अफगान संकट के दौर में कतर बना दुनिया के लिए खास, अमेरिका के जाने के बाद इस देश की भूमिका होगी अह‍म

15 अगस्त को तालिबान द्वारा काबुल पर कब्जे के बाद अमेरिका ने जल्दबाजी में हजारों लोगों को अफगानिस्‍तान से निकालने में मदद करने के लिए कतर की ओर देखा। अफगानिस्‍तान से सभी निकासी में से लगभग 40 फीसद को कतर के माध्यम से बाहर निकाला गया।

Arun Kumar SinghMon, 30 Aug 2021 04:39 PM (IST)
तालिबान को अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर मान्‍यता दिलाने के खाड़ी के छोटे देश कतर ने बड़ी मदद की

 दुबई, एजेंसियां। अफगानिस्तान से अमेरिका के सैनिकों की वापसी के बाद कतर दोनों देशों के बीच संपर्क में प्रमुख भूमिका निभाएगा। दसियों हजार लोगों को काबुल एयरपोर्ट से लाकर पहले कतर में ही रखा गया, वहां से अन्यत्र भेजा गया। मौजूदा परिस्थितियों में इस छोटे से अरब देश की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि उसके अमेरिका और तालिबान, दोनों से अच्छे रिश्ते हैं। अच्छे रिश्तों के चलते ही कतर में अमेरिकी सैन्य अड्डा है और अफगानिस्तान की सत्ता से हटने के बाद तालिबान कतर की राजधानी दोहा से ही अपना राजनीतिक कार्यालय चला रहा था। अमेरिका ने शनिवार तक अफगानिस्तान से 1,13,500 लोग निकाले हैं। इनमें से 40 प्रतिशत को कतर में कुछ देर के लिए रोका गया और उसके बाद आगे के लिए रवाना किया गया। काबुल से आए हजारों लोग अभी भी कतर में हैं।

अमेरि‍की राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने किया फोन

कतर खाड़ी का एक ऊर्जा संपन्न छोटा देश है, जहां तीन लाख से अधिक नागरिक हैं। वहां अस्थायी वीजा पर प्रवासी विदेशी कामगारों की संख्‍या स्थानीय आबादी से कहीं अधिक है। व्हाइट हाउस का कहना है कि राष्ट्रपति जो बाइडन ने व्यक्तिगत रूप से कतर के 41 वर्षीय अमीर तमीम बिन हमद अल थानी की फोन पर सराहना की और कहा कि कतर के समर्थन के बिना अमेरिका के नेतृत्व वाली एयरलिफ्ट संभव नहीं होता, जिससे रोजाना हजारों लोगों को निकालने में सहायता की। यह इस देश का दुनिया में सकारात्मक प्रचार है, जिसकी पीआर और पैरवी पर खाड़ी अरब देशों के लाखों डॉलर खर्च करने के बाद शायद ही मिले।

अफगानिस्तान की स्थिति पर वर्चुअल मीटिंग

कतर ने सोमवार को हुई प्रमुख देशों और संगठनों की वर्चुअल मीटिंग में शिरकत की, जिसमें अफगानिस्तान की स्थिति पर विचार किया गया। यह बैठक अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने आयोजित की थी। इसमें ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, इटली, जापान, यूरोपीय यूनियन और नाटो के विदेश मंत्रियों और उच्च अधिकारियों ने हिस्सा लिया। पता चला है कि मंगलवार को काबुल एयरपोर्ट से अमेरिकी सैनिकों के हटने के बाद तालिबान हवाई अड्डे पर उन सभी नागरिकों को यात्रा सुविधा मुहैया कराएगा जो अफगानिस्तान से बाहर जाना चाहते हैं। कतर ने इसके लिए तालिबान को तैयार किया है।

तालिबान ने कतर से मांगी सहायता

मंगलवार को अमेरिकी सैन्य वापसी पूरी हो जाने के बाद कतर को तालिबान द्वारा काबुल के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नागरिक तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए भी कहा गया है। हालांकि, कतर के अधिकारियों ने रिपोर्टों पर कोई टिप्पणी नहीं की है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां ​​कतर से अफगानिस्तान को सहायता पहुंचाने में मदद और समर्थन मांग रही हैं। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने कतर से कहा है कि अफगानिस्तान को आर्थिक सहायता और मदद मुहैया कराने में वह बिचौलिये की भूमिका निभाए। आने वाले दिनों में तालिबान और बाकी दुनिया के बीच कतर की भूमिका कुछ हद तक अप्रत्याशित होने वाली है।

कतर वह देश है जिसकी जमीनी सीमा सऊदी अरब के साथ लगती है और समुद्री सीमा ईरान के साथ। कतर के अधिकार वाली फारस की खाड़ी के नीचे गैस के बड़े भंडार हैं। इसलिए भी कतर अमेरिका सहित दुनिया के तमाम देशों के लिए महत्वपूर्ण है।

