Corona in Bengal: कोरोना के इलाज में क्रांति ला सकता है पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी रिपोर्ट

आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में अब तक छह शवों का पोस्टमार्ट किया गया है। डॉ ने बताया कि यह पूर्वी भारत का पहला अस्पताल है जहां कुछ ही दिनों के भीतर छह शवों की पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी की गई है।

Priti JhaWed, 09 Jun 2021 08:03 AM (IST)
कोरोना के इलाज में क्रांति ला सकता है पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी रिपोर्ट

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में कोरोना से मरने वाले लोगों के शव की ‘पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी’ (पोस्टमार्टम) की जा रही है। संक्रमित होकर मरे लोगों की मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए यह रिसर्च बहुत जरूरी था। ऐसे में राज्य स्वास्थ्य विभाग के निर्देश से आरजी कर में लगातार कोरोना संक्रमित शवों की पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी हो रही है।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में अब तक छह शवों का पोस्टमार्ट किया गया है। आरजी कर के फॉरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो डॉ सोमनाथ मंडल ने बताया कि यह पूर्वी भारत का पहला अस्पताल है, जहां कुछ ही दिनों के भीतर छह शवों की 'पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी' की गई है। उन्होंने कहा कि शोध सफल रहा, तो कोरोना की चिकित्सा में आरजी कर मेडिकल कॉलेज पूरे देश को नई दिशा दिखा सकता है।

उन्होंने कहा कि शोध सफल रहा, तो कोरोना की चिकित्सा में आरजी कर मेडिकल कॉलेज पूरे देश को नई दिशा दिखा सकता है। इस पोस्टमार्टम का मुख्य उद्देश्य कोरोना से मरने वालों के शवों पर रिसर्च करना, जिससे पता चल सके कि यह शरीर में कितने लंबे समय तक रहता है और किन-किन अंगों को, किस हद तक प्रभावित कर सकता है।

रिसर्च में कई तथ्य सामने आए

प्रो मंडल ने बताया कि बंगाल में देहदान आंदोलन का चेहरा ब्रज राय की पहली बार ‘पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी’ की गई थी। शवों के विभिन्न अंगों को संग्रह किया गया है। उन अंगों की हिस्टोलॉजिकल जांच करायी गई है। उनका दावा है कि उक्त आंगों की जांच में उन्हें खुली आंखों से ही काफी कुछ दिख रहा है।कोरोना के कारण इनके रंग रूप बदल गए है। ब्रज राय सह अन्य दो शवों की पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी रिपोर्ट बुधवार तक स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी ।जल्द ही रिपोर्ट्स को किसी अंतर्राष्ट्रीय जनरल में भी प्रकाशित किया जाएगा। 

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