ममता बनर्जी ने नहीं दिया अपने दिवंगत मंत्री की बहन को केएमसी चुनाव का टिकट, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भरा पर्चा

मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अपने बेहद करीबी रहे दिवंगत मंत्री सुब्रत मुखर्जी की बहन तनिमा चट्टोपाध्याय को कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के चुनाव में पार्षद का टिकट नहीं दिया है जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल किया है।

Vijay KumarWed, 01 Dec 2021 08:40 PM (IST)
तनिमा चट्टोपाध्याय ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भरा पर्चा।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता : मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अपने बेहद करीबी रहे दिवंगत मंत्री सुब्रत मुखर्जी की बहन तनिमा चट्टोपाध्याय को कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के चुनाव में पार्षद का टिकट नहीं दिया है, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल किया है। गौरतलब है कि केएमसी के 68 नंबर वार्ड में तृणमूल ने पहले तनिमा के नाम की ही बतौर पार्टी प्रत्याशी घोषणा की थी लेकिन बाद में सुदर्शना मुखोपाध्याय को टिकट दे दिया गया, जो निवर्तमान पार्षद हैं।

कहा जा रहा है कि सुब्रत मुखर्जी के परिवार के कुछ सदस्यों के जोर देने पर ही यह कदम उठाया गया है। तनिमा 2010 में 87 नंबर वार्ड से जीतकर पार्षद बनी थीं लेकिन 2015 के चुनाव में वह भाजपा प्रत्याशी से हार गई थीं। तनिमा के करीबियों का दावा है कि सुब्रत मुखर्जी चाहते थे कि उनकी बहन इस बार भी केएमसी का चुनाव लड़े। उनकी इच्छा पूरी करने के लिए ही तनिमा निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रही हैं। तृणमूल के एक और निर्वतमान पार्षद रतन मालाकार ने टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पर्चा भरा है। रतन मालाकार ने 71 नंबर वार्ड से नामांकन पत्र जमा किया है। वहीं 70 नंबर वार्ड से सच्चिदानंद बंद्योपाध्याय भी तृणमूल से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं।

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भाजपा व कांग्रेस में भी विरोध के सुर

दूसरी तरफ भाजपा में भी केएमसी चुनाव के लिए प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद पार्टी के अंदर से विरोध के सुर उठने शुरू हो गए हैं। जिन्हें टिकट नही मिला है, उनमें भारी नाराजगी है। इस बारे में बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजुमदार ने कहा कि सभी को टिकट देना संभव नहीं है। जिन्हें टिकट नहीं दिया जा सका है, उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा जाएगा। यही नजारा कांग्रेस में भी देखने को मिल रहा है। वहां भी टिकट नहीं पाने वालों में क्षोभ है।

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