ध्यान के जरिये गलतियों को सुधारने में मिलेगी मदद, विभिन्न प्रकार के ध्यान से अलग-अलग होता है न्यूरोकाग्निटिव असर

शोधकर्ताओं ने इसके लिए 200 से ज्यादा प्रतिभागियों को अध्ययन में शामिल किया। उनके जरिये यह जानने की कोशिश की कि खुला ध्यान किस प्रकार से गलतियों को पकड़ने में मदद करता है। इन प्रतिभागियों ने पहले कभी ध्यान नहीं किया था।

Dhyanendra Singh ChauhanSun, 28 Nov 2021 08:22 PM (IST)
बेहतर होती है गलतियों को पहचानने की क्षमता

मिशिगन (अमेरिका), एएनआइ। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के एक ताजा शोध में इस बात की पुष्टि की गई है कि यदि आपको भूलने की आदत है और आप बहुत ज्यादा गलतियां करते हैं तो इस समस्या को ध्यान (मेडिटेशन) के जरिये बहुत हद तक कम कर सकते हैं। यह शोध ब्रेन साइंसेज जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

शोधकर्ताओं ने इस बात की पड़ताल की कि ध्यान किस प्रकार से व्यक्ति की भावना, सोच या संवेदनशीलता को बढ़ाता है, जिससे कि मस्तिष्क की क्रियाविधि में बदलाव आता है और उससे गलतियों की पहचान करने या उसे पकड़ने की क्षमता बढ़ जाती है।

शोधकर्ता और इस अध्ययन के लेखक जेफ लिन का कहना कि लोगों की दिलचस्पी यह जानने में है कि ध्यान में ऐसा क्या कुछ है, जिसका लाभ या असर विज्ञान के जरिये साबित नहीं किया जा सका है। लेकिन हमारे लिए यह बड़ा ही अद्भुत रहा कि निर्देशित ध्यान के सिर्फ एक सत्र से मस्तिष्क की गतिविधियों में बदलाव ध्यान नहीं करने वालों की तुलना में उल्लेखनीय था।

लक्ष्य सिर्फ शांत होकर बैठने और एकाग्रचित होने का होता है
उनके मुताबिक, यह भी देखने को मिला कि विभिन्न प्रकार के ध्यान का न्यूरोकाग्निटिव (सोचने और समझने की क्षमता) प्रभाव भी अलग-अलग होता है। लेकिन इस बात को लेकर बहुत कम शोध हुए हैं कि ध्यान के जरिये गलतियों को पहचानने की क्षमता पर क्या असर होता है। कुछ ध्यान इस बाबत होते हैं, जिसमें एक ही बात पर फोकस होता है जैसे कि सांस लेने और छोड़ने पर। लेकिन खुला ध्यान कुछ अलग होता है। इसमें आप अंतर्निहित होकर अपने शरीर और दिमाग में होने वाली गतिविधियों पर फोकस करते हैं। लक्ष्य सिर्फ शांत होकर बैठने को होता है और दिमाग को आसपास से समेट कर एकाग्रचित होना होता है।

शोधकर्ताओं ने इसके लिए 200 से ज्यादा प्रतिभागियों को अध्ययन में शामिल किया। उनके जरिये यह जानने की कोशिश की कि खुला ध्यान किस प्रकार से गलतियों को पकड़ने में मदद करता है। इन प्रतिभागियों ने पहले कभी ध्यान नहीं किया था। इनसे 20 मिनट का खुला ध्यान लगवाया गया और उस दौरान दिमाग की गतिविधियों को इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी या ईईजी के जरिये रिकार्ड किया गया। इसके बाद कंप्यूटरीकृत व्यवस्था से व्याकुलता या विकर्षण (डिस्ट्रैक्शन) जांच की गई।

तंत्रिका संबंधी गतिविधियों का बहुत ही सटीक आकलन हो सका

लिन ने बताया कि ईईजी दिमागी गतिविधियों को मिलीसेकंड स्तर पर भी माप या रिकार्ड कर सकता है। इसलिए तंत्रिका संबंधी गतिविधियों का बहुत ही सटीक आकलन हो सका। उनके मुताबिक, एक खास न्यूरल सिग्नल एक गलती, जिसे एरर पाजिटिविटी कहते हैं, पर महज आधा सेकंड के लिए मिलता है, जो सचेत अवस्था में गलतियों की पहचान से जुड़ा होता है। हमने पाया कि इस सिग्नल की शक्ति ध्यान करने वालों में ध्यान नहीं करने वालों की तुलना में बढ़ती है।

हालांकि ध्यान करने वालों में तत्काल कोई सुधार तो नहीं दिखा, लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके सतत अभ्यास से संभावित लाभ का मार्ग प्रशस्त होता है।

यह बदलाव में महज 20 मिनट के ध्यान से देखने को मिला कि इससे मस्तिष्क की गतिविधियां बढ़ाकर गलतियों की पहचान और उस पर नजर रखने की क्षमता बढ़ती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह निष्कर्ष हमें इस बात को लेकर आश्वस्त करता है कि ध्यान के जरिये हम वाकई अपने दैनिक कामकाज में प्रदर्शन सुधार सकते हैं।

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