कलकत्ता हाई कोर्ट ने अलापन बंद्योपाध्याय से जुड़े मामले में केंद्र सरकार को लगाई फटकार, फैसला रखा सुरक्षित

कलकत्ता हाई कोर्ट ने बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय से जुड़े मामले में केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। बुधवार को मामले पर सुनवाई के दौरान न्यायाधीश सब्यसाची भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता से सवाल किया

Vijay KumarWed, 27 Oct 2021 08:53 PM (IST)
अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। वह दो नवंबर से पहले फैसला सुनाएगी।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता : कलकत्ता हाई कोर्ट ने बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय से जुड़े मामले में केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। बुधवार को मामले पर सुनवाई के दौरान न्यायाधीश सब्यसाची भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता से सवाल किया कि जब पूरा मामला बंगाल केंद्रित है तो इस पर सुनवाई दिल्ली क्यों स्थानांतरित की गई है?न्यायाधीश ने आगे कहा कि अलापन बंद्योपाध्याय को न्याय से वंचित किया जा रहा है। अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। वह दो नवंबर से पहले फैसला सुनाएगी।

गौरतलब है कि दो नवंबर को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की प्रिंसिपल बेंच में इस मामले पर सुनवाई होनी है। अलापन बंद्योपाध्याय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में चक्रवात 'यास' को लेकर हुई बैठक में शामिल नहीं होने पर उनके खिलाफ शुरू की गई प्रशासनिक कार्यवाही पर सुनवाई को आंचलिक पीठ से केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में स्थानांतरित किए जाने के खिलाफ हाई कोर्ट का रूख किया था।

अलापन की तरफ से हाई कोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा गया कि चूंकि वे सेवानिवृत्त आइएएस अफसर हैं और कोलकाता में रहते हैं इसलिए इस मामले पर सुनवाई उनकी सहूलियत के लिए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की आंचलिक पीठ में होनी चाहिए। गौरतलब है कि अलापन बंद्योपाध्याय केंद्र सरकार की तरफ से सेवा विस्तार दिए जाने के बावजूद गत 31 मई को अपनी मूल सेवानिवृत्ति तिथि पर ही सेवानिवृत्त हो गए थे। उन्होंने नई दिल्ली में रिपोर्ट करने से इन्कार कर दिया था।

बंगाल सरकार की ओर से उन्हें उसी दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया था। अलापन कलाईकुंडा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं हुए थे, जिसके लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके जवाब में उन्होंने कहा था कि उन्हें दीघा में एक जरूरी बैठक के लिए जाना था, जिसके लिए उन्होंने अनुमति भी ली थी।

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