थे। इस हादसे के बाद से ही यहां के लोग न्‍याय का इंतजार कर रहे हैं लेकिन उन्‍हें अब तक केवल ऐसा होने का इंतजार ही है। यहां के चेहरों पर अब मायूसी और सरकार के प्रति गुस्‍सा भी साफतौर पर दिखाई देने लगा है। यहां पर रहने वाले 72 वर्षीय हबीब ने बताया कि इस हादसे के बाद बहुत कुछ बदल गया। पड़ोसी बदल गए पहले जो एक स्प्रिट हुआ करती थी वो भी बदल गई। इस हादसे में वो भी घायल हुए थे और उनका मकान पूरी तरह से धराशायी हो गया था। पहले पहल तो उन्‍हें ये ही नहीं समझ आया कि आखिर ये हुआ क्‍या है।

इस हादसे के एक वर्ष पूरा होने के मौके पर उन्‍होंने काले कपड़े पहनकर विरोध दर्ज कराया है। धमाके वाली जगह एक वर्ष बाद भी ऐसी ही उजड़ी हुई दिखाई देती है। इस जगह के पास की एक इमारत पर बड़े से बैनर पर लिखा गया है होस्‍टेज एंड मर्डरस स्‍टेट। ये बैनर कहीं न कहीं सरकार के प्रति इन लोगों के गुस्‍से को दिखा रहा है। एक अन्‍य नागरिक ने बताया कि धमाके के समय वो अपनी पत्‍नी के साथ बालकनी में खड़े थे। धमाके ने उन्‍हें उठाकर कमरे के काफी अंदर तक फेंक दिया था। उनके घर का काफी हिस्‍सा टूट चुका था। इस घटना के एक वर्ष पूरा होने पर उन्‍होंने कहा कि वो इस दिन को कभी नहीं भूलेंगे। वो इस दिन इस हादसे में मारे गए लोगों के प्रति अपना दुख ही व्‍यक्‍त कर सकते हैं और पीडि़तों का दर्द जल्‍द दूर होने की दुआ कर रहे हैं। 62 वर्षीय अवेदिस ने कहा कि वो इसको याद कर इस कदर दुखी है कि इसको बयां करने के लिए उनके पास शब्‍द ही नहीं हैं।

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