तस्करी: नदिया से लगती सीमा पर अब मानव बालों की तस्करी बढ़ी, बीएसएफ ने चार माह में 215 किलो बाल किए जब्त

26 देशों में बालों का किया जाता है निर्यात, बीएसएफ द्वारा जब्त मानव बाल।

तस्करी चीन में बढ़ती मांग और बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाके में प्रोसेसिंग की सुविधाओं के चलते बढ़ी तस्करी खुले बाजार में मानव बाल की कीमत 3000 से 6000 रुपये है प्रति किलो चीन में विग की बढ़ती मांग और सीमावर्ती इलाकों में प्रसंस्करण सुविधाओं के चलते बालों की तस्करी बढ़ी।

Priti JhaSun, 09 May 2021 03:45 PM (IST)

कोलकाता, राज्य ब्यूरो। बंगाल में नदिया जिले से लगती भारत-बांग्लादेश सीमा के जरिए अब मानव बालों की तस्करी पिछले कुछ समय से काफी बढ़ गई है। दक्षिण बंगाल फ्रंटियर अंतर्गत सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के क्षेत्रीय मुख्यालय कृष्णानगर के जिम्मेवारी के इलाके यानी नदिया के सीमावर्ती क्षेत्र से जवानों ने इस साल जनवरी से अप्रैल तक बीते चार महीनों में कुल 215 किलो बालों की जब्ती की है। इस अवधि में बालों की तस्करी की 13 अलग-अलग घटनाओं में अब तक चार तस्करों को भी बीएसएफ ने गिरफ्तार किया है।

दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के प्रवक्ता ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि खुले बाजार में मानव बाल की कीमत 3,000 से 6,000 रुपये प्रति किलो है। फ्रंटियर के प्रवक्ता व डीआइजी सुरजीत सिंह गुलेरिया ने बताया कि इन बालों को विग व ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने में उपयोग हेतु बंडल बनाकर अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए बांग्लादेश में तस्करी की जाती है। इसकी वहां काफी मांग है।

बीएसएफ डीआइजी के अनुसार, चीन में विग की बढ़ती मांग और बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाकों में प्रसंस्करण सुविधाओं के चलते बालों की तस्करी बढ़ी है। इन बालों को देश में विभिन्न धार्मिक स्थलों, छोटे- बड़े नाई की दुकानों और गांव गली से इकट्ठा कर उनकी साफ- सफाई करके बंडल बनाकर बंग्लादेश में तस्करी की जाती है।

26 देशों में बालों का किया जाता है निर्यात

बीएसएफ को तस्करों से पूछताछ व सूत्रों से पता चला है कि बांग्लादेश में तस्करी के जरिए ले जाए जाने वाले ये बाल विभिन्न किस्म की साफ-सफाई की प्रक्रिया से गुजरने के बाद वहां से चीन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), मलेशिया समेत कुल 26 देशों में निर्यात किए जाते हैं। इनमें सबसे ज्यादा चीन में इसका निर्यात होता है।यह भी पता चला है कि हाल के दिनों में बांग्लादेश के सीमावर्ती जिले चुवाडंगा, कुस्तिया, मेमनसिंह आदि जिलों में कई हेयर प्रोसेसिंग की कंपनिया खुली हैं, जिनमें बांग्लादेश के गांवों की गरीब व जरूरतमंद महिलाओ से बालों की साफ- सफाई करवाई जाती है। इससे प्रोसेसिंग की लागत भी कम आती हैं। इस काम में इन जिलों की तकरीबन एक लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है, जिनकी इससे रोजी-रोटी चलती है।

विग और ब्यूटी प्रोडक्ट में होता है इस्तेमाल

इन बालों का उपयोग विग बनानेे और ब्यूटी प्रोडेक्ट में इस्तेमाल किया जाता है। छोटे बालों से पुरुष विग जबकि बड़े बालों से महिला विग बनाए जाते हैं। बीएसएफ अधिकारियों के अनुसार, भारत में बालों के विग की डिमांड कम होने व कच्चे बालों की आसानी से उपलब्धता के कारण बालों को सस्ते दामों में खरीदकर महंगे दामों में बेचा जाना भी इसकी तस्करी का एक बड़ा कारण है। इसीलिए तस्करों का भी रुझान इसके पीछे बढ़ा है।

तस्करों के मंसूबे को लगातार नाकाम कर रही है बीएसएफ

गौरतलब है कि भारत- बांग्लादेश सीमा पर शुरुआत से ही विभिन्न प्रकार के सामानों जैसे मवेशियों, जंगली पक्षी, नशीले पदार्थ, कीमती धातु, रोजमर्रा के सामान, जाली नोट, मानव तस्करी जैसे अपराध होते आए हैं। अब यहां से बालों की तस्करी बढ़ी है। हालांकि बीएसएफ द्वारा समय के साथ- साथ इन अपराधों पर अंकुश लगाया जाता रहा है और अब बालों की तस्करी में शामिल लोगों के मंसूबों को भी लगातार विफल कर रही है। गौरतलब है कि भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा बेहद ही चुनौतीपूर्ण है। सीमा के दोनों तरफ ही सांस्कृतिक व भौगोलिक स्थिति लगभग समान हैं। कई जगहों पर जीरो लाइन यानी अंतरराष्ट्रीय सीमा के बिल्कुल पास दोनों तरफ गांव बसे हैं और यहां लोगों के घर हैं।

ऐसे में इसकी रखवाली और चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसका फायदा सीमा पर सक्रिय अपराधी उठाने की कोशिश करते हैं। हालांकि तमाम चुनौतियों के बावजूद सीमा पर होने वाले विभिन्न प्रकार के सामानों की तस्करी को रोकने के लिए बीएसएफ कड़े कदम उठा रही है। जिसके तहत सीमा निगरानी को और अधिक मजबूत करने के लिए थर्मल इमेजर, दिन और रात को देख सकने में सक्षम कैमरा, हाई मास्क लाइट , इंट्रूडर अलार्म आदि आधुनिक तकनीकी का भी सहारा लिया जा रहा है, जिसके कारण तस्करी में लिप्त तस्करों और उनके गिरोहों के सदस्यों को काफी मुश्किलो का सामना करना पड़ रहा है और उनमें से कई पकड़े जा रहे हैं। 

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