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Bengal Election: बंगाल में आठ चरणों में भी नहीं टूटा दो चुनावों का रिकार्ड पर कोरोना के बीच आंकड़ा बहुत बेहतर

अंतिम चरण में कोरोना व हिंसा के बाद भी 2011 से अधिक पड़े वोट

आठ चरणों में चली लंबी मतदान प्रक्रिया के बावजूद मतदाताओं का उत्साह देखने को मिला और बंगाल में दूसरे चरण में जहां 86.11 फीसदी मतदान दर्ज किया गया वहीं कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच भी सातवें चरण में 76.90 फीसद मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

Sanjay PokhriyalFri, 30 Apr 2021 08:05 PM (IST)

जयकृष्ण वाजपेयी, कोलकाता। आठवें व आखिरी चरण के साथ ही बंगाल की 292 विधानसभा सीटों के लिए मतदान संपन्न हो गया। इस चुनाव में शुरू से लेकर अंत तक जमकर हिंसा हुई। एक दर्जन से अधिक लोगों की जानें गई। हिंसा की वजह से पांचवें दौर और कोरोना महामारी के कारण आखिरी के तीन चरणों में चुनाव प्रचार को मतदान से 72 घंटे पहले ही बंद करना पड़ा। इतने विकट व विषम परिस्थितियों के बावजूद बंगाल के मतदाताओं ने जमकर मतदान किया। हालांकि, कोलकाता समेत कुछ और शहरी इलाकों के लोगों ने उस हिसाब से मतदान में भाग नहीं लिया जैसा कि ग्रामीण इलाके में दिखा। बावजूद इसके आठ चरणों में बंगाल में 81.76 फीसद मतदान हुआ।

वैसे तो यह आंकड़ा 2011 के 84.33 व 2016 के 83.02 फीसद से थोड़े कम है, लेकिन जिस तरह से कोरोना महामारी का आतंक है उसमें भी 81.76 फीसद वोटिंग बहुत बेहतर है। यदि कोरोना नहीं होता तो इस बार पिछले दो दशकों का रिकार्ड टूट जाता। हालांकि वैसे अभी दो विधानसभा सीटों के लिए मतदान 16 मई को होना है। उक्त दोनों ही सीटों पर पड़ने वाले वोट फीसद को जोड़ देंगे तो यह आंकड़ा 82 हो जाएगा। शुक्रवार को राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी दफ्तर की ओर से बताया गया कि आठवें चरण में 77.95 फीसद मतदान हुआ। जिसमें सर्वाधिक बीरभूम जिले की 11 सीटों पर 83.06 फीसद वोटिंग हुई। वहीं कोलकाता में सबसे कम 59.18 फीसद वोट पड़े। वहीं मालदा में 81.67 और मुर्शिदाबाद में 81.04 फीसद मतदान हुआ।

बंगाल में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाजी का खेल शुरू हो गया था। निर्वाचन आयोग ने जब 26 फरवरी को बंगाल विधानसभा चुनाव आठ चरणों में कराए जाने की घोषणा की, उसी दिन से विवाद खड़ा हुआ और तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ऐसा करके भाजपा को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया गया। असम विधानसभा चुनाव तीन चरणों में कराए जाने के अलावा तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में एक ही चरण में छह अप्रैल को मतदान कराया गया। बंगाल में 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच आठ चरणों में चली लंबी मतदान प्रक्रिया के बावजूद मतदाताओं का उत्साह देखने को मिला और दूसरे चरण में जहां 86.11 फीसदी मतदान दर्ज किया गया, वहीं कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच भी सातवें चरण में 76.90 फीसद मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

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