ईरान ने नांतेज अंडरग्राउंड परमाणु साइट पर हुए ब्‍लैक आउट को बताया एक आतंकी घटना

आतंकी साजिश थी ईरान की परमाणु साइट पर हुआ ब्‍लैक आउट

ईरान ने अपने न्‍यूक्यिल फेसेलिटी साइट पर हुई ब्‍लैक आउट की घटना को एक आतंकी साजिश करार दिया है। ईरान का कहना है कि ये सोची समझी साजिश थी जिसका मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बाधित करना था।

Kamal VermaMon, 12 Apr 2021 09:08 AM (IST)

तेहरान (एएनआई)। ईरान के नतांजे स्थित अंडरग्राउंड न्‍यूक्लियर फेसेलिटी साइट पर रविवार को हुए ब्‍लैक आउट की समस्‍या आने को न्‍यूक्लियर प्रोग्राम चीफ अली अकबर सालेही ने आतंकी घटना करार दिया है। उन्‍होंने स्‍टेट टीवी पर इसकी जानकारी देते हुए ये बयान दिया है। हालांकि उन्‍होंने इसके लिए किसी तरह के संदिग्‍ध का नाम उजागर नहीं किया है। हालांकि इस हादसे में किसी तरह की कोई जान-माल की हानि नहीं हुई थी और न ही कोई परमाणु लीकेज हुआ था। माना जा रहा है कि सालेह के इस बयान से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ सकता है।गौरतलब है कि नतांज परमाणु संयंत्र में रविवार को अचानक बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी। ये समस्‍या यूरेनियम के अधिक तेजी से संवर्धन करने वाली सेंटरफ्यूज सुविधा शुरू किए जाने के एक दिन बात आई थी।

ईरान का ये परमाणु केंद्र एक रेगिस्‍तानी और पहाड़ी इलाकों के बीच में बना हुआ है। यूएन न्‍यक्यिलर वाचडॉग के अनुसार ये ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र है जो अंतरराष्‍ट्रीय परमाणु एजेंसी के अंतर्गत काम करता है और इस एजेंसी के अधिकारी इस पर निगाह रखते हैं। रविवार को हुए ब्‍लैक आउट के बाद इसकी जांच भी तत्‍काल प्रभाव से शुरू कर दी गई है।

नांतेज साइट पर आई समस्‍या कोई पहली बार नहीं हुई है बल्कि इससे पहले भी कई बार इस तरह की दिक्‍कत यहां पर आ चुकी हैं। जुलाई 2020 में इस परमाणु साइट पर आग लग गई थी। उस वक्‍त भी ईरान ने इसको एक सोची समझी साजिश बताया था। ईरान का कहना था कि ईरान के इस सेंटर को तबाह कर कुछ देश उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकना चाहते हैं। इससे पहले वर्ष 2010 में यहां के सिस्‍टम में आए वायरस अटैक को भी ईरान ने एक साजिश करार दिया था। माना जाता है कि इसमें अमेरिका और इजरायल की मिलीभगत थी।

आपको बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच काफी समय से संबंध तनाव पूर्ण रहे हैं। वर्ष 2015 में अमेरिका के तत्‍कालीन बराक ओबामा प्रशासन ने ईरान से एक परमाणु संधि साइन की थी जिसको एतिहासिक बताया गया था। इस संधि में इन दोनों देशों के अलावा संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के स्‍थायी सदस्‍य और यूरोपीयन यूनियन भी शामिल हुआ था। अमेरिका में सत्‍ता हस्‍तांतरण होने के बाद वर्ष 2018 में तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने इस संधि से खुद को अलग कर दिया था।

उनका आरोप था कि इस संधि से अमेरिका को कोई फायदा नहीं हुआ है उलटा नुकसान हुआ है। उन्‍होंने संधि से अलग होने के साथ ही ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगा दिए थे। ट्रंप का कहना था कि वो ईरान से एक ऐसी संधि करना चाहते हैं जो अमेरिका के लिए फायदे का सौदा हो। वर्ष 2018 में ईरान ने भी इस संधि से खुद को अलग करने की घोषणा कर दी थी। ईरान ने कहा था कि वो अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाएगा और तय सीमा से अधिक यूरेनियम संवर्धन करेगा।

वर्ष 2020 में अमेरिका में हुए राष्‍ट्रपति चुनाव के दौरान मौजूदा राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने साफ कर दिया था कि वो इस डील को दोबारा शुरू करने और सही तरह से लागू करने के पक्ष में हैं। उनकी सत्‍ता में आने के बाद इसको लेकर दोबारा प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले दिनों इसको लेकर सदस्‍य देशों की बैठक भी हुई हैं, जिसमें अमेरिका की तरफ से कहा गया था कि यदि ईरान इस डील को मानने के लिए तैयार है तो वो ईरान से प्रतिबंध हटाने पर विचार कर सकता है।

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से जुड़ी प्रमुख जानकारियों और आंकड़ों के लिए क्लिक करें।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.