जानें, भारतीय वायु सेना के कौन से युद्धक विमानों पर होगी चीन और पाकिस्‍तान की नजर, क्‍या हैं उसकी खूबियां

भारतीय वायु सेना के कौन से युद्धक विमानों पर होगी चीन और पाकिस्‍तान की नजर। फाइल फोटो।

भारतीय वायुसेना के छह एसयू-30 एमकेआइ और सी-17 की गर्जना की गूंज चीन और पाकिस्‍तान तक पहुंचेगी। आइए जानते हैं भारतीय वायु सेना के इन दोनों विमानों के बारे में। क्‍या है सी-17 और एसयू-30 एमकेआइ की खूबियां। इन विमानों पर क्‍यों है चीन और पाकिस्‍तान की नजर।

Ramesh MishraTue, 02 Mar 2021 01:48 PM (IST)

अबू धाबी, ऑनलाइन डेस्‍क। भारत से बैर रखने वाले पड़ोसी मुल्‍क पाकिस्‍तान और चीन भारतीय वायु क्षमता को एक बार फ‍िर देखेंगे। भारतीय वायुसेना के छह एसयू-30 एमकेआइ और सी-17 की गर्जना की गूंज चीन और पाकिस्‍तान तक पहुंचेगी। दरअसल, तीन मार्च से भारतीय वायु सेना के दोनों व‍िमान संयुक्‍त अरब अमीरात में डेजर्ट फ्लैग में हिस्‍सा ले रहे हैं। इस युद्धाभ्‍यास में अमेरिका, फ्रांस और सऊदी अरब के साथ 10 देश हिस्‍सा ले रहे हैं। आइए जानते हैं भारतीय वायु सेना के इन दोनों विमानों के बारे में। क्‍या है सी-17 और एसयू-30 एमकेआइ की खूबियां। इन विमानों पर क्‍यों है चीन और पाकिस्‍तान की नजर।

विमान सी-17 ग्लोबमास्टर की खूबियां

लद्दाख में भारत-चीन के तनाव के मध्‍य भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल सबसे शक्तिशाली और विश्व के बड़े मालवाहक जहाजों में से सुमार सी-17 ग्लोबमास्टर ने देहरादून के जौलीग्रांट हवाई अड्डे पर लैंडिंग की थी। भारत-चीन सीमा के मौजूदा हालात और तनाव को देखते हुए इस भीमकाय विमान की लैंडिंग को सामरिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। भारत-चीन तनाव के बीच जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर भारतीय सेना के सबसे शक्तिशाली सी-17 ग्लोबमास्टर विमान की लैंडिंग ने एक बार सबको चौंका कर रख दिया था।

174 फीट लंबे, 170 फीट चौड़े और करीब 55 फीट ऊंचे इस विमान की खास बात यह है कि यह 3500 फीट लंबी हवाई पट्टी पर भी आसानी से उतर सकता है। यही नहीं यह विमान 1500 फीट की हवाई पट्टी पर भी आपातकाल में लैंडिंग करने में सक्षम है। सी-17 ग्लोबमास्टर विश्व के बड़े मालवाहक जहाजों में से एक माना जाता है। अब तक के इतिहास में सी-17 ग्लोबमास्टर कारगिल, लद्दाख, उत्तरी और पूर्वी सीमाओं के विषम भौगोलिक क्षेत्रों में लैंडिंग कर चुका है। यह विमान अपने साथ 70 टन वजन ले जाने में सक्षम है। यह एक बार में 42 हजार किलोमीटर की उड़ान भर सकता है और डेढ़ सौ से अधिक जवानों को एक साथ ले जाने में सक्षम है। इस विमान में एक साथ तीन हेलीकॉप्टर या दो ट्रकों को एयरलिफ्ट किया जा सकता है।

सुखोई-30 एमकेआइ की क्‍या हैं खूब‍ियां

देश में निर्मित SU-30MKI (सुखोई-30 एमकेआइ) लड़ाकू विमान रूस के सुखाई-30 विमान से अलग खूबियां रखते हैं। सुखाई-30 एमकेआइ में भारतीय वायु सेना की जरूरत के मुताबिक कई बदलाव किए गए हैं। वायुसेना में 31 लड़ाकू स्‍क्काड्रन कार्यरत है। नए नाम टाइगर शार्क वाला यह फाइटर एयरक्राफ्ट अपने साथ 2.5 टन के वजन वाला सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल को अपने साथ रखने में सक्षम है। चौथी पीढ़ी का यह सुखोई 12वां स्क्वाड्रन है।

 

तंजावुर एयरबेस पर सुखोई का फाइटर एयरक्राफ्ट SU-30 MKI तैनात किया गया है।  यह दक्षिण भारत में पहला एसयू -30 एमकेआई लड़ाकू विमान स्क्वाड्रन है जो समुद्र में भी अहम भूमिका निभाएगा। SU-30 MKI में ब्रह्मोस सुपर सोनिक मिसाइलों को भी लगाया गया जो 300 किमी दूरी तक निशाना साध सकता है। तंजावुर एयरबेस दक्षिणी वायु कमान का हिस्सा होगा। इससे मुख्‍य रूप से समुद्री क्षेत्र में हमारी शक्ति में इजाफा होगा। इसके अलावा विमानों द्वारा किए जाने वाले तमाम अन्य आक्रामक और रक्षात्मक भूमिकाएं होंगी। ब्रह्मोस मिसाइल के एयर लांच वर्जन को SU-30MKI फाइटर एयरक्राफ्ट में ब्रह्मोस एयरोस्‍पेस, HALऔर वायुसेना द्वारा लगाया गया है। तंजावुर के लोकेशन को देखते हुए यहां Su-30 MKI की तैनाती सुनिश्‍चित की गई। SU-30 MKI को विशेष हथियार ब्रह्मोस सुपर सोनिक मिसाइलों से लैस कर दिया गया है।

 

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