CAA: बांग्लादेश में हिंसा के मद्देनजर बंगाल में सीएए जरूरी: सुवेंदु अधिकारी

West Bengal सुवेंदु अधिकारी ने हिंदुओं की रक्षा के लिए जल्द से जल्द संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) लागू करने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात के मद्देनजर बंगाल में सीएए जरूरी है। यहां से रोहिंग्या को खदेड़ना होगा।

Sachin Kumar MishraSun, 24 Oct 2021 05:23 PM (IST)
बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तथा भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी। फाइल फोटो

कोलकाता, राज्य ब्यूरो। बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तथा भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी ने बांग्लादेश में सनानत धर्म के लोगों पर हमले की निंदा की है और हिंदुओं की रक्षा के लिए जल्द से जल्द संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) लागू करने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात के मद्देनजर बंगाल में सीएए जरूरी है। यहां से रोहिंग्या को खदेड़ना होगा। नंदीग्राम में शनिवार को एक हिंदू संगठन की ओर से आयोजित पदयात्रा में भाजपा नेता ने कहा कि बांग्लादेश में मेरे हिंदू भाई-बहन संकट में हैं, उन्हें जिहादी ताकतों के हाथों गंभीर उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है। सनातन धर्म में सबसे बड़े त्योहारों में तोड़फोड़ की गई। मूर्तियों को तोड़ा गया। हिंदू भाइयों को मारा गया। माता-बहनों का सम्मान लूटा गया। हम कब तक इस जुल्म को सहेंगे?

बंगाल से रोहिंग्या को खदेड़ना होगाः सुवेंदु

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश हिंसा के मद्देनजर बंगाल में सीएए जल्द लागू करना होगा और राज्य से रोहिंग्या को खदेड़ना होगा। नहीं तो बंगाल में जिहादी ताकतों का मनोबल बढ़ेगा और वे यहां भी उत्पीड़न कर सकते हैं। पिछले दिनों बंगाल से भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर हिंदुओं की रक्षा के लिए जल्द से जल्द सीएए लागू करने की मांग की थी। बंगाल के राणाघाट लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर कहा था कि आप दुनिया के सभी हिंदू समाजों के रक्षक हैं। मैं आपसे विनती करता हूं कि कृपया इस कठिन समय में बांग्लादेश के हिंदुओं के साथ खड़े होकर उनकी रक्षा करें।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में 13 अक्टूबर को चांदपुर के हाजीगंज उपजिले में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुए सांप्रदायिक हमले को रोकने के लिए पुलिस ने पहले से कोई तैयारी नहीं की थी। स्थानीय पूजा प्रबंधन समिति की ओर से चेतावनी दी जा चुकी थी। कुमिला में हिंसा के बाद स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में पांच युवकों की मौत हो गई थी, जबकि 33 लोग घायल हुए थे। घायलों में 23 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल थे। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद की स्थानीय इकाई के अनुसार, 13 और 14 अक्टूबर को 12 पूजा मंडपों और कई हिंदू घरों में तोड़फोड़ की गई थी। पुलिस ने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा को लेकर हाजीगंज थाने में दस मामले दर्ज किए गए हैं। आरोपितों में 3,000 से अधिक अज्ञात व्यक्ति हैं। नानुआर दिघी के तट पर एक दुर्गा पूजा स्थल पर कुरान के कथित अपमान को लेकर इंटरनेट मीडिया पर अफवाह फैलने के बाद बांग्लादेश में कई जगहों पर सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। 

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