पैनक्रिएटिक कैंसर का आसान होगा इलाज, कीमोथेरेपी होगी ज्यादा प्रभावी; दुष्प्रभाव भी होगा कम

शोधकर्ताओं ने बताया है कि चूहों पर किए गए अध्ययन में पाया गया है कि यह ड्रग कीमोथेरेपी काकटेल फोल्फिरिनाक्स (फोलिनिक एसिड 5-फ्लूरोरासिल इरिनोटेकन और आक्साप्लिप्टिन का कांबिनेशन) के दुष्प्रभाव को बहुत हद तक कम देता है। यह कांबिनेशन पैनक्रिएटिक कैंसर के इलाज में आमतौर पर इस्तेमाल होता है।

Neel RajputFri, 03 Dec 2021 02:12 PM (IST)
शोधकर्ताओं ने की कैंसर सेल को कमजोर बनाने वाली एक विशिष्ट दवा की पहचान की

वाशिंगटन, एएनआइ। वैसे तो किसी भी अंग के कैंसर का इलाज कठिन होता है, लेकिन पैनक्रियाज के मामले में यह और भी मुश्किल होता है। क्योंकि जब तक उसका पता लगता है, तब तक वह बहुत ज्यादा फैल चुका होता है, यानी एडवांस्ड स्टेज में पहुंच चुका होता है। ऐसे में डायग्नोसिस के बाद रोगी बमुश्किल एक साल से ज्यादा नहीं जी पाता है। इन स्थितियों में बहुत तेज कीमोथेरेपी इलाज का एक तात्कालिक उपाय बचता है। लेकिन उसके दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट) भी काफी होते हैं। कई ट्यूमरों पर तो कीमोथेरेपी का असर भी नहीं होता है।

इन स्थितियों से निपटने में सेंट लुईस स्थित वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल आफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने एक ऐसे ड्रग कंपाउंड की पहचान की है, जो पैनक्रिएटिक (अग्नाशय) कैंसर सेल को इस तरह से कमजोर बना देता है, जिससे वह कीमोथेरेपी के प्रति संवेदनशील हो जाता है। मतलब ट्यूमर पर कीमोथेरेपी का प्रभावी असर होता है। खास बात यह कि उससे साइड इफेक्ट भी कम होता है। यह अध्ययन ‘साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

शोधकर्ताओं ने बताया है कि चूहों पर किए गए अध्ययन में पाया गया है कि यह ड्रग कीमोथेरेपी काकटेल फोल्फिरिनाक्स (फोलिनिक एसिड, 5-फ्लूरोरासिल, इरिनोटेकन और आक्साप्लिप्टिन का कांबिनेशन) के दुष्प्रभाव को बहुत हद तक कम देता है। दवा का यह कांबिनेशन पैनक्रिएटिक कैंसर के इलाज में आमतौर पर इस्तेमाल होता है।

वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल आफ मेडिसिन में कैंसर विशेषज्ञ तथा एसोसिएट प्रोफेसर व इस शोध के वरिष्ठ लेखक कियान-हुआत लिमो ने बताया कि मौजूदा स्थितियों को देखते हुए पैनक्रिएटिक कैंसर के इलाज के लिए नया और बेहतर थेरेपी की बड़ी जरूरत है। हम अभी जिस पावरफुल दवा का इस्तेमाल करते हैं, वे हमेशा गंभीर साइड इफेक्ट पैदा करती है, जिससे कि ज्यादा कीमोथेरेपी लगभग असंभव हो जाती है। लेकिन यह नई दवा कैंसर सेल को कमजोर कर देती है, जिससे वह इस खास कीमोथेरेपी के लिए उसे (कैंसर सेल को) संवेदनशील बना देती है। दरअसल, प्रयोग के दौरान पाया गया कि जिन चूहों को इस दवा के साथ कीमोथेरेपी दी गई, वे सिर्फ कीमोथेरेपी पाने वाले चूहों की तुलना में ज्यादा स्वस्थ दिखे। इससे पता चलता है कि यह नई दवा कीमोथेरेपी का दुष्प्रभाव को कम करती है।

एटीआइ-450 नामक यह दवा एंटी इन्फ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाली) है और रूमेटाइड गठिया के इलाज के लिए भी उसकी क्लिनिकल ट्रायल चल रही है। फोल्फिरिनाक्स- पैनक्रिएटिक कैंसर का फ्रंटलाइन इलाज है, लेकिन देखा गया है कि इसके इस्तेमाल से तीन में से बमुश्किल एक रोगी में ही ट्यूमर छोटा हुआ। इतना ही नहीं, यह सीमित प्रभाव भी छह से सात महीने तक ही होता है। इसके सामान्य दुष्प्रभाव मिचली, उल्टी, दस्त, थकान, बालों का झड़ना, खून की कमी और भूख कम लगने के रूप में सामने आते हैं। पता चला कि एमके2 नामक एक ऐसा मालीक्यूल है, जो पैनक्रिएटिक ट्यूमर सेल का कीमोथेरेपी से बचने में मदद करता है। यह मालीक्यूल पैनक्रिएटिक कैंसर सेल में काफी सक्रिय होता है, जो कीमोथेरेपी के सिग्नल का मार्ग बदल देता है, जिससे कि कैंसर सेल्स बच जाते हैं।

एटीआइ-450 इसलिए भी खास है, क्योंकि यह एमके2 इन्हीबिटर (प्रतिरोधक) है। इसलिए जब नई दवा से एमके2 के कामकाज को बाधित किया गया तो चूहों में कीमोथेरेपी का असर ज्यादा हुआ। पाया गया कि जब एटीआइ-450 के साथ दी गई कीमोथेरेपी और एटीआई-450 के बिना ही कीमोथेरेपी दी गई तो एटीआइ -450 वाली कीमोथेरेपी से ट्यूमर का आकार ज्यादा कम हुआ। इतना ही, इस कांबिनेशन वाला इलाज पाने वाले चूहे कीमोथेरेपी के बाद औसतन 41 दिन जीवित रहे, जबकि सिर्फ कीमोथेरेपी वाले चूहे औसतन 28 दिन ही जिंदा रह पाए। इलाज के इस नए तरीके से न सिर्फ जीवनकाल बढ़ा बल्कि उसके दुष्प्रभाव भी काफी कम रहे।

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