सामने आई अमेरिका के अफगानिस्‍तान से बाहर जाने की सबसे बड़ी वजह, जानें- कहां होगा अब सारा फोकस

अफगानिस्‍तान से फौज हटाकर अमेरिका का फोकस अब चीन पर होगा।

अमेरिका सितंबर 2021 तक अपनी फौज को अफगानिस्‍तान से पूरी तरह से निकाल लेगा। इसके साथ ही यहां से नाटो सेना भी वापस हो जाएंगी। अमेरिकी विदेश मंत्री के मुताबिक अब अमेरिका का पूरा फोकस दूसरे जरूरी मुद्दों पर होगा।

Kamal VermaMon, 19 Apr 2021 11:14 AM (IST)

वाशिंगटन (रॉयटर्स)। अमेरिका ने अफगानिस्‍तान में सबसे लंबे समय तक चली जंग से अब बाहर जाने की घोषणा कर दी है। सितंबर 2021 तक अमेरिका की सारी फौज अफगानिस्‍तान से बाहर चली जाएगी। अब तक इसको लेकर कोई ठोस कारण सामने नहीं आया था, लेकिन अब इसकी बड़ी वजह का खुलासा हो गया है। ये खुलासा अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने किया है।

रविवार को ब्लिंकन ने अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन के उस फैसले का समर्थन किया है जिसमें उन्‍होंने अफगानिस्‍तान से अपनी फौज को बाहर निकालने के लिए सितंबर 2021 की समय सीमा तय की है। उन्‍होंने कहा कि ये बेहद जरूरी है। साथ ही उन्‍होंने कहा कि अब अमेरिका अफगानिसतान से हटकर दूसरी जगहों पर पूरा फोकस करना चाहता है। अफगानिस्‍तान से बाहर आने के बाद जिन जगहों पर अमेरिका का फोकस होगा उसमें दक्षिण चीन सागर शामिल है। इसके अलावा वैश्विक कोरोना महामारी भी है।

आपको बता दें कि पिछले कई माह से अमेरिका कोरोना महामारी से बुरी तरह से त्रस्‍त है। पिछले कई माह से वो लगातार विश्‍व में सर्वाधिक कोरोना संक्रमण के मामलों की सूची में नंबर वन है। वहां पर लगातार इसका प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। बाइडन ने पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की इसकी रोकथाम को लेकर उठाए गए कदमों की आलोचना की थी। सत्‍ता में आने के बाद उन्‍होंने इसकी रोकथाम के मद्देनजर और इससे पीडि़त लोगों को आर्थिक बदहाली से उबारने के लिए बाइडन ने अरबों डॉलर के पैकेज की घोषणा की है।

जहां तक दक्षिण चीन सागर की बात है तो वहां पर वो चीन के बढ़ते दुस्‍साहस को रोकने के लिए कदम बढ़ाना चाहता है। भारत-जापान-दक्षिण कोरिया-आस्‍ट्रेलिया के साथ मिलकर बनाए गए क्‍वाड के जरिए वो चीन को इस क्षेत्र में रोकना चाहता है। क्‍वाड सदस्‍य और इसके समर्थित सभी देशों का मानना है कि ये क्षेत्र पूरी तरह से आवाजाही के लिए स्‍वतंत्र होना चाहिए। जबकि चीन इस क्षेत्र पर अपनी दावेदारी बताता आया है। इसके अलावा कुछ और देश भी इस क्षेत्र पर अपनी दावेदारी जताते हैं।

अफगानिस्‍तान से बाहर आने की बात पर ब्लिंकन ने साफ किया है कि अमेरिका पूरी तरह से बिना किसी शर्त के यहां से बाहर हो रहा है। हालांकि वो उस समझौते की मियाद को पूरा नहीं कर पा रहा है जो पूर्व राष्‍ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में तालिबान से हुआ था। इस समझौते में मई 2021 तक अमेरिका को अफगानिस्‍तान से बाहर हो जाना था। हालांकि अमेरिका के इस फैसले पर सीआईए प्रमुख विलियम बर्न्‍स और अमेरिकी जनरल डेविड पेट्रियू का मानना है कि अफगानिस्‍तान से अमेरिका के बाहर चले जाने के बाद इस क्षेत्र में आतंकी हमलों का खतरा बढ़ जाएगा और ये फिर से जबरदस्‍त हिंसा का शिकार हो सकता है।

ब्लिंकन ने एबीसी चैनल से हुई वार्ता के दौरान कहा कि समय के साथ अब दूसरी जगहों पर आतंकी खतरा बढ़ गया है। इसलिए अमेरिका के एजेंडे में दूसरे कुछ खास मुद्दे भी जुड़ गए हैं, जिसमें चीन से संबंधों को सुधारना भी शामिल है। इसके अलावा क्‍लाइमेट चेंज और कोविड-19 महामारी के रोकथाम की भी सबसे बड़ी जरूरत है। अमेरिका के मुद्दों में एनर्जी और संसाधनों की उपलब्‍धता भी जुड़ गया है। आपको बता दें पिछले सप्‍ताह ब्लिंकन ने अफगान राष्‍ट्रपति अशरफ गनी से मुलाकात की थी। इसमें उन्‍होंने अमेरिका के सबसे लंबे युद्ध का अंत करने का एलान किया था।

एबीसी चैनल से हुई वार्ता में ब्लिंकन ने कहा कि अमेरिका की अफगानिस्‍तान में मौजूदगी के दौरान अलकायदा को लगभग खत्‍म कर दिया गया है। अब वो इस काबिल नहीं है कि अमेरिका पर दोबारा हमला करने की भूल कर सके। आपको बता दें कि सितंबर तक अमेरिकी फौज के साथ-साथ नाटो सेना को भी यहां से हटा लिया जाएगा। हालांकि अमेरिकी फौज की वापसी में हुई देरी पर तालिबान ने नाराजगी जाहिर की है। तालिबान का कहना है कि अमेरिका के यहां से पूरी तरह से हटने तक वो किसी से कोई वार्ता नहीं करेगा।

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