Farmer Protest: नए कानून किसानों को बड़े कॉरपोरेट्स की दया का मोहताज बना देंगे: तृणमूल

तृणमूल के नेता व सांसद अपनी सरकार की बाहबाही और केंद्र पर साधा निशाना

केंद्र ने जिस तरह जल्दबाजी में कृषि कानूनों को पारित किया वह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि केंद्र सरकार किसान विरोधी और जन विरोधी है। सांसद ने कहा कि किसानों को अब बड़े कॉरपोरेट्स को कंपनियों द्वारा बताए गए मूल्यों पर अपनी उपज बेचने को मजबूर होना पड़ेगा।

Publish Date:Thu, 14 Jan 2021 05:36 PM (IST) Author: Vijay Kumar

राज्य ब्यूरो, कोलकाताः तृणमूल कांग्रेस ने गुरुवार को दावा किया कि नए कृषि कानून छोटे और सीमांत किसानों को बड़े कॉरपोरेट्स की दया का मोहताज बना देंगे और इन्हें तुरंत रद किया जाना चाहिए। तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की सूची से निकाले जाने के बाद प्याज और आलू के दाम आसमान छू रहे हैं। उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की अवधारणा को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि केंद्र ने जिस तरह संसद में चर्चा किए बिना जल्दबाजी में कृषि कानूनों को पारित किया, वह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि केंद्र सरकार किसान विरोधी और जन विरोधी है।

सांसद ने कहा कि किसानों को अब बड़े कॉरपोरेट्स को कंपनियों द्वारा बताए गए मूल्यों पर अपनी उपज बेचने को मजबूर होना पड़ेगा। हालांकि, फसल खराब होने की स्थिति में, यह कंपनियां किसानों से उपज खरीदने के लिए बाध्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर बंगाल सरकार ने हमेशा किसानों का साथ दिया है और उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड भी दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि नए कृषि कानून पूरी तरह असंवैधानिक हैं और दिखाते हैं कि केंद्र की जिम्मेदारी कॉरपोरेट्स की तरफ है, देश की जनता के प्रति नहीं।

यहां यह भी बतातें चलें कि केंद्र सरकार का दावा है कि नए कृषि कानून से किसी भी किसान का कोई अहित नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने किसानों से चर्चा के लिए कमेटी गठित कर दी है। बावजूद इसके इस मुद्दे पर विरोधी की सियासत जारी है।

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