दुनिया में पहली बार मानवरहित ड्रोन से भरा गया विमान में ईंधन, अमेरिकी नेवी और बोइंग का संयुक्त प्रयास सफल
नौसेना के मानवरहित कैरियर एविएशन प्रोग्राम आफिस के मैनेजर कैप्टन चाउ रीड ने कहा कि यह मिशन हमारे लड़ाकू विमानों को बहुत बड़ी ताकत देगा। इससे ईंधन की बड़ी समस्या से मुक्ति मिलेगी। यह हमारी नौसेना के लिए महत्वपूर्ण और रोमांचक क्षण है।
वाशिंगटन, एएनआइ। अमेरिका की इतिहास में पहली बार देश की नौसेना (US Navy) और बोइंग कंपनी ने मिलकर मानवरहित ड्रोन (Unmanned Drone) के सहारे विमान में ईंधन डाला। यह दुनिया के लिए भी पहला ऐसा मामला है। नौसेना व बोइंग कंपनी के संयुक्त प्रयास से मानवरहित ड्रोन एमक्यू-25 टी 1 (MQ-25 T1) से हवा में उड़ान के दौरान एक विमान में ईधन भरने में सफलता प्राप्त की गई है।
नौसेना के रियर एडमिरल ब्राइन कोरे (Rear Admiral Brian Corey) ने कहा कि यह कार्य पूरी सफलता से किया गया। अब यह सुनिश्चित हो गया है कि नौसेना के हवा में ईंधन भरने की प्रक्रिया की मानकों के अनुसार एमक्यू-25 हमारी टैंकर मिशन की जरूरतों को पूरा कर सकता है। इससे हमारे विमान वाहकों की क्षमता में भी वृद्धि होगी। इस परीक्षण में नौसेना का विमान एफ/ए -18 सुपर हार्नेट हवा में ही बोइंग कंपनी के मानवरहित ड्रोन एमक्यू-25 टी 1 संपर्क में आया। टी 1 ने अपने एरियल रिफ्यूलिंग स्टोर से एफ/ए 18 में सफलता के साथ ईंधन स्थानांतरित कर दिया।
नौसेना के मानवरहित कैरियर एविएशन प्रोग्राम आफिस के मैनेजर कैप्टन चाउ रीड ने कहा कि यह मिशन हमारे लड़ाकू विमानों को बहुत बड़ी ताकत देगा। इससे ईंधन की बड़ी समस्या से मुक्ति मिलेगी। यह हमारी नौसेना के लिए महत्वपूर्ण और रोमांचक क्षण है।
इससे फाइटर जेट को अब बार-बार ईंधन के लिए कैरियर पर उतरने की जरूरत नहीं होगी। बता दें कि एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान के दौरान फाइटर जेट अपनी पूरी ईंधन क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। अमेरिकी नौसेना के एफए 18 सुपर हॉर्नेट बेड़े को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है। बार-बार उड़ान भरने और लैंडिंग करने से बचने के कारण लड़ाकू विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने का चांस भी कम हो जाएंगे।