Bhabhanipur By Election: भवानीपुर से भाजपा प्रत्याशी प्रियंका टिबड़ेवाल के पोस्टर व होर्डिंग हटाने का तृणमूल पर आरोप

Bhabhanipur By Election भाजपा के आइटी सेल के प्रमुख व बंगाल के सह प्रभारी अमित मालवीय ने रविवार को ट्विटर पर इसकी तस्वीर साझा करते हुए दावा किया कि भाजपा प्रत्याशी के पोस्टर व होर्डिंग को बेखौफ तरीके से उठा कर स्थानीय शेक्सपीयर सरणी थाने में फेंका जा रहा है।

Sachin Kumar MishraSun, 19 Sep 2021 03:27 PM (IST)
भवानीपुर से भाजपा प्रत्याशी प्रियंका टिबड़ेवाल के पोस्टर व होर्डिंग हटाने का तृणमूल पर आरोप। फाइल फोटो

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल की हाई प्रोफाइल भवानीपुर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ रहीं भाजपा प्रत्याशी प्रियंका टिबड़ेवाल के पोस्टर व होर्डिंग हटाने का फिर भाजपा ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर आरोप लगाया है। भाजपा के आइटी सेल के प्रमुख व बंगाल के सह प्रभारी अमित मालवीय ने रविवार को ट्विटर पर इसकी तस्वीर साझा करते हुए यह आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा प्रत्याशी के पोस्टर व होर्डिंग को बेखौफ तरीके से उठा कर स्थानीय शेक्सपीयर सरणी थाने में फेंका जा रहा है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर किसी को लगता है कि ममता बनर्जी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं, तो निश्चिंत रहें, नंदीग्राम की पुनरावृति उनके दिमाग में है। इससे पहले भी भाजपा भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में अपने प्रत्याशी के पोस्टर व बैनर फाड़े जाने का आरोप तृणमूल पर लगा चुकी है। भवानीपुर समेत बंगाल की तीन विधानसभा सीटों पर 30 सितंबर को चुनाव होने हैं, इससे पहले दोनों दलों के बीच सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज है।

चुनाव प्रचार के दौरान भी भाजपा उम्मीदवार को करना पड़ा विरोध प्रदर्शन का सामना

इससे पहले शनिवार सुबह कोलकाता के चेतला इलाके में प्रचार करने गई भाजपा उम्मीदवार प्रियंका टिबड़ेवाल को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था। शनिवार सुबह से ही बारिश के बावजूद भाजपा उम्मीदवार पचुनाव प्रचार करने गई थी। उसी समय स्थानीय लोग उन्हें घेरकर गो बैक के नारे लगाते रहे। बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों में महिलाओं की संख्या अधिक थी। विरोध प्रदर्शन को देखते हुए भाजपा उम्मीदवार वहां से वापस लौट गईं।प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विधानसभा चुनाव के दौरान इस इलाके में हिंसा कराने के पीछे इन्हीं का हाथ था। चुनाव के पहले इलाके के कुछ भाजपा समर्थक दूसरे दलों के कार्यकर्ता एवं समर्थकों को अक्सर धमकी दिया करते थे। इसी आधार पर भाजपा सत्ता में आना चाहती थी। 

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