Bhabhanipur by elections: भवानीपुर उपचुनाव में व्यस्तता के कारण माओवादी समस्या पर केंद्र सरकार की बैठक में शामिल नहीं हो सकती हैं ममता बनर्जी

30 सितंबर को भवानीपुर में होने वाले उपचुनाव के प्रचार की आखिरी तारीख 27 सितंबर है। ऐसे में अगर केंद्र सरकार की ओर से बुलाई गई बैठक के लिए अगर मुख्यमंत्री दिल्ली जाएंगी तो उन्हें प्रचार के आखिरी चरण में एक-दो दिन बर्बाद करना पड़ेगा।

Priti JhaThu, 16 Sep 2021 09:44 AM (IST)
राज्यों की बैठक में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। माओवादी समस्या पर केंद्र सरकार की ओर से बुलाई गई संबंधित राज्यों की बैठक में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल नहीं हो सकती हैं। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। दरअसल माओवादी समस्या पर केंद्र सरकार ने संबंधित राज्यों के साथ बैठक बुलाई है। गृह मंत्री अमित शाह 26 सितंबर को बैठक करेंगे। माओवादी समस्याओं वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रस्तावित बैठक में शामिल होने के लिए कहा गया है।

30 सितंबर को भवानीपुर में होने वाले उपचुनाव के प्रचार की आखिरी तारीख 27 सितंबर है। ऐसे में अगर केंद्र सरकार की ओर से बुलाई गई बैठक के लिए अगर मुख्यमंत्री दिल्ली जाएंगी तो उन्हें प्रचार के आखिरी चरण में एक-दो दिन बर्बाद करना पड़ेगा। सूत्रों का कहना है कि तृणमूल सुप्रीमो ऐसा करने के लिए राजी नहीं हैं। कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना ​​है कि अगर मुख्यमंत्री बैठक में शामिल होती हैं तो उन्हें सीधे अमित शाह का सामना करना पड़ेगा। बैठक के साथ मुख्यमंत्री को शिष्टाचार का आदान-प्रदान करना पड़ेगा। मौजूदा हालात में अगर ममता उपचुनाव की वजह से नहीं जाती हैं तो उस संभावित स्थिति से भी बचा जा सकता है। दरअसल, विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई से अमित लंबे समय से ममता के हमले का निशाना बने हुए हैं। चुनाव प्रचार में ममता उन पर भी निशाना साध रही हैं।

गृह सचिव कर सकते हैं बैठक का प्रतिनिधित्व

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यदि मुख्यमंत्री बैठक में शामिल नहीं होती हैं तो वह राज्य के प्रतिनिधि को मनोनीत कर भेज सकती हैं। पूर्व में राज्य के गृह सचिव ने केंद्र द्वारा बुलाई गई बैठक का प्रतिनिधित्व किया है। उस दृष्टि से गृह सचिव भगवती प्रसाद गोपालिका को इस बार भी बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया जा सकता है।

हालांकि, प्रशासनिक सूत्रों का दावा है कि माओवादी समस्या उतनी गंभीर नहीं है जितनी पहले हुआ करती थी। माओवादी कभी-कभी विभिन्न घटनाओं के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। इस मुद्दे को हमेशा के लिए हल करने के लिए केंद्र सरकार सभी संबंधित राज्यों के साथ नियमित अंतराल पर बैठक करती है।

प्रशासन का दावा है कि बांकुड़ा, पुरुलिया, पश्चिम मेदिनीपुर और बीरभूम के कुछ हिस्सों को पहले सबसे ज्यादा प्रभावित माओवादी क्षेत्रों के रूप में जाना जाता था, लेकिन तृणमूल सरकार के सत्ता में आने के बाद से समस्या कम हो गई है। इन क्षेत्रों को केंद्र की अति-प्रभावित माओवादी क्षेत्रों की सूची से हटा दिया गया है क्योंकि कई वर्षों से कोई घटना नहीं हुई है। 

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