Coronavirus: बंगाल के स्कूली पाठ्यक्रम में कोरोना महामारी को अध्याय के तौर पर शामिल करने की तैयारी

Coronavirus कोरोना महामारी पर अध्याय को किस विषय में शामिल किया जाएगा इस पर मंथन किया जा रहा है। अब तक जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक इसे 11वीं कक्षा की स्वास्थ्य व शारीरिक शिक्षा की किताब में शामिल किया जा सकता है।

Sachin Kumar MishraSun, 12 Sep 2021 05:34 PM (IST)
बंगाल के स्कूली पाठ्यक्रम में कोरोना महामारी को अध्याय के तौर पर शामिल करने की तैयारी। फाइल फोटो

कोलकाता, राज्य ब्यूरो। बंगाल के स्कूली पाठ्यक्रम में कोरोना महामारी को अध्याय के तौर पर शामिल करने की तैयारी चल रही है। राज्य के शिक्षा विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्तरों पर इसे शामिल किया जा सकता है। स्कूल शिक्षा कमेटी इस बाबत परिकल्पना तैयार कर रही है, जिसे मंजूरी के लिए शिक्षा विभाग के पास भेजा जाएगा। कोरोना महामारी पर अध्याय को किस विषय में शामिल किया जाएगा, इस पर मंथन किया जा रहा है। अब तक जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक इसे 11वीं कक्षा की स्वास्थ्य व शारीरिक शिक्षा की किताब में शामिल किया जा सकता है। शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कोरोना महामारी के प्रति छात्रों में जागरूकता फैलाने के लिए यह पहल की जा रही है।

कोरोना के बारे में जैसे-जैसे अध्ययनों से नए-नए तथ्य सामने आते जाएंगे, वैसे-वैसे पाठ्यक्रम में भी बदलाव किया जाता रहेगा। किस कक्षा में कोरोना के बारे में क्या पढ़ाया जाएगा, यह अभी तय नहीं हुआ है। गौरतलब है कि दुनियाभर में पिछले दो वर्षों से कोरोना का प्रकोप फैला हुआ है। कोरोना को लेकर ढेरों अनुसंधान हो रहे हैं, जिसमें नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। छात्र देश का भविष्य हैं, इसलिए शिक्षा विभाग का मानना है कि भविष्य में कोरोना से लड़ाई के लिए छात्रों को शिक्षित करना बेहद जरूरी है। यह इसी दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम है।

गौरतलब है कि पिछली बार दुर्गापूजा में कोविड एक ऐसी थीम थी, जिसने मानवता की अलग-अलग तस्वीरों को दिखाया था। एक खास पूजा केष्टोपुर प्रफुल्ल कानन की थी जहां गरीबों के मसीहा सोनू सूद को थीम बनाया गया था, साथ ही तस्वीर दिखायी गई थी कि कैसे सोनू जरूरतमंदों की मदद के लिए आतुर हैं। लोगों को पंडाल में सोनू की यह थीम काफी पसंद आई थी, क्योंकि सोनू गरीबों के मसीहा बनकर जेहन में उतरे थे। सोनू की यह छवि अब तक बरकरार है, क्योंकि वह जरूरतमंदों के लिए हमेशा से ही प्रयासरत रहे हैं। उनकी इन्हीं खूबियों को इस बार फिर केष्टोपुर प्रफुल्ल कानन अपने पूजा पंडाल में दिखाने की कोशिश कर रहा है।

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