शंभुनाथ पंडित अस्पताल में एकमो हब जल्द, गंभीर कोविड मरीजों को मिल सकेगा इलाज

शंभुनाथ पंडित अस्पताल में एक विशेष देखभाल इकाई स्थापित की जा रही है। क्रिटिकल केयर यूनिट में कई बेड होंगे। सात एकमो यंत्र होंगे। कोविड पेशेंट में अगर वेंटिलेशन के बाद भी ऑक्सीजन का स्तर नहीं बढ़ता है तो एकमो सपोर्ट दिया जा सकता है। यह बहुत प्रभावी होता है।

Babita KashyapSat, 12 Jun 2021 08:20 AM (IST)
शंभुनाथ पंडित अस्पताल में एकमो हब जल्द

कोलकाता, राज्य ब्यूरो। ‘एकमो’ (एक्स्ट्रा कॉर्पोरल मेम्ब्रेन ऑक्सीजन) सपोर्ट की जरूरत होने पर मरीजों को काफी दिक्कत थी। शहर के निजी अस्पतालों में यह सुविधा थी। हालांकि अब सरकारी अस्पताल में भी यह सुविधा होने जा रही है। कुछ कोरोना मरीजों को अभी भी फेफड़ों के संक्रमण के इलाज के लिए एकमो की जरूरत है, लेकिन किसी भी निजी और सरकारी अस्पताल में एक भी बेड नहीं मिलने की समस्या होती है।

पिछले साल मालदह के एक नेत्र रोग विशेषज्ञ और शहर के दो सरकारी अस्पतालों के दो डॉक्टरों को एकमो सपोर्ट के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। ऐसा इसलिए है क्योंकि कोलकाता मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में दो एकमो उपकरण थे लेकिन कोई प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं था। अब मशीन सेवा शुरू हो गई है।

कोरोना से निपटने के लिए यह निर्णय लिया गया कि राज्य में एक ‘एकमो -हब’ स्थापित किया जाएगा। सात एकमो यंत्र होंगे और वह हब एसएसकेएम अस्पताल का एनेक्स शंभूनाथ पंडित अस्पताल होगा। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गंभीर मरीज का इलाज करने वाला यह हब राज्य का पहला केंद्र है।

कुछ दिन पहले शंभुनाथ पंडित अस्पताल के दो नए चार मंजिला भवनों में कोरोना का इलाज शुरू किया गया था, राज्य के स्वास्थ्य अधिकारी अजय चक्रवर्ती ने कहा कि अस्पताल में एक विशेष देखभाल इकाई स्थापित की जा रही है। क्रिटिकल केयर यूनिट में कई बेड होंगे। सात एकमो यंत्र होंगे। सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य भवन की एक पखवाड़े पहले हुई बैठक में ईसीओएमओ की मांग और जरूरतें बढ़ाने का फैसला किया गया। इस उपकरण को शंभुनाथ पंडित अस्पताल ले जाया जाएगा। इसी तरह हाल ही में एक पीजी प्रतिनिधिमंडल ने मेडिका अस्पताल का दौरा किया और एकमो के प्रबंधन का निरीक्षण किया।

 किसे जरूरत पड़ती है एकमो की

एकमो सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अर्पण चक्रवर्ती का कहना है कि अगर वेंटिलेशन के बाद भी ऑक्सीजन का स्तर नहीं बढ़ता है, तो एकमो सपोर्ट दिया जा सकता है। यह बहुत प्रभावी होता है। सिर्फ कोरोना ही नहीं, हार्ट अटैक, निमोनिया, ऑर्गन ट्रांसप्लांट को भी एकमो के कुछ सहारे की जरूरत होती है। यह विधि कई रोगों के उपचार में कारगर है। उस रक्त को शरीर से निकाल कर कृत्रिम फेफड़े में डाला जाता है। वहां, कार्बन डाइऑक्साइड को हटाकर रक्त में ऑक्सीजन जोड़ा जाता है। शुद्ध रक्त को एक विशेष उपकरण के माध्यम से शरीर में फिर से पेश किया जाता है। आमरी, मेडिका, अपोलो जैसे निजी अस्पतालों में एकमो सेवाएं हैं। सूत्रों के मुताबिक पीजी के पास पहले से ही एकमो डिवाइस थी।

इन चार विभागों में तीन या चार बिस्तरों के लिए 15-20 लोगों की एक टीम लगाई जा रही है, जिसमें प्रशिक्षित क्रिटिकल केयर चिकित्सक, मशीन को संचालित करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी, प्रशिक्षित नर्स, सीसीयू तकनीशियन और कर्मचारी शामिल हैं। अभी के लिए यह निर्णय लिया गया है कि पीजी के सीटीवीएस, सीटीवीए, क्रिटिकल केयर विभाग और अन्य डॉक्टर भी ‘एकमो-हब’ के प्रभारी होंगे। स्वास्थ्य भवन डॉक्टर, नर्स और स्टाफ भी भेजेगा।

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