भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम पर बनी सहमति का अमेरिकी संसद ने किया स्वागत

भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम पर बनी सहमति का अमेरिकी संसद ने किया स्वागत। फाइल फोटो।

भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम पर बनी सहमति का अमेरिका संसद ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच यह महत्वपूर्ण और पहला कदम है उम्मीद है कि इससे तनाव कम करने में मदद मिलेगी।

Ramesh MishraSat, 27 Feb 2021 02:02 PM (IST)

वाशिंगटन, प्रेट्र। भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम पर बनी सहमति का अमेरिका संसद ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच यह महत्वपूर्ण और पहला कदम है, उम्मीद है कि इससे तनाव कम करने में मदद मिलेगी। अमेरिकी संसद की विदेशी मामलों की समिति के चेयरमैन सांसद ग्रेगरी मीक्स ने भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर को अच्छा कदम बताया है। व्हाइट हाउस ने भी इस कदम को सकारात्मक बताते हुए कहा है कि यह दक्षिण एशिया में शांति और स्थायित्व की स्थिति को स्थापित करने में मददगार साबित होगा।

बता दें कि गुरुवार को भारत और पाकिस्‍तान एलओसी पर संघर्ष विराम के लिए सहमत हुए। भारतीय सेना के अधिकारियों ने कहा कि दोनों देशों के बीच सैन्‍य अभियान महानिदेशकों डीजीएमओ के बीच स्‍थापति हॉटलाइन्‍ संपर्क व्‍यवस्‍था के जरिए 22 फरवरी को चर्चा हुई थी। इसी दौरान दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम लागू करने पर भी सहमति बनी थी। भारत-पाकिस्तान ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा था कि वे अन्य सेक्टरों के लाइन ऑफ कंट्रोल पर सभी समझौते का कड़ाई से पालन करेंगे। हिंदू अमेरिका फाउंडेशन ने भी भारत-पाकिस्तान के सीमा पर संघर्ष विराम को अच्छा कदम बताते हुए पाक से उम्मीद जताई है कि वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह निभाएगा और आतंकी फंडिंग व प्रायोजित आतंकवाद को बंद करेगा।

गौरतलब है कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी जैसे रिश्ते चाहता है। भारत शांतिपूर्ण तरीके से सभी मुद्दों को द्विपक्षीय ढंग से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि मुझे यह दोहराने की जरूरत नहीं। सैन्य अधिकारियों ने कहा कि संघर्ष विराम का यह मतलब नहीं कि आतंकवाद के खिलाफ सेना का अभियान थम जाएगा। सतर्कता में किसी भी प्रकार की कमी नहीं की जाएगी। बता दें कि भारत और पाकिस्तान ने 2003 में संघर्ष विराम समझौता किया था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से शायद ही इस पर सही से अमल हो पाया हो।

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