बांग्लादेश के इस्कान मंदिर में भीड़ ने किया हमला, एक श्रद्धालु की मौत, पीएम मोदी से मदद की गुहार

इस बीच बांग्लादेश के हिंदू नेताओं ने घोषणा की कि वे पुलिस की मौजूदगी में जेएम सेन हाल के पूजा स्थल की तोड़फोड़ के विरोध में दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन नहीं करेंगे। नेताओं ने एक पुलिस अधिकारी को हटाने की भी मांग की है।

Dhyanendra Singh ChauhanSat, 16 Oct 2021 05:15 PM (IST)
इस पूरे हिंसक मामले पर इस्कान समुदाय के लोगों पर रोष का माहौल

ढाका, आइएएनएस। बांग्लादेश के नोआखाली में कट्टरपंथियों ने मंदिर पर फिर हमला किया है। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और 30 अन्य घायल हो गए। यह घटना शुक्रवार को चौमुहानी इलाके में घटी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए धारा 144 लगा दी गई है। एएनआइ के अनुसार, नोआखाली में इस्कान मंदिर को निशाना बनाया गया है। इस्कान ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, बहुत दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि हमारे एक सदस्य पार्थ दास को 200 से अधिक लोगों की भीड़ ने मार डाला। उनका शव मंदिर के बगल के एक तालाब में पाया गया। बांग्लादेश सरकार से हम तत्काल कार्रवाई की मांग करते हैं। दूसरी तरफ, मुंशीगंज के सिराजदीखान उप जिला में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने काली मंदिर की छह मूर्तियों को तोड़ दिया। सहायक पुलिस अधीक्षक मुहम्मद रशीदुल खान ने बताया कि यह तोड़फोड़ की यह घटना शनिवार तड़के तीन से चार बजे के बीच घटी।

इस पूरे हिंसक मामले पर भारत के इस्कान समुदाय के लोगों में रोष का माहौल है। कोलकाता के इस्कान मंदिर के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस घटनाक्रम से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि हमने प्रधानमंत्री के आवास पर फोन किया और उनके सचिव से पीएम को सूचित करने का अनुरोध किया कि उन्हें हिंसा के इस चक्र को समाप्त करने के लिए बांग्लादेश के पीएम से बात करनी चाहिए। कल लगभग 500 लोगों की भीड़ ने हमारे मंदिर परिसर में प्रवेश किया और देवताओं को तोड़ा, भक्तों को बेरहमी से घायल किया; उनमें से एक की मृत्यु हो गई है।

इस बीच, बांग्लादेश के हिंदू नेताओं ने घोषणा की कि वे पुलिस की मौजूदगी में जेएम सेन हाल के पूजा स्थल की तोड़फोड़ के विरोध में दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन नहीं करेंगे। नेताओं ने एक पुलिस अधिकारी को हटाने की भी मांग की है।

हिंदू, बौद्ध, ईसाई एकता परिषद के नेता अधिवक्ता राणा दासगुप्ता ने शनिवार को चटगांव में आधे दिन की हड़ताल का आह्वान किया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जुमे की नमाज के बाद लोगों के एक समूह ने अंदरकिला मस्जिद के गेट पर सभा की और फिर जुलूस के रूप में जेएम सेन हाल की ओर मार्च किया। जुलूस ने चौराहे पर पुलिस बैरिकेड को तोड़कर जेएम सेन हाल के बंद गेट को तोड़ने का प्रयास किया। इसके बाद वे ईट-पत्थर फेंकने लगे और सड़क के चारों ओर की दीवारों पर लगे पूजा के बैनर फाड़ दिए।

प्रत्यक्षदर्शियों में से एक अधिवक्ता कंकन देव ने बताया कि हमने दोपहर 2.30 बजे के बाद मूर्तियों को समुद्र में विसर्जित करने की योजना बनाई थी। अचानक हमने लोगों को आते देखा। जैसे भीड़ ने ईट, पत्थर फेंकना और पूजा के बैनर फाड़ना शुरू किया, पुलिस वहां से गायब हो गई। हिंसा के बीच महिला भक्तों ने हमलावरों से मूर्ति की रक्षा की।

दासगुप्ता ने बताया कि जेएम सेन हाल में पूजा समारोह आयोजित करने वाली परिषद के नेताओं ने घोषणा की कि जब तक पुलिस अधिकारियों को दंडित नहीं किया जाता है, तब तक वे उत्सव को समाप्त करने के लिए मूर्तियों का विसर्जन नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा, विसर्जन हर साल सुबह 11 बजे से शुरू होता है। लेकिन सरकार ने हमें इस बार जुमे की नमाज के कारण दोपहर 2.30 बजे के बाद मंडप से बाहर निकलने का निर्देश दिया था।

जिस समय हमारी मूर्तियों और पंडालों पर हमले किए जाते हैं, उस वक्त क्या सड़कों पर कोई सुरक्षा का आश्वासन है? सरकार हमारी सुरक्षा की बात करे। इसके बाद हम मूर्तियों का विसर्जन करेंगे। तब तक चटगांव महानगर में कोई भी पंडाल मूर्ति विसर्जन नहीं करेगा।

शनिवार को सुबह छह बजे से दोपहर 12 बजे तक हड़ताल की घोषणा की गई है। उन्होंने कहा कि अगर कोई हमारे प्रदर्शन में बाधा डालने का प्रयास करता है तो हम खून बहाने के लिए तैयार हैं।

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