West Bengal: बंगाल के कई सांसद और विधायक कई मामलों में भगोड़े

West Bengal उच्च न्यायालय की आंतरिक रिपोर्ट में महापंजीयक ने उल्लेख किया है कि राज्य के कई सांसद व विधायक विभिन्न मामलों में भगोड़े हैं। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य के सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों के त्वरित निपटारे को अदालतों को निर्देशित किया था।

Sachin Kumar MishraSun, 01 Aug 2021 07:28 PM (IST)
रजिस्ट्रार जनरल ने कहा, राज्य के कई सांसद व विधायक कई मामलों में भगोड़े। फाइल फोटो

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कलकत्ता उच्च न्यायालय की आंतरिक रिपोर्ट में महापंजीयक ने उल्लेख किया है कि राज्य के कई सांसद और विधायक विभिन्न मामलों में भगोड़े हैं। दरअसल, हाल में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य के सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए निचली अदालतों को निर्देश दिया था। मामलों की स्थिति जानने के लिए हाईकोर्ट के महापंजीयक ने यह आंतरिक रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोलकाता के बिधाननगर स्थित एमपी-एमएलए अदालत में अदालत में ज्यादातर विधायकों व सांसदों को भगोड़ा बताया गया है जिसके कारण मामला ही शुरू नहीं हो पाया है। इसके अलावा कार्यवाही की धीमी गति के कारणों का उल्लेख किया गया है। मसलन अदालत में नौ कर्मचारियों की जरूरत है, जबकि वास्तविक में चार कर्मचारी ही हैं। इसके अलावा कोई विशेष लोक अभियोजक नहीं हैं।

अदालत में रिपोर्ट देखकर राज्य के मुख्य लोक अभियोजक शाश्वत गोपाल मुखर्जी हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि सांसद व विधायक भगोड़े कैसे हो सकते हैं। यह आश्चर्य की बात है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ के निर्देश पर महापंजीयक विभाग यह रिपोर्ट राज्य और केंद्र सरकार को भेजेगा। रिपोर्ट की समीक्षा के बाद केंद्र और राज्य सरकारों को हलफनामे के साथ अदालत को सूचित करना होगा कि मामलों के त्वरित निपटारे के लिए क्या किया जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई नौ अगस्त को है।

बंगाल सीआइडी ​​ने समय पर नहीं दी 27267 मामलों की चार्जशीट, हाईकोर्ट ने दी चेतावनी

बंगाल में सीआइडी ​​ने 27267 मामलों की चार्जशीट समय पर नहीं दी है। इसे लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने उसे कड़ी चेतावनी दी है। एक स्वत: संज्ञान मामले के परिप्रेक्ष्य में उच्च न्यायालय को सौपी गई रिपोर्ट में महापंजीयक विभाग की ओर से इसकी जानकारी दी गई है। इनमें से भारतीय दंड संहिता की 121 यानी देशद्रोह के अलावा अपहरण समेत सबसे जघन्य अपराध की चार्जशीट भी अटकी हुई है। 12 साल में कई मामले दर्ज नहीं हुए हैं। हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की खंडपीठ ने इस तरह की जानकारी से नाराजगी जताई। हालांकि सीआइडी का तर्क है कि मामलों में चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाने के कई कारण हैं। इनमें विभिन्न प्रयोगशालाओं से समय पर रिपोर्ट नहीं मिलना, अनुमति के लिए इंतजार, विशेषज्ञों की सलाह नहीं मिलना आदि शामिल है। 

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