यूएन के एक तिहाई कर्मचारी हुए यौन उत्पीड़न का शिकार

संयुक्त राष्ट्र, रायटर। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न जैसे अपराध से संयुक्त राष्ट्र (यूएन) भी अछूता नहीं रह पाया। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो साल में यूएन के एक तिहाई कर्मचारियों को किसी ना किसी तरह के उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा। इनमें आधे से अधिक के साथ यूएन के कार्यालयों में यौन दु‌र्व्यवहार किया गया। आश्चर्यजनक रूप से तीन में से एक पीड़ित ने ही इस अपराध के खिलाफ कोई कार्रवाई की।

दुनियाभर में यौन उत्पीड़न के खिलाफ चल रहे मी टू अभियान के बीच कराए गए इस सर्वे में यूएन के 30,364 कर्मियों ने हिस्सा लिया। इनमें से 21.7 फीसद को अपमानजनक चुटकुले और यौन किस्से सुनने पड़े थे। 14.2 फीसद के शरीर से जुड़ी भद्दी टिप्पणियां की गईं। 10.1 फीसद लोग शारीरिक उत्पीड़न का भी शिकार हुए। सर्वे में यह भी सामने आया कि तीन में से दो उत्पीड़क पुरुष थे।

यौन उत्पीड़न को नहीं किया जाएगा नजरअंदाज
सर्वे के परिणाम सामने आने पर यूएन महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने कहा, 'अब दो बातें साफ हो गई हैं। पहली यह कि लोग अब भी यौन उत्पीड़न पर बात करने से झिझकते हैं। दूसरी यह कि अब भी लोगों में अविश्वास है।' उन्होंने यह भी कहा कि समानता और मानवाधिकार जैसे मूल्यों को बढ़ाने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था के तौर पर यूएन को दुनिया के सामने उदाहरण बनना होगा। इसके लिए कार्यस्थल को प्रत्येक व्यक्ति के लिए सुरक्षित करना जरूरी है। गुतेरस पहले भी कई बार यौन उत्पीड़न जैसे घृणित अपराध को नजरअंदाज नहीं करने की बात कर चुके हैं। यौन उत्पीड़न और दु‌र्व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए यूएन एड्स एजेंसी के प्रमुख को पद से हटाया भी जा रहा है।

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