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अमेरिका-तालिबान शांति समझौते के आलोचक बोले- आतंकवादी भरोसे के लायक नहीं

वाशिंगटन, एपी। तालिबान के साथ हुए समझौते को पूरा करने के लिए अमेरिका जहां पूरा जोर लगाए है वहीं आलोचकों का कहना है कि आतंकी संगठन भरोसे के लायक नहीं है। उनके इस विचार को उस समय और बल मिला जब रूस द्वारा अमेरिकी सैनिकों की हत्या के बदले में आतंकियों को इनाम देने की योजना का पता चला। ट्रंप प्रशासन भले ही इस जानकारी से इन्कार कर रहा है, लेकिन खुफिया अधिकारियों के मुताबिक राष्ट्रपति को 27 फरवरी को ही इस संबंध में जानकारी दे दी गई थी।

इस संबंध में सूचना मिलने के दो दिन बाद ही अमेरिका ने कतर में तालिबान के साथ समझौते कर लिया। इस समझौते ने अफगानिस्तान में 19 साल से अमेरिकी सैनिकों की तैनाती को खत्म करने का रास्ता साफ कर दिया था। साथ ही ट्रंप के उस वादे को भी पूरा करने का रास्ता बना दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह इस 'अंतहीन युद्ध' में अमेरिकी भागीदारी को खत्म करना चाहते हैं। समझौते पर हस्ताक्षर के तीन दिन बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने तालिबान के कतर स्थित राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख और तालिबान के सह संस्थापक मुल्ला बरादर से 35 मिनट फोन पर बात की। 

जून में जब रूस द्वारा अमेरिकी सैनिकों की हत्या के बदले आतंकियों को इनाम देने की पेशकश का पता चला तो विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने मुल्ला बरादर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बात की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उसे समझौते का हरहाल में पालन करना होगा। सीनेट के सदस्य माइक वॉल्टज ने कहा कि तालिबान ने समझौते के पहले और बाद में यह बार-बार दिखाया है कि वह इसको लेकर गंभीर नहीं है। हालांकि सैन्य अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी सैनिकों की हत्या के लिए तालिबान को पैसे के लालच की जरूरत नहीं है। यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में अफगानिस्तान शांति प्रक्रिया मामलों के विशेषज्ञ स्कॉट स्मिथ ने कहा कि केवल इनाम की बात नहीं है, हमें इसे इस तरह से देखना चाहिए कि वह समझौते का सम्मान करेगा या नहीं।

अलकायदा से संबंध खत्म करने पर भी जताया अंदेशा

रिपब्लिकन और डेमोक्रेट पार्टियों के सांसदों, रक्षा विशेषज्ञों और अफगानिस्तान मामलों के जानकारों ने दावा किया है कि तालिबान ने अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं किया, जिससे यह लगे वह चार महीने पुराने समझौते का पालन कर रहा है। उन्होंने अंदेशा जताया कि तालिबान 9/11 हमले के जिम्मेदार अलकायदा से शायद ही कभी संबंध खत्म करेगा।

अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य अभियानों की निगरानी कर रहे मरीन जनरल फ्रैंक मैक्केंजी ने कहा कि वह अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की जल्द वापसी के पक्ष में नहीं हैं। हाल ही में आई रक्षा विभाग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि समझौते के बाद तालिबान जहां अफगान बलों के खिलाफ हिंसात्मक गतिविधियों में तेजी लाया है वहीं लड़ाके अमेरिकी या गठबंधन सैनिकों के खिलाफ हमले से बच रहे हैं।

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