लोगों को बाहर निकालने में है बड़ी भूमिका

15 अगस्त को तालिबान द्वारा काबुल पर कब्जे के बाद अमेरिका ने जल्दबाजी में हजारों लोगों को अफगानिस्‍तान से निकालने में मदद करने के लिए कतर की ओर देखा। अफगानिस्‍तान से सभी निकासी में से लगभग 40 फीसद को कतर के माध्यम से बाहर निकाला गया। इसे लेकर अमेरिका ने कतर की प्रशंसा की। अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट ने भी अपने स्वयं के कर्मचारियों को निकालने के लिए कतर से मदद मांगी। संयुक्त राज्य अमेरिका ने शनिवार को कहा कि 14 अगस्त से अब तक एक लाख 13 हजार पांच सौ लोगों को अफगानिस्तान से निकाला गया है। कतर का कहना है कि उसके देश के जारिए से 43,000 से अधिक लोगों ने का निकाला गया।

पिछले काफी समय से मेजबानी की भूमिका निभा रहा है कतर

अफगानिस्‍तान से लोगों को निकालने में कतर की भूमिका मध्य पूर्व के सबसे बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डे के मेजबान के रूप में उसकी स्थिति को दर्शाती है, लेकिन साथ ही तालिबान के राजनीतिक नेतृत्व की निर्वासन में मेजबानी करने का उसका फैसला भी वर्षों पहले उसे आतंकी समूह के साथ कुछ प्रभाव दे रहा था। कतर ने अमेरिका-तालिबान शांति वार्ता की भी मेजबानी की।

मंत्री ने सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए ऐसा करने को किया खारिज

कतर की सहायक विदेश मंत्री लोलवा अल-खतर मानती हैं कि हाल के हफ्तों में कतर को राजनीतिक लाभ हुआ है लेकिन इसके किसी रणनीतिक परिणाम से वह इन्कार करती हैं। उन्‍होंने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि अगर कोई मानता है कि यह केवल राजनीतिक लाभ को लेकर है, तो मेरा विश्वास करें पीआर करने के ऐसे कई ऐसे तरीके हैं जो हमारे लोगों को जमीन पर जोखिम में डालने से कहीं ज्यादा आसान हैं।

पिछले दो हफ्तों से हर बच्चे और गर्भवती महिला की देखभाल करने में अपना समय बिताने से रातों की नींद हराम करने से कहीं ज्यादा आसान है। अफगानिस्तान में कुछ सबसे संवेदनशील बचाव प्रयासों के लिए कतर ने केवल कुछ सौ सैनिकों और अपने स्वयं के सैन्य विमानों के साथ अभियान चलाया।

अफगानिस्‍तान से काफी संख्‍या में लोगों को बाहर निकाला

कतर ने एक गर्ल्स बोर्डिंग स्कूल, लड़कियों की रोबोटिक्स टीम और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए काम करने वाले पत्रकारों समेत अन्य को बाहर निकाला। कतर के राजदूत ने काबुल में तालिबान चौकियों की एक चौकी के माध्यम से बसों के काफिले के साथ और हवाई अड्डे पर विभिन्न पश्चिमी सैन्य चौकियों के साथ, जहां भारी भीड़ जमा थी, भागने के लिए बेताब थी।

काबुल में कतर के राजदूत ने बसों के काफिले को तालिबान की एक चौकी और हवाई अड्डे पर विभिन्न पश्चिमी सैन्य चौकियों पर, जहां भारी भीड़ जमा थी जो भागने के लिए बेताब थी। अल-खतर ने कहा कि कतर ने लगभग 3,000 लोगों के लिए हवाई अड्डे के लिए सड़क को सुरक्षित किया और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अनुरोध प्राप्त करने और उनके नामों की जांच करने के बाद 1,500 से अधिक लोगों को एयरलिफ्ट किया। अल-खतर ने कहा कि कतर अरब देश में विशिष्ट रूप से स्थित है। उसने संकट में विभिन्न दलों से बात की और तालिबान के कब्‍जे में काबुल के माध्यम से लोगों को बाहर निकालने की अपनी इच्छा दर्शाई है।

अफगानिस्‍तान में अमेरिका की सहायता करने वाले बाहर निकलने के लिए हैं बेताब

उन्‍होंने कहा कि बहुत से लोग यह नहीं समझते हैं कि लोगों को बहार निकालने की यह यात्रा तालिबान के लिए सिर्फ एक फोन कॉल नहीं है। उन्‍होंने कहा कि आपके पास अमेरिकी पक्ष द्वारा, ब्रिटिश पक्ष द्वारा, नाटो की ओर से, तुर्की की ओर से चौकियां हैं। हमें इन सभी प्रभावित करने वाली वस्‍तुओं और कारकों से जूझना होगा।

तालिबान ने अफगानिस्तान में रहने वाले सभी लोगों के लिए माफी का वादा किया है। फिर भी उनमें से कई बाहर निकलने के लिए बेताब हैं- जिनमें नागरिक समाज के कार्यकर्ता शामिल हैं, जिन्होंने पश्चिमी सेनाओं के लिए काम किया था और महिलाओं को कड़ी मेहनत से हासिल किए गए अधिकारों को खोने का डर था - कहते हैं कि उन्हें आतंकी संगठन पर भरोसा नहीं है।

इसके अलावा अफगानिस्‍तान में अन्य सशस्त्र संगठनों को एक बढ़ते खतरे को प्रस्तुत किया गया है। पिछले हफ्ते काबुल हवाई अड्डे के बाहर इस्लामिक स्टेट के आत्मघाती हमलावर के हमले में 180 से अधिक लोग मारे गए थे।

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