Chit fund scam: सारधा कांड में मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक देबजानी को हाई कोर्ट से मिली सशर्त जमानत

हजारों करोड़ के बहुचर्चित सारधा चिटफंड घोटाले के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल देबजानी मुखर्जी को आखिरकार करीब आठ साल बाद हाई कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई। शनिवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल व न्यायाधीश अरिजीत मुखर्जी की पीठ ने उसे सशर्त जमानत दे दी।

Vijay KumarSat, 19 Jun 2021 05:44 PM (IST)
देबजानी मुखर्जी को आखिरकार करीब आठ साल बाद हाई कोर्ट से सशर्त जमानत

राज्य ब्यूरो, कोलकाताः हजारों करोड़ के बहुचर्चित सारधा चिटफंड घोटाले के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल देबजानी मुखर्जी को आखिरकार करीब आठ साल बाद हाई कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई। शनिवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल व न्यायाधीश अरिजीत मुखर्जी की पीठ ने उसे सशर्त जमानत दे दी। इसी के साथ चिटफंड घोटाले में देबजानी को बंगाल में दर्ज सभी मामले में जमानत मिल गई है। परंतु, उसके जेल से रिहा होनेे को लेकर अब भी संशय है। क्योंकि, देबजानी के खिलाफ असम और भुवनेश्वर में भी कई मामले दर्ज हैं जिसमें उसे जमानत नहीं मिली है।

मामले की सुनवाई के दौरान देबाजानी के अधिवक्ता जयंत नारायण चट्टोपाध्याय ने कहा कि इस मामले में जो भी मुख्य आरोपित थे उनमें से अधिकांश को जमानत मिल चुकी है। परंतु, देबजानी जो सिर्फ सारधा समूह में नौकरी करती थी उसे जेल में कैद रखा गया है। उन्होंने ने यह भी आरोप लगाया कि सीबीआइ चाहती है कि जमानत ना मिले, इसीलिए विरोध करती रही है। खबर है कि 15 जून को सुनवाई के दौरान सीबीआइ में देबजानी की जमानत मामले पर सुनवाई की तिथि आगे बढ़ाने की अपील की थी। लेकिन मुख्य न्यायाधीश की पीठ के सीबीआइ की अपील को खारिज कर दिया। साथ ही अदालत ने सीबीआइ पर सवाल भी उठाए थे। 16 जून को इस मामले की सुनवाई प्रक्रिया पूरी हो गई थी। अदालत ने इस दिन दो लाख के व्यक्तिगत मुचलके पर उसे सशर्त जमानत दे दी।

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ये है जमानत की शर्तें

देबजानी का जिस थाना क्षेत्र में घर है उस क्षेत्र से बाहर नहीं जा सकती है। उसे सप्ताह में एक बार सीबीआइ के जांचकर्ता अधिकारी के समक्ष हाजिर होना होगा। जेल के बाहर रहते हुए किसी भी गवाह से संपर्क या किसी तरह का संवाद भी नहीं कर सकती। इन शर्तों का पूरा-पूरा पालन हो इसके लिए दो लोगों ने एक-एक लाख का व्यक्तिग मुचलका भी जमा दिया है। इस मामले के तीन लोगों को मुख्य आरोपित बनाया गया था जिसमें घोटाले के सरगना सुदीप्त सेन, तृणमूल नेता कुणाल घोष और सेन के करीबी देबजानी का नाम था। कुणाल घोष को पहले ही जमानत मिल गई थी। देबजानी को अब जमानत नहीं मिली है।

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घोटाले के सरगना सुदीप्त सेन के साथ कश्मीर से हुई थी गिरफ्तारी 

2013 में सारधा चिटफंड घोटाला सामने आने के बाद सरगना सुदीप्त सेन के साथ देबजानी कोलकाता से फरार हो गई थी। इसके बाद इस मामले की जांंच के लिए गठित बंगाल पुलिस की विशेष जांच दल ने सुदीप्त व देबजानी को कश्मीर से गिरफ्तार किया था। तब से देबजानी जेल में है। 2014 में सरदा टूर एंड ट्रेवल्स के नाम पर हजारों करोड़ रुपये घोटाले में देबाजानी भी मुख्य आरोपित है।

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