एंटोनियो गुटेरेस ने जलवायु परिवर्तन समेत कई मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में जाहिर की चिंता

गुटेरेस ने कहा कि हम रसातल के किनारे पर हैं और गलत दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हमारी दुनिया को कभी भी विभाजित नहीं किया गया है। हम अपने जीवन काल में सबसे बड़े संकटों का सामना कर रहे हैं। कोरोना महामारी की असमानताएं बनी हुईं हैं।

Dhyanendra Singh ChauhanTue, 21 Sep 2021 07:20 PM (IST)
संयुक्त राष्ट्र महासभा में बोलते हुए एंटोनियो गुटेरेस

संयुक्त राष्ट्र, एजेंसियां। यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में जलवायु परिवर्तन समेत कई अन्य मुद्दे पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हम हर महाद्वीप में चेतावनी के संकेत देख रहे हैं, दुनिया में हर जगह जलवायु संबंधी आपदाएं बनी हुई हैं। जलवायु वैज्ञानिक हमें बताते हैं कि पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री लक्ष्य को जीवित रखने में देर नहीं हुई है, लेकिन आशाएं तेजी से बंद हो रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अविश्वास और गलत सूचना का उछाल लोगों और समाज को पंगु बना रहा है। मानवाधिकारों पर हमले हो रहे हैं विज्ञान पर हमले हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हम रसातल के किनारे पर हैं और गलत दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हमारी दुनिया को कभी भी विभाजित नहीं किया गया है। हम अपने जीवन काल में सबसे बड़े संकटों का सामना कर रहे हैं। कोरोना महामारी, सुपर-आकार की चकाचौंध की असमानताएं बनी हुईं हैं। हमें महामारी की तैयारियों और प्रतिक्रिया के लिए स्वतंत्र पैनल की सिफारिशों का समर्थन करना चाहिए।

गुटेरेस ने कहा कि एक ओर हम देखते हैं कि रिकॉर्ड समय में कोरोना के टीके विकसित हुए हैं। दूसरी ओर हम राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, स्वार्थ और अविश्वास की त्रासदी से जीत को पूर्ववत देखते हैं।

पेरिस समझौते की प्रतिबद्धता पूरी करें विकसित देश : भारत

वहीं, दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (COP 26) से पहले भारत ने विकसित देशों से 2009 के पेरिस समझौते में किए गए सालाना 100 अरब डालर (73 हजार करोड़ रुपये से अधिक) की मदद के अपने वादे को पूरा करने का आह्वान किया। विकसित देशों ने कम लागत पर ग्रीन टेक्नोलाजी स्थानांतरण को बढ़ावा देने के लिए यह वादा किया था।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव की वर्चुअल बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) प्रक्रिया के सिद्धांतों को बरकरार रखने की जरूरत को रेखांकित किया।

यह आगामी सीओपी 26 समेत किसी भी जलवायु परिवर्तन समझौते में सफल परिणाम के सामने आने के लिए आवश्यक है। 31 अक्टूबर से 12 नवंबर तक ग्लासगो में अगला सीओपी 26 आयोजित किया जाएगा। भूपेंद्र यादव ने रेखांकित किया कि विकासशील देशों में महत्वाकांक्षी जलवायु पर वित्त की भूमिका, कम कीमत और तेज गति पर ग्रीन टेक्नोलाजी स्थानांतरित करना पेरिस समझौते के तहत विकसित देशों के महत्वाकांक्षी समर्थन पर निर्भर है।

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