केपिटल बिल्डिंग में हिंसा करने वालों को बताया गया सेल्‍फ स्‍टाइल मिलिशिया, इन आरोपों के तहत चलेगा मामला

सेल्‍फ स्‍टाइल मिलिशिया ने पूरी योजना से किया था हमला

6 जनवरी को केपिटल बिल्डिंग में हिंसा करने वालों को कोर्ट में सेल्‍फ स्‍टाइल मिलिि‍शिया बताया गया है। इसमें कहा गया है कि ये एक सोची समझी रणनीति के तहत किया गया। अब आरोपियों के खिलाफ विभिन्‍न धाराओं में मामला चलेगा।

Kamal VermaWed, 20 Jan 2021 07:49 AM (IST)

वाशिंगटन। कोलंबिया की जिला अदालत ने केपिटल बिल्डिंग के अंदर 6 जनवरी 2021 को हुई राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप समर्थकों की हिंसक घटना को सेल्‍फ स्‍टाइल मिलिशिया के सदस्‍यों की योजना करार दिया है। वाशिंगटन पोस्‍ट ने कोर्ट के दस्‍तावेजों के हवाले से कहा है कि इस तरह के मिलिशिया की ये एक सोची समझी योजना थी जिसके तहत केपिटल बिल्डिंग पर हमला किया गया। कोर्ट ने इस संबंध में आरोपियों पर षड़यंत्र रचने, अधिकारियों को घायल करने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, सरकार के काम में दखल देने और बाधा पहुंचाने, प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने और ऐसा करने के लिए हिंसा करने के तहत मामला दायर किया है।

आपको बता दें कि 6 जनवरी को जिस वक्‍त केपिटल बिल्डिंग में चुनाव प्रक्रिया और इससे जुड़े परिणामों को अंतिम मुहर लगाई जानी थी उस वक्‍त बिल्डिंग के बाहर सैकड़ों की संख्‍या मं मौजूदा ट्रंप समर्थकों ने इमारत में घुसकर जबरदस्‍त तोड़फोड़ और हिंसा को अंजाम दिया था। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों द्वारा बचाव में चली गोली से एक महिला समेत कुल पांच लोगों की मौत भी हो गई थी। इसके अलावा कई पुलिसकर्मी इस हिंसा में घायल हुए थे। सभी सदस्‍यों ने इस घटना को अमेरिका के इतिहास की सबसे बुरी घटना बताते हुए इस दिन को काला दिन बताया था। इस घटना के बाद डेमोक्रेट सांसदों ने राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को पद से हटाने और उनके ऊपर महाभियोग चलाने की मांग भी की थी।

संयुक्‍त सदन की स्‍पीकर नैंसी पेलोसी ने भी उप-राष्‍ट्रपति माइक पेंस से ये मांग की थी कि वो राष्‍ट्रपति ट्रंप को पद से हटाने के लिए संविधान के 25वें संशोधन का सहारा लें और सत्‍ता अपने हाथों में ले लें। हालांकि माइक पेंस ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया था। उन्‍होंने इस घटना के बाद चुनाव परिणामों का अंतिम एलान करते हुए जो बाइडन के नाम पर मुहर लगाई थी, जो बुधवार 20 जनवरी 2021 को राष्‍ट्रपति पद की शपथ लेंगे। 6 जनवरी को घटी इस घटना के बाद राष्‍ट्रपति ट्रंप पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया को भी तेज कर दिया गया था।

गौरतलब है कि वाशिंगटन डीसी के मेयर ने इस घटना से पूर्व सरकार से नेशनल गार्ड तैनात करने की सिफारिश की थी जिसको ठुकरा दिया गया था। इसके लिए भी सांसदों ने सवाल उठाते हुए राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को ही निशाने पर लिया था। हालांकि बाद में यहां पर नेशनल गार्ड की तैनाती कर दी गई थी। डेमोक्रेट सांसदों का आरोप था कि राष्‍ट्रपति ट्रंप ने अपने समर्थकों को यहां पर आने और चुनाव परिणामों को न मानते हुए हिंसा करने के लिए उकसाया था।

इन सांसदों का ये भी कहना है कि इस घटना के लिए पूरी तरह से ट्रंप ही जिम्‍मेदार हैं। आपको बता दें कि अमेरिकी इतिहास में राष्‍ट्रपति ट्रंप पहले ऐसे राष्‍ट्राध्‍यक्ष हैं जिन्‍हें दूसरी बार महाभियोग का सामना करना पड़ रहा है। उनके खिलाफ जो प्रक्रिया चल रही है उसके आधार पर उन्‍हें 2024 में होने वाले चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है।

केपिटल बिल्डिंग में घटी घटना के बाद जब कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने इसकी निंदा की तो राष्‍ट्रपति के तेवर भी नरम हो गए थे। इसके बाद ही वो सत्‍ता हंस्‍तातंरण के पक्ष में पहली बार बोले थे। अपने बयान में उन्‍होंने कहा था कि वो 20 जनवरी को बाइडन को सत्‍ता सौंप देंगे। इस घटना के बाद राष्‍ट्रपति ट्रंप ने भी केपिटल हिंसा की निंदा की थी। इसके बाद प्रथम महिला ने राष्‍ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल के अंतिम दिन अपने बयान में कहा कि इस तरह की हिंसा को किसी भी तरह से सही नहीं कहा जा सकता है।

 

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