बंगाल में सामने आए ब्लैक फंगस के चार मामले, कोरोना से उबर चुके मरीजों में उत्पन्न होने वाली एक गंभीर

ब्लैक फंगस कोरोना से उबर चुके मरीजों में उत्पन्न होने वाली एक गंभीर व दुर्लभ स्वास्थ्य परिस्थिति है।

ब्लैक फंगस कोरोना से उबर चुके मरीजों में उत्पन्न होने वाली एक गंभीर व दुर्लभ स्वास्थ्य परिस्थिति है।स्प्रे वाले सैनिटाइजर नांक और आंख में कवक के संक्रमण को बढ़ा रहे हैं और आंखों की रोशनी छीन रहे हैं। बाजार में मिलने वाले सैनिटाइजर में पांच फीसद के आसपास मिथेनॉल है

Priti JhaSat, 15 May 2021 01:51 PM (IST)

कोलकाता, राज्य ब्यूरो। बंगाल में ब्लैक फंगस के चार मामले सामने आए हैं। ब्लैक फंगस कोरोना से उबर चुके मरीजों में उत्पन्न होने वाली एक गंभीर व दुर्लभ स्वास्थ्य परिस्थिति है। ये चारों मरीज पड़ोसी राज्य झारखंड व बिहार के रहने वाले हैं। इनमें से दो का दुर्गापुर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। मरीजों में तीन पुरुष और एक महिला शामिल हैं। पुरुष मरीजों की उम्र 35, 40 व 50 वर्ष और महिला मरीज की 65 वर्ष है। तीन मरीज दुमका व झारखंड के अन्य शहर के रहने वाले हैं। चौथा मरीज बिहार के भागलपुर का रहने वाला है। इन चारों मामलों का दिशा अस्पताल में सात से 13 मई के दौरान पता चला।

दिशा आई हॉस्पिटल के सीएमडी डॉ देवाशीष भट्टाचार्य ने बताया कि ब्लैक फंगस के इलाज में बहु अनुशासित रवैये की जरूरत पड़ती है। दो मरीजों को दुर्गापुर स्थित बंगाल हेल्थवर्ल्ड में भर्ती कराया गया है, वहां उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि ब्लैक फंगस प्राकृतिक पर्यावरण में पाया जाता है, जो साइनस, चेहरे और मस्तिष्क को प्रभावित करता है। नाक का बंद होना, सिर के एक तरफ दर्द होना, दांतों में दर्द, सूजन होना इसके शुरुआती लक्षण हैं। कुछ मामलों में यह जानलेवा साबित हो सकता है। मधुमेह के मरीजों को विशेष तौर पर सावधानी बरतने की जरूरत है। फोर्टिस हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजिस्ट सुष्मिता रॉय चौधरी ने बताया कि ब्लैक फंगस के मामले में बिना डॉक्टरी सलाह के खुद से कोई भी दवा का सेवन करना बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है, खासकर ऐसी दवा, जिसमें स्टेरॉइड हो। 

ब्लैक फंगस के लिए धूलकण और सस्ते स्प्रे सैनिटाइजर भी जिम्मेदार

बाजार में मिलने वाले सैनिटाइजर में करीब पांच फीसद मिथेनॉल मौजूद। तेजी से बढ़ रहे फंगल इंफेक्शन के पीछे कोरोना को ठीक करने वाले एस्टेरॉयड ही नहीं बल्कि धूल प्रदूषण और सैनिटाइजर भी काफी जिम्मेदार हैं। दुनिया में भारत ही एक मात्र देश है जहां पर ब्लैक फंगस इतना तेजी से फैल रहा है। जगह-जगह चल रहे निर्माण कार्य और स्प्रे वाले सैनिटाइजर नांक और आंख में कवक के संक्रमण को बढ़ा रहे हैं और आंखों की रोशनी छीन रहे हैं। बाजार में मिलने वाले सैनिटाइजर में पांच फीसद के आसपास मिथेनॉल है। आइआइटी-बीएचयू में सिरामिक इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिक डॉ. प्रीतम सिंह के अनुसार इन सस्ते स्प्रे सैनिटाइजर का उपयोग तत्काल बंद कर दिया जाए। आंख और नाक में इनके जाते ही ब्लैक फंगस उगने लग रहे हैं। इससे आंखों की रेटिना खराब हो रही है जिससे रोशनी धीरे-धीरे खत्म हो रही और व्यक्ति अंधा हो रहा है। सैनिटाइजर के बजाय डिटॉल, साबुन और हैंडवाश का उपयोग करें।

ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही, बाजार में इसकी दवाओं का टोटा। कोविड संक्रमण के बाद ब्लैक फंगस या म्यूकरमाइकोसिस के के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।

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