बंद होने से पहले अंतरिक्ष में करीब 15 लाख ऑब्‍जर्वेशन कर चुका है हबल टेलिस्‍कोप, जानें- कुछ रोचक तथ्‍य

हबल टेलिस्‍कोप को बंद पड़े नौ दिन बीत रहे हैं। इसको दोबारा चालू करने की कोशिशें फिलहाल नाकाम साबित हुई हैं। अंतरिक्ष में मौजूद मानव निर्मित ये मशीन कई मील के पत्‍थर स्‍थापित कर चुकी है। इसका कोई जवाब नहीं है।

Kamal VermaTue, 22 Jun 2021 03:26 PM (IST)
हबल टेलिस्‍कोप का अंतरिक्ष में कोई जवाब नहीं है।

वाशिंगटन (नासा)। अंतरिक्ष में धरती से करीब साढ़े 500 किमी की ऊंचाई पर स्थित हबल टेलिस्‍कोप बीते नौ दिनों से ठप पड़ा है। इसकी वजह इसके एक कंप्‍यूटर में आई खराबी है जिसकी वजह से ये अब सेफ मोड में चला गया है। बीते नौ दिनों से हबल टेलिस्‍कोप से मिलने वाला सिग्‍नल 'कीप अलाइव' भी नहीं मिल रहा है और न ही कोई तस्‍वीर ही इससे मिल सकी है। फिलहाल नासा के वैज्ञानिक अपनी तरह से इसके सिस्‍टम में आई खराबी को दूर कर इसको फिर से शुरू करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्‍हें इस काम में कोई सफलता हासिल नहीं हुई है।

आपको बता दें कि इस टेलिस्‍कोप की तकनीक काफी पुरानी जरूर हो चुकी है लेकिन ये गहरे अंतरिक्ष में खोज के ऐसे मील के पत्‍थर स्‍थापित कर चुका है जिसकी बराबरी करना किसी भी मानव निर्मित मशीन के लिए काफी मुश्किल होगा। अपने तीस वर्ष के कार्यकाल में इस टेलिस्‍कोप ने अनगिनत ऐसे रहस्‍यों से पर्दा उठाया है, जिनके बारे में हम पहले शायद कल्‍पना भी नहीं कर सकते थे। आपको बता दें कि ये टेलिस्‍कोप ठप होने से पहले करीब 15 लाख ऑब्‍जर्वेशन कर चुका है। इसकी मदद से अंतरिक्ष से जुड़ी रिसर्च के करीब 18 हजार पेपर अब तक 9 लाख बार पब्लिश किए जा चुके हैं। ये अपने आप में एक विचित्र, लेकिन सत्‍य वाला आंकड़ा है।

अपने तीस वर्षों के सफर के दौरान इस टेलिस्‍कोप ने केवल वैज्ञानिकों को नेबुला, नोवा, सुपरनोवा, की ही जानकारी नहीं दी है बल्कि करोड़ों और अरबों किमी दूर विभिन्‍न गैलेक्सियों से भी पर्दा उठाया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इसकी दिशा में बदलाव के लिए इसमें किसी भी तरह का कोई थ्रस्‍टर नहीं लगा है, बल्कि ये न्‍यूटन के तीसरे नियम से अपने आपको मोड़ता है। इसको 90 डिग्री पर घूमने के लिए करीब 15 मिनट का समय लगता है।

अब तक करीब 6 अरब किमी का सफर कर चुके इस टेलिस्‍कोप की स्‍पीड जानकर भी आप दंग रह सकते हैं। ये धरती का चक्‍कर 27 हजार किमी प्रति घंटे की रफ्तार से लगाता है। इस रफ्तार से धूमते हुए भी इसकी आंखें धोखा नहीं खाती हैं। इतनी स्‍पीड में भी ये धरती से हजारों या लाखों किमी दूर की चीज को भी अपने हाईपावर कैमरे की मदद से कैद कर सकता है। ये हर वर्ष 150 टीबी के बराबर डाटा जनरेट कर धरती पर भेजता रहा है।

धरती पर इसका वजन करीब 12200 किग्रा है, लेकिन अंतरिक्ष में इसका वजन करीब 10800 किग्रा है। इस टेलिस्‍कोप की लंबाई की बात करें तो ये करीब 43फीट है। इसके मिरर की चौड़ाई करीब 8 फीट की है। इसमें लगे 25 फीट लंबे सोलर पैनल इसको सौर ऊर्जा देते हैं। 24 अप्रैल 1990 को इस टेलिस्‍कोप को डिस्‍कवरी शटल की मदद से छोड़ा गया था और 25 अप्रैल 1990 से इसने काम करना शुरू किया था। 20 मई को इसने पहली बार इमेज भेजी थी, जो एक स्‍टार क्‍लस्‍टर की थी, जिसको एनजीसी 3532 का नाम दिया गया था।

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