मुकुल राय के पीएसी के अध्यक्ष पद को रद करने की मांग पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

याचिका में कहा गया है कि भाजपा ने पीएसी के अध्यक्ष पद के लिए मुकुल राय को नामित नहीं किया है तो उन्हें अध्यक्ष कैसे नियुक्त किया गया? मुकुल हाल में भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में लौटे हैं।

Priti JhaWed, 28 Jul 2021 09:35 AM (IST)
मुकुल राय के पीएसी के अध्यक्ष पद को रद करने की मांग पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। मुकुल राय के लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष पद को रद करने की मांग पर कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। नदिया जिले के कल्याणी के विधायक अंबिका राय ने हाईकोर्ट में मामला दर्ज कराया है। याचिका में कहा गया है कि भाजपा ने पीएसी के अध्यक्ष पद के लिए मुकुल राय को नामित नहीं किया है तो उन्हें अध्यक्ष कैसे नियुक्त किया गया?

ऐसे में मुकुल राय की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष पद को रद किया जाना चाहिए। मुकुल हाल में भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में लौटे हैं। भाजपा पीएसी के अध्यक्ष पद पर उनकी नियुक्ति को अवैध करार देते हुए इसका कड़ा विरोध कर रही है।

गौरतलब है कि नंदीग्राम से भाजपा विधायक व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि मुकुल राय की पीएसी के चेयरमैन पद पर नियुक्ति अवैध तरीके से की गई है। भाजपा की तरफ से इस कमेटी के लिए जिन विधायकों के नाम दिए गए थे, उन्हें मुकुल राय का नाम शामिल नहीं था, फिर भी उन्हें भाजपा का सदस्य बताकर पीएसी का चेयरमैन नियुक्त किया गया। वे और पार्टी के पांच विधायक पीएसी की बैठक में शामिल नहीं होंगे क्योंकि इसमें शामिल होने का मतलब मुकुल राय की अध्यक्षता को स्वीकृति प्रदान करना होगा।

बताते चलें कि भाजपा ने मुकुल राय की अध्यक्षता में होने वाली बंगाल विधानसभा की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी की बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया है। उन्हें हाल में पीएसी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनकी अध्यक्षता में पीएसी की पहली बैठक आगामी 30 जुलाई को होने वाली है। गौरतलब है कि जिस दिन यह बैठक होने वाली है, उसी दिन विधानसभा अध्यक्ष बिमान बंद्योपाध्याय के कक्ष में मुकुल के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत भाजपा की तरफ से की गई शिकायत पर सुनवाई भी होने वाली है।

हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं का एक वर्ग कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अदालत में रहा गैरमौजूद

कलकत्ता हाईकोर्ट में मुकदमों से संबंधित कार्य के बंटवारे और डिजिटल तरीके से सुनवाई की व्यवस्था में खामियों के मुद्दे को लेकर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की अदालत से मंगलवार को अधिवक्ताओं का एक वर्ग अनुपस्थित रहा। अदालत की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेने वाले अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक निर्णय द्वारा अपीलीय पक्ष के नियमों का उल्लंघन हुआ और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की व्यवस्था में खामियां हैं।

एसीजे की अदालत में शामिल नहीं होने का फैसला करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता अरुणाभ घोष ने कहा-'मैं आज दिन में दो बजे से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अदालत की कार्यवाही में शामिल नहीं हुआ।' अधिवक्ताओं के एक वर्ग ने 22 जुलाई को एसीजे को एक ज्ञापन दिया था और न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य की एकल पीठ से एक मामले को खंडपीठ को भेजे जाने का हवाला दिया था। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने 19 जुलाई को डिजिटल माध्यम से सुनवाई के दौरान होने वाली कनेक्टिविटी की दिक्कतों को लेकर तल्ख टिप्पणी की थी और जिस तरीके से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने मामले को खंडपीठ को सौंपा था, उस पर ऐतराज जताया था। 

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.