कोविड से लड़ने वाले अणुओं का लगाया जा रहा पता, प्रभावी दवा बनाने की राह होगी आसान

कोविड से लड़ने वाले अणुओं का लगाया जा रहा पता, प्रभावी दवा बनाने की राह होगी आसान

न्यू मेक्सिको हेल्थ साइंस सेंटर के विज्ञानियों ने बनाया एक नया टूल। इससे कोरोना की प्रभावी दवा बनाने की राह होगी आसान। एक साल से अधिक समय से दुनिया कोरोना महामारी की मार से जूझ रही है। सामुदायिक प्रतिरक्षण के लिए अब टीका भी उपलब्ध हो गया है।

Nitin AroraTue, 04 May 2021 06:58 PM (IST)

वाशिंगटन, एएनआइ। कोरोना से जंग जीतने के लिए पूरी दुनिया शिद्दत से जुटी है। इस दिशा में यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू मेक्सिको हेल्थ साइंसेज सेंटर ने एक ऐसा टूल विकसित किया है, जिससे कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ने के गुण वाले अणुओं की पहचान हो पाएगी।

एक साल से अधिक समय से दुनिया कोरोना महामारी की मार से जूझ रही है। सामुदायिक प्रतिरक्षण के लिए अब टीका भी उपलब्ध हो गया है। टीकाकरण अभियान भी जोर-शोर से चल रहा है। लेकिन जब तक पूरी तरह से हर्ड इम्युनिटी हासिल नहीं हो जाती या वायरस के बदलते ताकतवर स्वरूप (हाइपर म्यूटेंट) पर काबू नहीं पा लिया जाता, तब तक टीका से पूर्ण सुरक्षा संदिग्ध ही रहेगी। ऐसे में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों के लिए प्रभावी इलाज ढूंढना बेहद जरूरी है। अभी जिन दवाओं का इस्तेमाल हो रहा है, वे सटीक नहीं मानी जा रही हैं। इसलिए उपचार की नई विधि विकसित किया जाना समय की जरूरत है।

इस परिस्थिति में विज्ञानियों ने एक नया टूल विकसित किया है, जिससे ड्रग्स शोधकर्ता ऐसे अणुओं की शीघ्र पहचान कर पाएंगे, जो वायरस के इंसानी कोशिकाओं में प्रवेश से पहले ही संक्रमण की शक्ति खत्म कर देगा।

नेचर मशीन इंटेलीजेंस जर्नल में प्रकाशित शोध आलेख के अनुसार, विज्ञानियों ने रेडियल 2020 नामक एक ओपन सोर्स ऑनलाइन सुइट ऑफ कंप्यूटेशनल मॉडल पेश किया है। इसके जरिये उन अणुओं की शीघ्र पहचान की जा सकेगी, जिनमें कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ने के गुण होंगे।

यूएनएम स्कूल ऑफ मेडिसिन के ट्रांसलेशनल इंर्फोमेटिक्स के प्रमुख ओपरिया ने कहा, इससे फोकस किए जाने की जरूरत वाले क्षेत्र को सीमित किया जा सकेगा। इसीलिए हमने इसे ऑनलाइन पेश किया है ताकि हर कोई इसका इस्तेमाल कर सके।

यूएनएम में ओपरिया की टीम और यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास (अल पासो) के पीएचडी स्कॉलर सुमन श्रीमुल्ला की अगुआई वाले एक ग्रुप ने रेडियल-2020 पर पिछले साल उस समय काम शुरू किया, जब नेशनल सेंटर फॉर एडवांसिंग ट्रांसलेशनल साइंस (एनसीएटीएस) के विज्ञानियों ने कोविड ड्रग से संबंधित अपने अध्ययन का डाटा रिलीज किया।

ओपरिया ने बताया कि जब यह डाटा सामने के आने के बाद हमने सॉलिड मशीन लर्निग मॉडल बनाने पर काम शुरू किया। एनसीएटीएस प्रयोगशाला में वायरस का प्रवेश रोकने, संक्रमण की ताकत तथा वायरस को बढ़ने से रोकने के संबंध में अणुओं की क्षमता- साइटोपैथिक इफेक्ट को परखा गया।

बायोमेडिसिन के शोधकर्ताओं का अपने अध्ययन में ध्यान अमूमन पॉजिटिव निष्कर्ष पर होता है, लेकिन एनसीएटीएस के विज्ञानियों ने यह भी बताया कि कौन से अणु में वायरस से लड़ने की क्षमता नहीं है। इसलिए निगेटिव डाटा से मशीन लर्निग की सटीकता में इजाफा होता है।

ओपरिया का कहना है कि हमारा ध्येय वैसे अणुओं की पहचान करना था, जिसका प्रोफाइल परफेक्ट हो। क्योंकि हम ऐसे अणुओं की पहचान करना चाहते थे, जो वांछित सब काम करे। उन्होंने कहा कि चूंकि कोरोना वायरस बड़ा ही बदलाव वाला है, इसलिए ऐसा नहीं लगता कि कोई एक दवा पूर्ण रूप से कारगर होगी। इसलिए शोधकर्ताओं को ऐसे मल्टी ड्रग का कॉकटेल ईजाद करना होगा, जो वायरस से कई मोर्चो पर लड़े।

रेडियल-2020 मशीन आधारित लर्निग अल्गोरिद्म है, जो बड़े पैमाने पर डाटा की प्रोसेसिंग में सक्षम है, छद्म पैटर्न को बाहर लाने में मदद करता है। ओपरिया की टीम ने इसकी पुष्टि एनसीएटीएस के डाटा से तुलना करके की। इसके आधार पर अन्य रोगाणुओं के लिए भी प्रभावी यौगिक का मूल्यांकन किया जा सकता है।

 

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