5जी नेटवर्क में चीनी खतरों के प्रति अमेरिका सजग, जानें इसे लेकर क्‍यों संदेह कर रहा बाइडन प्रशासन

अमेरिका 5जी नेटवर्क को लगाने में चीन पर संदेह कर रहा है।

अमेरिका में 5जी नेटवर्क की स्थापना को लेकर बाइडन प्रशासन उत्‍सुक है लेकिन वह शंकित है कि चीन नेटवर्क को लगाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों में गड़बड़ी कर सकता है जिससे मानवाधिकार का सवाल खड़ा हो सकता है।

Krishna Bihari SinghThu, 04 Mar 2021 06:46 PM (IST)

वाशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका 5जी नेटवर्क को लेकर उत्‍सुक है। वह इस नई तकनीक को अपने यहां लाना तो चाहता है लेकिन चीनी खतरे को लेकर सजग भी है। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक अमेरिका में 5जी नेटवर्क की स्थापना बाइडन प्रशासन की प्राथमिकता में है लेकिन अमेरिका इस बात के लिए भी शंकित है कि चीन नेटवर्क को लगाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों में गड़बड़ी कर सकता है, जिससे मानवाधिकार और निजता का सवाल खड़ा हो सकता है।

पीटीआइ के मुताबिक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने बताया कि 5जी नेटवर्क तकनीकी क्रांति का महत्वपूर्ण बदलाव है। यह अमेरिका की प्राथमिकता में भी है। यह आने वाले समय में बुनियादी ढांचे, यातायात, विद्युत वितरण, जनस्वास्थ्य सहित कई क्षेत्रों के लिए बहुत जरूरी है। यही कारण है कि हम इसकी स्थापना में खतरों के प्रति चिंतित और सजग हैं।

नेड प्राइस ने कहा कि 5जी नेटवर्क को लेकर अमेरिका प्रशासन सावधानी के साथ कदम उठा रहा है। उसका मानना है कि नेटवर्क की स्थापना में उपकरणों को लेकर सतर्कता बेहद जरूरी है। हमें आशंका है कि चीन इन उपकरणों में गड़बड़ी, बाधा यहां तक कि नियंत्रित करने का षड़यंत्र रच सकता है।

उल्‍लेखनीय है कि ट्रंप के कार्यकाल में माइक पोंपियो (Mike Pompeo) ने भारत के रिलायंस जियो (Reliance Jio) को साफ-सुथरा नेटवर्क बताया था। उनका कहना था कि फ्रांस की ऑरेंज, भारत की जियो और ऑस्ट्रेलिया की टेल्सट्रा क्लीन टेलीकॉम कंपनियां हैं क्‍योंकि ये चीन की कंपनी हुवेई (Huawei) के किसी भी उपकरण का इस्तेमाल नहीं करती हैं।

पिछले साल क्‍वाड गठबंधन देशों के बीच सहमति बनी थी कि 5जी नेटवर्क के लिए भरोसेमंद वेंडर को ही बढ़ावा दिया जाएगा। अकेले अमेरिका ही नहीं कई देशों ने 5जी नेटवर्क प्रदाता चीनी हुआवे और जेडटीई को लेकर सशंकित रहे हैं। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक क्‍वाड देश जिन कंपनियों को बढ़ावा देंगे उन्हें कई यूरोपीय, एशियाई, दक्षिण अमेरिकी देशों का बाजार मिलने की उम्‍मीद जताई जा रही है...  

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