जंगली हाथियों की सुरक्षा के लिए बिजली रोधी प्रकोष्ठ गठित करेगी सरकार, बिजली और वन विभाग अधिकारियों की बैठक

बेहतर समन्वय के लिए प्रत्येक प्रकोष्ठ का अपना व्हाट्सएप ग्रुप होगा।

कदम-बिजली और वन विभागों के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में लिया गया फैसला। पिछले पांच वर्षों में उत्तर बंगाल में बिजली का झटका लगने से 25 हाथियों की हो चुकी है मौत। बैठक में की गई सिफारिशों की प्रतियां राज्य के शीर्ष अधिकारियों को भेज दी गई हैं।

Vijay KumarThu, 12 Nov 2020 05:27 PM (IST)

राज्य ब्यूरो, कोलकाता : बंगाल सरकार ने जंगली हाथियों की सुरक्षा के लिए बिजली रोधी प्रकोष्ठ गठित करने का फैसला किया है। हाल में उत्तर बंगाल में इस बाबत बिजली और वन विभागों के अधिकारियों के बीच बैठक हुई है। अधिकारियों ने बताया कि इन प्रकोष्ठ में वन निदेशालय, पश्चिम बंगाल राज्य बिजली वितरण कंपनी लिमिटेड, जिला प्रशासन और पुलिस के साथ स्थानीय पंचायतों के सदस्य भी शामिल होंगे। बैठक में की गई सिफारिशों की प्रतियां राज्य के शीर्ष अधिकारियों को भेज दी गई हैं।

बिजली के खंभों को कवर करने का निर्णय भी लिया 

बैठक में हाईटेंशन लाइनों को शिथिल करने, उनकी ऊंचाई बढ़ाने और हाथियों के गुजरने वाले रास्तों के पास मौजूद कुछ बिजली के खंभों को कवर करने का निर्णय भी लिया गया। चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन वीके यादव ने कहा कि बेहतर समन्वय के लिए प्रत्येक प्रकोष्ठ का अपना व्हाट्सएप ग्रुप होगा।

चाय बगान प्रबंधन बिजली के बाड़ लगा नहीं सकते

हाथियों के भटककर मानव बस्तियों में आने की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग 'लो-वोल्टेज पल्सेटिंग करंट' के साथ बिजली के बाड़ भी लगाएगा। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि चाय बगान प्रबंधन बिजली के अवैध बाड़ लगा नहीं सकते। श्रमिक कॉलोनियों के पास कई ऐसे बाड़ हैं, जो हाथियों के बिजली के झटके से मौत का कारण बनते हैं। 

चाय बगान प्रबंधन केवल लो-वोल्टेज वाले बाड़ लगाएं

उक्त अधिकारी ने आगे कहा कि वन विभाग हाथियों के गलियारों से सटे चाय बगानों की पहचान करेगा और प्रकोष्ठ ये सुनिश्चित करेंगे कि चाय बगान प्रबंधन केवल लो-वोल्टेज वाले बाड़ लगाएं। 

घरेलू बिजली लाइनों का अनधिकृत विस्तार पाया गया

गौरतलब है कि पिछले पांच वर्षों में उत्तर बंगाल में बिजली का झटका लगने से 25 हाथियों की मौत हो चुकी है, जिनमें से नौ घटनाएं इसी साल  हुई हैं। यादव ने कहा कि हाथियों की मौत का मुख्य कारण जंगलों की परिधि और बिजली के बाड़ के उपयोग पर लो टेंशन वाली घरेलू बिजली लाइनों का अनधिकृत विस्तार पाया गया है। 

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