कोरोना वायरस की उत्पत्ति का नए सिरे से पता लगाने वाली WHO की टीम में ये भारतीय वैज्ञानिक भी शामिल

उपलब्धि- कोरोना वायरस के उभरने वाले रोगजनकों की उत्पत्ति जांचेगा समूह।आइसीएमआर के पूर्व प्रमुख रहे हैं डाक्टर रमन गंगाखेड़कर। भारत में कोरोना की पहली लहर के दौरान महामारी पर मीडिया की सरकारी ब्रीफिंग में गंगाखेडकर आइसीएमआर का चेहरा बन गए थे।

Shashank PandeyFri, 15 Oct 2021 11:30 AM (IST)
आइसीएमआर के पूर्व प्रमुख रहे हैं डाक्टर रमन गंगाखेड़कर।(फोटो: फाइल)

जिनेवा, प्रेट्र। डब्ल्यूएचओ द्वारा गठित किए गए एक विशेषज्ञ समूह में प्रमुख भारतीय विज्ञानी डा.रमन गंगाखेडकर को भी नामित किया गया है। यह समूह कोरोना वायरस का कारण बनने वाले सार्स-सीओवी-2 सहित महामारी के उभरने वाले रोगजनकों की उत्पत्ति और महामारी की तीव्रता की जांच करेगा। गंगाखेडकर, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) में महामारी विज्ञान और संचारी रोगों के पूर्व प्रमुख रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार को डब्ल्यूएचओ साइंटिस्ट एडवाइजरी ग्रुप फार द ओरिजिन्स आफ नोवेल पैथोजेंस (एसएजीओ) के प्रस्तावित सदस्यों की घोषणा की।

एसएजीओ सार्स-सीओवी-2 सहित महामारी और महामारी क्षमता के उभरने और फिर से उभरने वाले रोगजनकों की उत्पत्ति में अध्ययन को परिभाषित करने और मार्गदर्शन करने के लिए एक वैश्विक ढांचे के विकास में डब्ल्यूएचओ को सलाह देगा।संगठन ने कहा कि डब्ल्यूएचओ को सौंपे गए सभी आवेदनों पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद, कई देशों से आए 26 वैज्ञानिकों का चयन किया गया। उनके नाम एसएजीओ की सदस्यता के लिए प्रस्तावित किए गए। समूह के सदस्यों को रोगजनकों के लिए प्रासंगिक विषयों की विस्तृत श्रृंखला का प्रतिनिधित्व करने के लिए अपनी व्यक्तिगत क्षमताओं में सेवा करनी होगी।

डब्ल्यूएचओ के निदेशक डा.टेड्रोस एडहैनम घेब्रेयसस ने कहा कि महामारी और महामारी फैलाने की क्षमता वाले नए वायरस का उभरना प्रकृति का एक तथ्य है। सार्स-सीओवी-2 इस तरह का नवीनतम वायरस है। यह अंतिम नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में महामारियों के प्रकोप से निपटने के लिए यह समझना जरूरी है कि नए रोगजनक कहां से आते हैं। इसके लिए विशेषज्ञता की एक विस्तृत श्रृंखला की आवश्यकता है। एसएजीओ के लिए दुनिया भर से चुने गए विशेषज्ञों की क्षमता से वे बहुत खुश हैं। दुनिया को सुरक्षित बनाने के लिए हम उनके साथ काम करने के लिए तत्पर हैं।

कौन हैं भारतीय विज्ञानी डा. रमन गंगाखेडकर ?

भारत में कोरोना की पहली लहर के दौरान महामारी पर मीडिया की सरकारी ब्रीफिंग में गंगाखेडकर आइसीएमआर का चेहरा बन गए थे। वे पिछले साल जून में सेवानिवृत्त हुए थे। वे कोरोना से संबंधित जटिल वैज्ञानिक डाटा आम जनता के लिए आसान बनाने के लिए अद्यतन पत्रकारों को अपडेट करते रहे। गंगाखेडकर ने एचआइवी/एड्स पर शोध में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय नीतियों और रोगी सशक्तिकरण के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। दिल्ली में आइसीएमआर मुख्यालय में जाने से पहले, वे राष्ट्रीय एड्स अनुसंधान संस्थान (एनएआरआइ), पुणे के निदेशक-प्रभारी थे।आइसीएमआर में अपने लगभग चार साल के कार्यकाल के दौरान, उन्होंने 2018 में केरल में निपाह वायरस के प्रकोप और हाल ही में कोरोना महामारी के लिए नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सेवा और एचआइवी/एड्स पर उनके शोध के लिए उन्हें 2020 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

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