पाकिस्‍तान की बोलती बंद करने वाली स्नेहा दुबे को मिल रही प्रशंसा, युवा राजनयिकों की परंपरा को आगे बढ़ाया

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के वार्षिक सत्र में पाकिस्तान के नेताओं को करारा जवाब देने की भारत के युवा राजनयिकों की परंपरा को स्नेहा दुबे ने आगे बढ़ाया है। दुबे ने पूरी मजबूती से भारत का पक्ष रखा और इमरान खान के पाखंड को दुनिया के सामने रखा।

Arun Kumar SinghSat, 25 Sep 2021 11:00 PM (IST)
भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी स्नेहा दुबे

 संयुक्त राष्ट्र, प्रेट्र। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के वार्षिक सत्र में पाकिस्तान के नेताओं को करारा जवाब देने की भारत के युवा राजनयिकों की परंपरा को स्नेहा दुबे ने आगे बढ़ाया है। दुबे ने पूरी मजबूती से भारत का पक्ष रखा और इमरान खान के पाखंड को दुनिया के सामने रखा। भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी दुबे की सधे एवं तीखे भाषण के लिए सोशल मीडिया पर लोग उनकी सराहना कर रहे हैं। ट्विटर पर एक यूजर ने कहा, 'इस महान राष्ट्र के प्रतिभाशाली, युवा, ऊर्जावान राजनयिक द्वारा किया गया उत्कृष्ट खंडन।' एक अन्य यूजर ने कहा, 'भारत की वीर राजनयिक.. शानदार।'

सैयद अकबरुद्दीन के कार्यकाल में शुरू हुआ था युवा राजनयिकों से जवाब दिलाने का चलन

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत सैयद अकबरुद्दीन के कार्यकाल के दौरान पाकिस्तानी नेताओं के संबोधन पर युवा भारतीय राजनयिकों से जवाब दिलाने का चलन शुरू हुआ था। इसका संदेश साफ था कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के नेताओं को जवाब देने के लिए भारत के युवा राजनयिक ही काफी हैं। सितंबर 2016 में संयुक्त राष्ट्र में भारत की तत्कालीन प्रथम सचिव एनम गंभीर ने जवाब देने के अधिकार का प्रयोग करते हुए उस समय के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को करारा जवाब दिया था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आतंकी ओसामा बिन लादेन के एबटाबाद में पाए जाने का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान को आईना दिखाया था।

एनम गंभीर से लेकर विदिशा मैत्रा और मिजिटो विनिटो ने पाकिस्तानी नेताओं को दिया था मुंहतोड़ जवाब

उसके अगले साल यानी 2017 में तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खक्कन अब्बासी को इतिहास की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान आतंक का पर्याय बन गया है। पवित्र भूमि की खोज ने वास्तव में शुद्ध आतंक की भूमि का निर्माण किया है। इसके साथ ही पाकिस्तान को आतंकिस्तान बताया था।

साल 2019 में संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को करारा जवाब देते हुए उन्हें 'इमरान खान नियाजी' संबोधित किया था। भारत के खिलाफ इमरान के झूठे और मनगढंत आरोपों पर तीखा प्रहार करते हुए मैत्रा ने कहा था कि उन्होंने जिन शब्दों का प्रयोग किया है वो 21वीं शताब्दी के नहीं, मध्ययुगीन काल की मानसिकता को दर्शाते हैं।

मैत्रा ने तंज कसते हुए कहा था कि इमरान खान को इतिहास की अपनी संक्षिप्त जानकारी को ताजा करना चाहिए। पिछले साल संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव मिजिटो विनिटो ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देते हुए कहा था कि सात दशक में पाकिस्तान के पास दुनिया को दिखाने के लिए आतंकवाद, नस्लीय नरसंहार, बहुसंख्यक कट्टरवाद और गुप्ता परमाणु व्यापार है।

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