सौर प्रणाली के रहस्यों से पर्दा उठाने 12 वर्षो के अभियान पर रवाना हुआ नासा का लूसी

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने शनिवार को अपने तरह का पहला अंतरिक्ष मिशन लांच किया। इसके तहत लूसी नामक अंतरिक्ष यान को 12 वर्षो के लिए अभियान पर भेजा गया है जो बृहस्पति ग्रह के आठ क्षुद्रग्रहों (एएस्टेरायड) के रहस्यों से पर्दा उठाएगा।

TaniskSat, 16 Oct 2021 10:28 PM (IST)
सौर प्रणाली के रहस्यों से पर्दा उठाने रवाना हुआ नासा का लूसी। (फोटो- एपी)

केप केनवरल, एपी। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने शनिवार को अपने तरह का पहला अंतरिक्ष मिशन लांच किया। इसके तहत लूसी नामक अंतरिक्ष यान को 12 वर्षो के लिए अभियान पर भेजा गया है, जो बृहस्पति ग्रह के आठ क्षुद्रग्रहों (एएस्टेरायड) के रहस्यों से पर्दा उठाएगा। इस दौरान बृहस्पति ग्रह की कक्षा साझा करने वाले क्षुद्रग्रहों के साथ मौजूद सात रहस्यमयी चट्टानों के बारे में भी पता लगाया जाएगा। इन चट्टानों को ग्रहों के निर्माण का प्राचीन अवशेष माना जाता है और इनके जरिये सौर प्रणाली की उत्पत्ति के संबंध में भी जानकारी हासिल की जा सकती है। एटलस-5 राकेट के साथ लूसी को तड़के करीब 6.3 अरब किलोमीटर लंबी यात्रा पर रवाना किया गया।

बीटल्स बैंड के गाने पर आधारित है लूसी नाम 

अंतरिक्ष यान लूसी को 32 लाख साल पुराने मनुष्यों के पूर्वजों के कंकाल के अवशेष का नाम दिया गया है। इसे इथोपिया में करीब 50 साल पहले खोजा गया था। इस खोज को चर्चित इंग्लिश बैंड बीटल्स (1967 ) के गाने 'लूसी इन द स्काई विद डायमंड्स' से प्रेरित होते हुए नाम दिया गया था, जिसने नासा को अपने अंतरिक्ष यान को लूसी नाम देने के लिए प्रेरित किया।

अंतरिक्ष यान में मौजूद है हीरों की डिस्क 

अंतरिक्ष यान में लैब में बने हीरों की एक डिस्क भी मौजूद है, जिसे एक वैज्ञानिक उपकरण के लिए खास तौर पर तैयार किया गया है। जीवाश्म लूसी की खोज करने वाले विज्ञानी डोनाल्ड जानसन ने कहा, 'मैं आश्चर्यचकित हूं। यह हमारे अतीत, वर्तमान व भविष्य के पार जाने जैसा है। मनुष्यों के पूर्वज ने एक ऐसे मिशन के बारे में प्रेरित किया, जो सौर प्रणाली के निर्माण के बारे में अहम जानकारी इकट्ठा करने का भरोसा देता है।' एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी से जुड़े जानसन इस मिशन की लांचिंग के वक्त केप केनवरल में मौजूद थे।

98.1 करोड़ डालर की लागत

98.1 करोड़ डालर (करीब 7,361 करोड़ रुपये) के लूसी मिशन का उद्देश्य बृहस्पति के ट्रोजन एस्टेरायड के बारे में पता लगाना है। माना जाता है कि ट्रोजन एस्टेरायड उतने ही पुराने हैं, जितनी पुरानी सौर प्रणाली है। इनमें कुछ तो अपनी कक्षा में मौजूद रहते हैं, जबकि कुछ बृहस्पति का पीछा करते हैं। अपनी कक्षा होने के बावजूद ट्रोजन ग्रहों से काफी दूर हैं और एक-दूसरे से बिखरे रहते हैं। लूसी अगले साल अक्टूबर में व वर्ष 2024 में पृथ्वी के पास से गुजरता हुआ गुरुत्वाकर्षण हासिल करेगा जो बृहस्पति पर मौजूदगी के दौरान काम आएगा। नासा के विज्ञान मिशन प्रमुख थामस ज़ुर्बुचेन ने कहा कि यह रास्ता जटिल और घुमावदार है।

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