West Bengal: बंगाल में पहली बार बाघों के साथ शाकाहारी जानवरों की भी होगी गिनती

West Bengal बंगाल के मुख्य वन्यजीव वार्डन देबल राय ने बताया कि पहले बाघों की गणना केवल उनको ध्यान में रखकर की जाती थी लेकिन इस वर्ष से अखिल भारतीय समन्वित बाघ गणना द्वारा गणना में हिरण मृग गौर गैंडा व हाथी जैसे शाकाहारी जानवरों को भी शामिल किया जाएगा।

Sachin Kumar MishraWed, 22 Sep 2021 06:18 PM (IST)
बाघ की फाइल फोटो। बंगाल में शाकाहारी जानवरों की भी गिनती होगी।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में पहली बार बाघों के साथ शाकाहारी जानवरों की भी गिनती की जाएगी। राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन देबल राय ने बताया कि पहले बाघों की गणना केवल उनको ध्यान में रखकर की जाती थी, लेकिन इस वर्ष से अखिल भारतीय समन्वित बाघ गणना द्वारा निर्धारित गणना में हिरण, मृग, गौर, गैंडा और हाथी जैसे शाकाहारी जानवरों को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बाघों के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए शाकाहारी जीव महत्वपूर्ण हैं। इसके लिए यह जानना अनिवार्य है कि वन क्षेत्र में बाघों के साथ कितने शाकाहारी जानवर हैं। इस वर्ष गणना दिसंबर में शुरू होगी और आगामी वर्ष के जनवरी माह तक जारी रहेगी। गौरतलब है कि 2019-2020 की गिनती में सुंदरवन में बाघों की संख्या 95 पाई गई थी। वन विभाग को उम्मीद है कि आगामी गणना में उनकी संख्या अधिक होगी। यह दिसंबर में शुरू होगी और जनवरी तक जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि भारतीय वन्यजीव संस्थान गिनती के बाद आंकड़ों का विश्लेषण करेगा।

गौरतलब है कि यूनेस्को की विश्व धरोहरों में शुमार सुंदरवन में बीते सप्ताह दो लोगों पर बाघों ने हमले किए, जिनमें से एक की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। इस क्षेत्र में रायल बंगाल टाइगर के हमले लगातार बढ़ रहे हैं। बंगाल और पड़ोसी बांग्लादेश तक करीब 10 हजार वर्ग किमी में यह दलदली (मैंग्रोव) जंगल फैला है, जिसमें 4,262 वर्ग किमी क्षेत्र भारत में है। सुंदरवन बाघों के अलावा अपनी जैविक विविधताओं के लिए भी पूरी दुनिया में मशहूर है। बाघों को इस वन का रक्षक भी कहा जाता है, लेकिन सिमटते क्षेत्र और बढ़ती संख्या (2018-19 में यहां बाघों की संख्या 111 थी, जो 134 हो गई है), घटते शिकार और बढ़ते जलस्तर से रक्षक को अब परेशानी होने लगी है। इसका नतीजा हमले के रूप में सामने आ रहा है।

सुंदरवन में कुल 102 द्वीप हैं। इनमें से 54 पर आबादी है। आबादी के बढ़ते दबाव और पर्यावरण असंतुलन से सिकुड़ते जंगल के चलते सुंदरवन से सटी विभिन्न बस्तियों के लोगों को बाघों का शिकार होना पड़ रहा है। दूसरी ओर बाघों के जंगलों से निकलकर बस्तियों में आने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सुंदरवन में हर साल 40 से 45 लोग बाघों के शिकार हो रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार यह संख्या 100 से भी ज्यादा है। दरअसल, वन विभाग हर साल करीब 50 लोगों को ही सुंदरवन में शहद इकट्ठा करने और मछलियां आदि पकड़ने की अनुमति देता है, लेकिन अवैध रूप से सैकड़ों लोग इन जंगलों में चले जाते हैं। 

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