West Bengal Assembly Election 2021: ममता बनर्जी की मुस्लिम फेस वाली छवि पर दावेदारी जताने मैदान में उतरे अब्बास सिद्दीकी

ममता बनर्जी की 'मुस्लिम फेस' वाली छवि पर दावेदारी जताने मैदान में उतरे अब्बास सिद्दीकी। फाइल फोटो

West Bengal Assembly Election 2021 कोलकाता रैली में सिद्दीकी की बदौलत उमड़ी मुसलमानों की अभूतपूर्व भीड़ को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक भी कह रहे हैं कि टीएमसी को अपना मुस्लिम वोट बैंक बचाने के लिए इस बार भारी जद्दोजहद करनी पड़ सकती है।

Sachin Kumar MishraSun, 28 Feb 2021 09:10 PM (IST)

कोलकाता, विशाल श्रेष्ठ। West Bengal Assembly Election 2021: मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी मुसलमान न होते हुए भी बंगाल में लंबे समय से इकलौती 'मुस्लिम फेस' रही हैं। सूबे के मुसलमान भी अब तक पूरी शिद्दत से उनका साथ देते आए हैं लेकिन रविवार को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हुई रैली में फुरफुरा शरीफ के पीरजादा व नवगठित पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आइएसएफ) के प्रमुख अब्बास सिद्दीकी ने आक्रामक तेवर दिखाकर इस पर अपनी दावेदारी पेश कर दी है। रैली में सिद्दीकी की बदौलत उमड़ी मुसलमानों की अभूतपूर्व भीड़ को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक भी कह रहे हैं कि तृणमूल को अपना मुस्लिम वोट बैंक बचाने के लिए इस बार भारी जद्दोजहद करनी पड़ सकती है। विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोट बंटने पर तृणमूल को भारी नुकसान होना तय है। गौरतलब है कि बंगाल में 30 फीसद आबादी मुसलमानों की है और सूबे की 90 से 100 विधानसभा सीटों पर वे निर्णायक की भूमिका में हैं। इनमें मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर व दक्षिण दिनाजपुर जिलें मुख्य रूप से शामिल हैं, जहां 40 से लेकर 75 फीसद आबादी मुसलमानों की है।

ब्रिगेड में अपने बूते अभूतपूर्व भीड़ जुटाकर सिद्दीकी ने दिखाया मुसलमानों का उन्हें समर्थन

 ब्रिगेड में वाममोर्चा अथवा कांग्रेस की एकल अथवा संयुक्त रूप से अब तक जितनी भी जनसभाएं हुई हैं, उनमें इससे पहले कभी इतनी भीड़ नहीं देखी गई। वाममोर्चा के लिए ब्रिगेड में भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी पहले दिवंगत माकपा नेता सुभाष चक्रवर्ती के कंधों पर थी, लेकिन वामो के शासन में भी वे कभी इतनी भीड़ नहीं जुटा पाए थे।सिद्दीकी ने ब्रिगेड में अपने बूते अभूतपूर्व भीड़ जुटाकर उन्हें मुसलमानों का भारी समर्थन जाहिर करने की भी कोशिश की। लाखों की भीड़ देखकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी खुद भी यह कहने से नहीं बच पाए कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में इतनी विशाल जनसभा को पहले कभी संबोधित नहीं किया। वामो और

कांग्रेस के तमाम नेता इतनी ज्यादा भीड़ देखकर अचंभित भी थे और बेहद उत्साहित भी। सिद्दीकी ने सभा मंच से यह दावा तक कर डाला कि अगर गठबंधन के साथ उनका समझौता एक हफ्ता पहले हुआ होता तो वे इससे कहीं ज्यादा लोगों को ब्रिगेड ले आते। ब्रिगेड परेड ग्राउंड में वामो व कांग्रेस समर्थकों से कहीं ज्यादा आइएसएफ के लोग मौजूद थे। हवा में लहराते उनके झंडे इस बात की साफ गवाही दे रहे थे।

सीधे ममता पर ही किया वार

सिद्दीकी ने रैली में अपने भाषण में भाजपा के बदले ममता पर ही निशाना साधा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सिद्दीकी की नजर मुस्लिम वोट बैंक पर है, जो इस वक्त ममता के पास है इसलिए उन्होंने भाजपा और पीएम मोदी पर निशाना साधने में वक्त जाया करना मुनासिब नहीं समझा।

वामो-कांग्रेस पर पड़े भारी

सिद्दीकी रैली के दौरान वामो-कांग्रेस पर भारी पड़ते नजर आए। अधीर रंजन चौधरी और सीताराम येचुरी जैसे कांग्रेस व माकपा के शीर्ष स्तर के नेता समय पर सभा मंच में आकर बैठ गए जबकि सिद्दीकी ने एक स्टार की तरह बीच में एंट्री की, वह भी ऐसे वक्त, जब अधीर सभा को संबोधित कर रहे थे। सिद्दीकी का स्टार की तरह ही स्वागत किया गया। इस वजह से अधीर को बीच में भाषण रोकना पड़ गया। इसे सिद्दीकी की रणनीति कहा जा रहा है। सीटों को लेकर अधीर के साथ सिद्दीकी की तनातनी चल रही है। यह बात सभा के दौरान भी जगजाहिर हो गई। न तो अधीर ने सिद्दीकी के आने पर उनका नाम लिया और न ही सिद्दीकी ने अपने भाषण में अधीर का जिक्र किया।

सामने आई कांग्रेस से अनबन

एकता के मंच पर कांग्रेस के साथ सिद्दीकी की अनबन भी खुलकर सामने आई। सिद्दीकी ने अपने भाषण में सिर्फ वामो उम्मीदवारों को जिताने की बात कही, कांग्रेस उम्मीदवारों का नाम नहीं लिया। इसकी वजह भी उन्होंने खुद बताई। सिद्दीकी ने कहा कि वे गठबंधन में भागीदारी करने आए हैं, किसी को तुष्ट करने नहीं। उन्होंने वामो अध्यक्ष विमान बोस को उनकी तरफ से आइएसएफ को 30 सीटें दिए जाने पर शुक्रिया अदा किया। भाषण के दौरान कई बार वरिष्ठ माकपा नेता मोहम्मद सलीम का भी उन्होंने जिक्र किया लेकिन एक बार भी अधीर रंजन चौधरी का नाम नहीं लिया। गौरतलब है कि कांग्रेस और आइएसएफ के बीच सीटों के बंटवारे पर अभी भी बात नहीं बन पाई है। सिद्दीकी ने हालांकि यह जरूर कहा कि कांग्रेस के लिए बातचीत के रास्ते अभी भी खुले हैं। 

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