ममता का गीत बदल रहा बुरा अतीत

कोलकाता जागरण संवाददाता। 'जोखोन तोमार भांगबे घूम, सेटाई तोमार सकाल..' (जब तुम्हारी नींद टूटेगी, वही तुम्हारे लिए सुबह होगी..)। ये गीत किसी और ने नहीं बल्कि बंगाल की कलाप्रेमी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लिखा है, जो दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न व अन्य तरह से सताई हुईं किशोरियों व महिलाओं को जीवन में नए उत्साह के साथ वापसी करने की प्रेरणा दे रहा है।

वे 'डांस थिएटर' के माध्यम से आपबीती सुनाकर समाज को ऐसी घटनाओं की रोकथाम के प्रति जागरुक करने का प्रयास कर रही हैं। 56 मिनट के इस डांस थिएटर को 'जोखोन तोमार भांगबे घूम' ही नाम दिया गया है। इसका महानगर के मधुसूदन मंच, ज्ञान मंच में मंचन हो चुका है और अब आगामी गुरुवार शाम कलामंदिर में होगा।

इस डांस थिएटर का आयोजन 'महिमा इंडिया' नामक संगठन की ओर से किया जा रहा है। ठाकुरपुकुर, हरिदेवपुर और बीबीरहाट में स्थित चार होम में रह रही दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न व अन्य यातनाओं की शिकार किशोरियां व महिलाएं इसमें शिरकत कर रही हैं।

महिमा इंडिया की डांस थेरेपिस्ट संचयिता हलदर उन्हें पिछले कई महीने से प्रशिक्षित कर रही हैं। यह डांस थिएटर संचयिता की ही परिकल्पना है। इसकी पटकथा नटराज दास ने लिखी है। इससे संग्रह होने वाली धनराशि को इन होम में रहने वालों के कल्याण में ही खर्च किया जाएगा।

डांस थिएटर से बंगाल के दो मशहूर बैंड 'भूमि' और 'जोआर' भी जुड़े हैं। महिमा इंडिया की अधिकारी स्मिता सिंह ने बताया कि दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न व नारी तस्करी की शिकार महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए पाक्सो समेत कई कानून हैं लेकिन ऐसी घटनाएं रोकने के लिए प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। न ही कोई प्रकल्प ही है।

सिर्फ मोमबत्ती लेकर जुलूस निकालने और काली पट्टी बांधकर विरोध रैली करने से कुछ नहीं होगा। बच्चियों को अच्छे व खराब स्पर्श के बारे में समझाना होगा। मोहल्लों में बाल उत्पीड़न विरोधी कमेटियों का गठन किया जाना चाहिए। स्मिता ने कहा कि वे चाहती हैं कि उनकी इस पहल से ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग आकर जुड़े। 

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