तालिबान को नहीं मिलेगा अफगान केंद्रीय बैंक का पैसा : अमेरिका

अफगान केंद्रीय बैंक का अधिकांश धन अमेरिका में जमा है जिसके लिए अमेरिकी उप वित्त मंत्री ने कहा है कि यह तालिबान को नहीं मिलेगा। हालांकि तालिबान कह चुका है कि अफगान केंद्रीय बैंक के नौ अरब डालर से अधिक के धन पर लगे प्रतिबंध को अमेरिका हटा ले।

Monika MinalWed, 20 Oct 2021 12:18 AM (IST)
तालिबान को नहीं मिलेगा अफगान केंद्रीय बैंक का पैसा : अमेरिका

वाशिंगटन, रायटर।  अमेरिका के उप वित्त मंत्री वैली एडेयेमो (Wally Adeyemo)  ने मंगलवार को कहा कि अभी ऐसी स्थिति नहीं है जिसमें तालिबान को अफगान केंद्रीय बैंक का पैसा मिल सके। अफगान केंद्रीय बैंक का अधिकांश धन अमेरिका में जमा है। तालिबान अमेरिका से कह चुका है कि वह देश से बाहर रखे अफगान केंद्रीय बैंक के नौ अरब डालर से अधिक के धन पर लगे प्रतिबंध को हटा ले क्योंकि उसकी सरकार गहराते आर्थिक संकट से जूझ रही है।

एडेयेमो ने सीनेट की बैंकिंग समिति से कहा, 'हम मानते हैं कि तालिबान के खिलाफ अपने प्रतिबंधों पर हम कायम रहें, लेकिन साथ ही साथ अफगानी लोगों तक वैध मानवीय सहायता पहुंचाने के तरीके भी तलाशते रहें। ठीक यही हम कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय अपनी प्रतिबंध प्रणाली के दायरे में मानवीय समूहों को यह स्पष्ट करने के लिए हर मुमकिन कदम उठा रहा है कि वाशिंगटन अफगान लोगों तक सहायता पहुंचाना चाहता है, साथ ही तालिबान को चेतावनी दी कि वह देश में मानवीय सहायता पहुंचने की अनुमति दे।

तालिबान को इन फंडों तक पहुंचने से रोकने के लिए बाइडन प्रशासन ने अमेरिकी वित्तीय संस्थानों में रखे अफगानिस्तान सरकार के अरबों डालर के भंडार को फ्रीज करने का फैसला किया है। अगस्त में अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद आइएमएफ ने भी अफगानिस्तान के लिए फंड को रोक दिया था। इसके अतिरिक्त, अमेरिका ने अफगान सेंट्रल बैंक से संबंधित अरबों डालर की संपत्ति को भी फ्रीज कर दिया।

15 अगस्त से तालिबान पूरी तरह अफगानिस्तान पर काबिज हो चुका है और सितंबर में इसने अपनेे अंतरिम सरकार का गठन भी कर लिया। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतेरस ने पिछले सप्ताह कहा कि अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था ‘बनने या बिखरने की स्थिति' का सामना कर रही है और उन्होंने दुनिया से देश की अर्थव्यवस्था को चरमराने से बचाने का आग्रह किया।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुतेरस ने तालिबान से महिलाओं को काम करने की अनुमति देने और लड़कियों को शिक्षा हासिल करने देने के अपने वादे पर कायम रहने की अपील भी की। अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था अगस्त में तालिबान के अधिग्रहण से पहले अंतरराष्ट्रीय सहायता पर निर्भर थी। देश का 75 प्रतिशत खर्च अंतरराष्ट्रीय सहायता से मिलता था।

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