बंगाल में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सूबे की बेटी को देना चाहती भाजपा, देबश्री चौधरी और लॉकेट चटर्जी का नाम चर्चा में

प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर दिलीप घोष का कार्यकाल इस साल दिसंबर तक है। नियम के मुताबिक उनके दोबारा चुने जाने की संभावना नहीं है। नतीजतन बंगाल को नया अध्यक्ष मिलने वाला है। दिलीप घोष की जगह कौन लेगा इसे लेकर मंथन चल रहा है।

Vijay KumarWed, 16 Jun 2021 06:07 PM (IST)
बंगाल में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी 'सूबे की बेटी' को देना चाहती भाजपा

राज्य ब्यूरो, कोलकाता : प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर दिलीप घोष का कार्यकाल इस साल दिसंबर तक है। नियम के मुताबिक उनके दोबारा चुने जाने की संभावना नहीं है। नतीजतन बंगाल को नया अध्यक्ष मिलने वाला है। दिलीप घोष की जगह कौन लेगा, इसे लेकर मंथन चल रहा है। प्रदेश भाजपा सूत्रों के अनुसार केंद्रीय नेता प्रदेश को संगठित करने की जिम्मेदारी पार्टी की महिला नेता को सौंपने पर विचार कर रहे हैं। भाजपा के एक सूत्र के मुताबिक इसके लिए देबश्री चौधरी और लॉकेट चटर्जी का नाम पहले आ रहा है। माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व इन्हीं में से किसी एक को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देगा।

दरअसल राज्य की अधिकांश महिलाओं ने पिछले विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी पार्टी को वोट दिया था। इसे देखकर स्वाभाविक रूप से केंद्रीय नेतृत्व को लगता है कि महिला नेता को संगठन में सबसे आगे लाने से एक मजबूत राजनीतिक प्रभाव पड़ेगा। इसका ताजा उदाहरण यह है कि विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद तृणमूल कांग्रेस ने सायोनी घोष को युवा तृणमूल कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया है।

'बंगाल की बेटी' के खिलाफ 'बंगाल की ही बेटी' को ही हथियार बनाना चाहता है केंद्रीय नेतृत्व

-भाजपा सूत्रों से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व 'बंगाल की बेटी' के खिलाफ 'बंगाल की ही बेटी' को ही हथियार बनाना चाहता है। इस कड़ी में देबश्री चौधरी और लॉकेट चटर्जी का नाम पहले आ रहा है। देबश्री चौधरी रायगंज से सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री हैं। सूत्रों के मुताबिक आगामी कैबिनेट फेरबदल में उन्हें मंत्रिमंडल से हटाया जा सकता है और प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जा सकती है। लॉकेट चटर्जी का नाम भी चर्चा में है। लॉकेट हुगली से सांसद हैं और लंबे समय तक राज्य के महिला मोर्चा की अध्यक्ष रहीं। वर्तमान में राज्य की महासचिव हैं। नतीजतन उन्हें संगठन चलाने का अनुभव है। बता दें कि केंद्रीय मंत्री बनने से पहले देबश्री राज्य की महासचिव भी थीं।

लॉकेट चटर्जी विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन के मामले में देबश्री से थोड़ा पीछे हैं। इस बार वह खुद चुनाव हार गई थीं। उनके संसदीय क्षेत्र से भाजपा एक भी सीट नहीं जीत सकी। देबश्री चौधरी ने चुनाव नहीं लड़ा। लिहाजा जीत या हार का कोई सवाल ही नहीं है। भाजपा ने उनके लोकसभा क्षेत्र में रायगंज और कालियागंज में दो सीटें जीती हैं। उल्लेखनीय देबश्री चौधरी संघ परिवार से सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। लिहाजा स्वाभाविक रूप से देबश्री प्रदेश अध्यक्ष बनने की दौड़ में लॉकेट से आगे हैं। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इस बारे में राज्य के नेता भी मुंह खोलने से कतरा रहे हैं।

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