PM Modi US Visit: अमेरिका चाहता है यूएन में भारत को मिले स्थायी सदस्यता - हर्षवर्धन श्रृंगला

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 76 वें सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि पीएम मोदी ने अपने संबोधन में लोकतंत्र की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में टेक्नोलाजी के इस्तेमाल के बारे में भी बात की।

TaniskSat, 25 Sep 2021 08:10 PM (IST)
विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला। ( फोटो- एएनआइ )

न्यूयार्क, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे को लेकर विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि अमेरिका और पुर्तगाल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए। न केवल अमेरिका बल्कि अन्य क्वाड भागीदारों और कई अन्य देश लगातार यह मांग कर रहे हैं। पुर्तगाल ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भारत का समर्थन किया।

श्रृंगला ने कहा कि पीएम मोदी ने अपने संबोधन में लोकतंत्र की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में टेक्नोलाजी के इस्तेमाल के बारे में भी बात की। प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान पर बोलते हुए कहा कि ये सुनिश्चित किया जाना बहुत जरूरी है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने और आतंकी हमलों के लिए न हो।

प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका दौरे को लेकर श्रृंगला ने कहा कि पीएम मोदी का यह अमेरिकी दौरा व्यापक और उपयोगी रहा है, जिसने उच्च स्तरीय बातचीत की अनुमति दी। उन्होंने कहा कि जब अफगानिस्तान की बात आती है तो एकता बहुत प्रासंगिक होती है। क्वाड बैठक अफगानिस्तान के लिए नेताओं के उद्देश्यों को एक साथ रखने में बहुत उपयोगी साबित हुई।

श्रृंगला ने यह भी  कहा कि प्रधानमंत्री ने यूएनएससी के बारे में अपनी बात रखी है। उन्होंने विशेष रूप से यूएनएससी में समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर हमारे योगदान के बारे में भी बात की। हमने सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता की थी, जो एक बहुत ही सफल अध्यक्षता थी। यह पहली बार है जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने यूएनएससी में एक बैठक साझा की है। यह भी पहली बार है कि भारत या किसी देश ने समुद्री सुरक्षा पर यूएनएससी की बहस को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है और एक परिणाम दस्तावेज के साथ आया है जिसे इस मुद्दे पर मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में संदर्भित किया जा रहा है।

 

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