रेलकर्मी विजय की कविता संग्रह कर्म पथ का राही का पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के जीएम अंशुल गुप्ता के हाथों विमोचन

इस कविता संग्रह जिसका विमोचन हुआ है में उनकी कुल 50 कविताएं शामिल हैं जो देशभक्ति सामाजिक समरसता भ्रष्टाचार एवं रेलवे से संबंधित विषयों पर आधारित है। इस कविता संग्रह की भूमिका अशोक झा अविचल ने लिखी है जो साहित्य अकादमी में मैथिली के मानद सदस्य हैं।

Priti JhaSun, 26 Sep 2021 09:14 AM (IST)
विजय कुमार यादव की कविता संग्रह का विमोचन करते पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के जीएम अंशुल गुप्ता व अन्य वरिष्ठ अधिकारी।

जेएनएन, कोलकाता। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे मुख्यालय, मालीगांव, गुवाहाटी में मुख्य दक्षता निरीक्षक के रूप में कार्यरत एवं हिंदी- मैथिली के नवोदित कवि व गीतकार विजय कुमार यादव की पहली हिंदी कविता संग्रह 'कर्म पथ का राही' का विमोचन पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के महाप्रबंधक (जीएम) अंशुल गुप्ता ने किया। इस दौरान अपर महाप्रबंधक राहुल गौतम, वरिष्ठ उप महाप्रबंधक बोनीफेस लकड़ा, मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं प्रमुख वित्त सलाहकार प्रभात सिन्हा एवं उप मुख्य राजभाषा अधिकारी प्रताप सिंह बघड़वाल भी मौजूद थे।

इस अवसर पर महाप्रबंधक समेत सभी वरीय रेल अधिकारीयों ने यादव को शुभकामनाएं देते हुए उनके कविता संग्रह की प्रशंसा की। साथ ही आगे भी साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय रहने को उन्हें प्रेरित किया। यह विमोचन राजभाषा सप्ताह के समापन समारोह एवं हास्य कवि सम्मेलन के मौके पर हुआ, जिसमें देश के चर्चित कवियों में शुमार सुभाष काबरा व मुकेश गौतम आदि भी उपस्थित थे।

ज्ञात हो कि मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले के निवासी विजय कुमार यादव रेलवे में अपने कार्यालय के कार्य व जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन करते हुए साहित्यिक कार्यों में भी काफी रूचि रखते हैं और उन्होंने नवोदित युवा कवि के रूप में भी अपनी पहचान बनाई है। हाल में राष्ट्रीय स्तर पर आनलाइन काव्य पाठ प्रतियोगिता में भी उन्होंने परचम लहराया था। हिंदी एवं मैथिली भाषाओं में कविताओं एवं गीतों की रचना वे लगातार करते आ रहे हैं। इनकी देशभक्ति रचनाओं की काफी प्रशंसा भी हुई हैं और देश- विदेश से उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मान भी प्राप्त हो चुका है।

कविता संग्रह में 50 कविताएं हैं शामिल

इस कविता संग्रह जिसका विमोचन हुआ है, में उनकी कुल 50 कविताएं शामिल हैं, जो देशभक्ति, सामाजिक समरसता, भ्रष्टाचार एवं रेलवे से संबंधित विषयों पर आधारित है। इस कविता संग्रह की भूमिका अशोक झा "अविचल" ने लिखी है, जो साहित्य अकादमी में मैथिली के मानद सदस्य हैं। वहीं, इस कविता संग्रह में अपने शुभकामना संदेशों से कवि को आशीष देने वालों में मेट्रो रेलवे कोलकाता के महाप्रबंधक मनोज जोशी, अखिल भारतीय मिथिला संघ के अध्यक्ष विजय चंद्र झा, रेलवे कोच फैक्ट्री कपूरथला के प्रमुख मुख्य यांत्रिक अभियंता राजकुमार मंगला, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के वरिष्ठ उप महाप्रबंधक बोनीफेस लकड़ा, मुख्य अभियंता निर्माण बी एन भास्कर, महाप्रबंधक के सचिव प्रणव ज्योति शर्मा, मिथिला सांस्कृतिक समन्वय समिति गुवाहाटी के अध्यक्ष प्रेम कांत चौधरी, मैथिली अकादमी नेपाल के अध्यक्ष प्रवीण नारायण चौधरी आदि हैं।

इस कार्यकम में यादव, रेलवे बोर्ड व्यक्तिगत पुरस्कार, महाप्रबंधक व्यक्तिगत पुरस्कार एवं टिप्पण एवं प्रारूप में प्रथम पुरस्कार से भी अपर महाप्रबंधक से हाथों पुरस्कृत हुए। गौरतलब है कि रेलवे में नौकरी करते हुए समय निकालकर साहित्य साधना के इस पुनीत कार्य के लिए यादव को अनेक रेलवे अधिकारियों, कर्मचारियों एवं साहित्यिक, सामाजिक व सांस्कृतिक संस्थाओं ने भूरी-भूरी प्रशंसा की है। 

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