अमेरिका में भी हिंदी का डंका, एशियाई अमेरिकियों में बहुत ही लोकप्रिय है हिंदी

भाषा विशेषज्ञों ने कहा है कि एशियाई अमेरिकियों द्वारा बोली जाने वाली शीर्ष पांच भाषाओं में हिंदी शामिल है। हिंदी विशेषतौर पर एशियाई अमेरिकी लोगों में बहुत ही लोकप्रिय है। भाषा विशेषज्ञों ने यह जानकारी सीनेट में दी है।

Shashank PandeyThu, 05 Aug 2021 02:43 PM (IST)
अमेरिका में भी हिंदी का बजा डंका।(फोटो: दैनिक जागरण)

वाशिंगटन, प्रेट्र। अमेरिका में भी हिंदी का बोलबाला है। हिंदी विशेषतौर पर एशियाई अमेरिकी लोगों में बहुत ही लोकप्रिय है। यहां के लोगों में बोली जाने वाली टाप 5 भाषाओं में हिंदी का नाम है। भाषा विशेषज्ञों ने यह जानकारी सीनेट में दी है। एशियन-अमेरिकन एडवासिंग जस्टिस के अध्यक्ष जान यांग ने सीनेट की होमलैंड सिक्योरिटी एंड गवर्नमेंटल अफेयर कमेटी के सदस्यों को भाषा के संबंध में पूरी जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि अमेरिका में दो तिहाई एशियाई अमेरिकन जनसंख्या प्रवासियों की है। इनमें से 52 फीसद प्रवासी अंग्रेजी में सीमित दक्षता रखते हैं। एशियाई अमेरिकी नागरिकों में हिंदी, चीनी, वियतनामी, तगालोग, कोरियन भाषा बोली जाती हैं। सीनेट में इन सभी भाषाओं के प्रवासियों की भाषाई दक्षता की भी जानकारी दी गई। एशियाई अमेरिकी लोगों में हिंदी की लोकप्रियता इस कदर है कि वे अधिकांश अवसरों पर हिंदी का ही प्रयोग करना पसंद करते हैं।

भारतीय-अमेरिकियों ने मनाया अनुच्छेद 370 हटाए जाने का जश्न

भारतीय अमेरिकियों ने जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने की दूसरी वर्षगांठ पर एक समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर उनके एक समूह ने कहा कि जम्मू और कश्मीर में आतंकी हमलों की घटनाओं में 40 फीसद की कमी आई है, । कैपिटल हिल में 'कश्मीर : मूविंग फारवर्ड इन डेनजरस जोन' विषय पर हिंदू पालिसी रीसर्च एंड एडवोकेसी कलेक्टिव (हिंदूपैक्ट) ने परिचर्चा की मेजबानी की। इसमें अमेरिका के विश्व हिंदू परिषद (वीएचपीए) और ग्लोबल कश्मीरी पंडित डिस्पोरा (जीकेपीडी) के साथ ही कश्मीरी व अफगान समुदाय के सदस्यों ने भी शिरकत की है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन के भारत दौरे के मद्देनजर 29 जुलाई को 'हैशटैग कश्मीर फारवर्ड' का दो हफ्ते का कार्यक्रम शुरू किया गया। इस समूह ने एक बयान जारी करके कहा कि जम्मू और कश्मीर में इन दो सालों में आतंकी घटनाओं में 40 फीसद की कमी आई है। इस कार्यक्रम में अमेरिकी कांग्रेस के अधिकारी, एनजीओ के नेता, मीडिया की हस्तियां आदि शामिल हुए और आतंकवाद समर्थक पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया। 

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