नारद स्टिंग मामले में सीबीआइ कोर्ट में पेश हुए दो मंत्री समेत चार नेता, उच्च न्यायालय ने लगाई थी अंतरिम जमानत पर रोक

कोलकाता नारद स्टिंग मामले में आरोपित तृणमूल के दो मंत्री व एक विधायक समेत चार वरिष्ठ नेता शुक्रवार को कोलकाता में सीबीआइ की विशेष अदालत के समक्ष पेश हुए। न्यायाधीश अनुपम मुखर्जी ने उन्हें चार जून को अदालत में प्रत्यक्ष तौर पर उपस्थित होने का आदेश दिया था।

Vijay KumarFri, 04 Jun 2021 06:26 PM (IST)
सीबीआइ की विशेष अदालत ने 17 मई को दिया था आदेश

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। नारद स्टिंग मामले में आरोपित तृणमूल के दो मंत्री व एक विधायक समेत चार वरिष्ठ नेता शुक्रवार को कोलकाता में सीबीआइ की विशेष अदालत के समक्ष पेश हुए। न्यायाधीश अनुपम मुखर्जी ने 17 मई को चारों नेताओं को अंतरिम जमानत देते हुए उन्हें चार जून को अदालत में प्रत्यक्ष तौर पर उपस्थित होने का आदेश दिया था। राज्य के मंत्री सुब्रत मुखर्जी और फिरहाद हकीम, तृणमूल विधायक मदन मित्रा एवं शहर के पूर्व महापौर शोभन चटर्जी न्यायाधीश के समक्ष उपस्थित हुए और कुछ देर बाद बैंकशाल अदालत परिसर से चले गए। न्यायाधीश मुखर्जी ने कहा कि मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख बाद में तय की जाएगी।

कलकत्ता उच्च न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 28 मई को चारों नेताओं को सशर्त अंतरिम जमानत दी थी। उच्च न्यायालय के आदेश पर नारद स्टिंग मामले की जांच कर रही सीबीआइ ने इन नेताओं को 17 मई को गिरफ्तार किया था। सीबीआइ की विशेष अदालत ने उसी दिन उन्हें जमानत दे दी थी लेकिन उच्च न्यायालय ने इस आदेश पर रोक लगा दी और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

गिरफ्तारी के दिन निजाम पैलेस स्थित सीबीआइ के कार्यालय के बाहर हजारों लोगों की भीड़ के प्रदर्शन किया था। जिसके चलते जांच एजेंसी द्वारा आरोपित नेताओं को प्रत्यक्ष तौर पर अदालत में पेश करने में असमर्थता जताए जाने पर 17 मई को वर्चुअल विशेष अदालत पेश किया था। उसी दिन इन चारों आरोपितों के खिलाफ विशेष अदालत में नारद स्टिंग मामले में आरोप पत्र भी दाखिल किया गया था।

विशेष अदालत ने उन्हें अंतरिम जमानत देते हुए मामलें में अगली सुनवाई के लिए चार जून की तारीख तय की और उस दिन आरोपियों को पेश होने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने सीबीआइ की विशेष अदालत द्वारा चारों नेताओं को अंतरिम जमानत देने के आदेश पर रोक के अपने पूर्व के आदेश में संशोधन करते हुए उन्हें 21 मई को घर पर नजरबंद करने का आदेश दिया था। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के न्यायाधीशों द्वारा चारों आरोपितों को अंतरिम जमानत देने पर मतभेद के बाद मामले को पांच न्यायाधीशों की एक वृहद पीठ के पास भेज दिया गया था।

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