चुनाव में बाहरी के मुद्दे वाले बंगाल में मुख्य सचिव से डीजीपी तक सभी शीर्ष पदों पर काबिज हैं हिंदीभाषी

किसी भी राज्य में ये सभी विभाग व पद सबसे अहम माना जाता है। ऐसे में इसे अद्भुत संयोग ही कहेंगे कि बंगाल जैसे गैर हिंदी भाषी राज्य में इस समय सभी शीर्ष पदों पर हिंदीभाषी अधिकारी आसीन होकर अपनी प्रतिभा का डंका बजा रहे हैं।

Vijay KumarWed, 02 Jun 2021 06:21 PM (IST)
बंगाल में इस समय सभी शीर्ष पदों पर हिंदीभाषी अधिकारी आसीन होकर अपनी प्रतिभा का डंका बजा रहे हैं।

राजीव कुमार झा, कोलकाता । हाल में संपन्न बंगाल विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा के खिलाफ 'बाहरी' का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा तक को ममता ने लगातार बहिरागतो (बाहरी) बताया था, पर हकीकत यह है कि उनकी सरकार में पुलिस व प्रशासनिक महकमे में सभी शीर्ष पदों पर इस समय हिंदीभाषी अधिकारी ही काबिज हैं। यानी बंगाल में मुख्य सचिव, गृह सचिव व स्वास्थ्य सचिव से लेकर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तक सभी हिंदीभाषी हैं। इन सभी शीर्ष अधिकारियों का ताल्लुक बिहार, उत्तर प्रदेश व हरियाणा से है।

दरअसल, किसी भी राज्य में ये सभी विभाग व पद सबसे अहम माना जाता है। ऐसे में इसे अद्भुत संयोग ही कहेंगे कि बंगाल जैसे गैर हिंदी भाषी राज्य में इस समय सभी शीर्ष पदों पर हिंदीभाषी अधिकारी आसीन होकर अपनी प्रतिभा का डंका बजा रहे हैं। इनमें नए मुख्य सचिव के रूप में हरिकृष्ण द्विवेदी व गृह सचिव बीपी गोपालिका की नियुक्ति तीन दिन पहले ही ममता ने की है। दोनों ने मंगलवार, एक मई को ही कार्यभार संभाला है। 1988 बैच के बंगाल कैडर के वरिष्ठ आइएएस अधिकारी द्विवेदी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के निवासी हैं। मुख्य सचिव से पहले वह गृह सचिव के पद पर थे। उसके पहले उन्होंने लंबे समय तक राज्य में वित्त विभाग के प्रधान सचिव की जिम्मेदारी संभाली।

वहीं, नए गृह सचिव बने बीपी गोपालिका की बात करें तो वे मूल रूप से बिहार के पटना के रहने वाले हैं। 1989 बैच के वरिष्ठ आइएएस अधिकारी गोपालिका इससे पहले पशुपालन विभाग में प्रधान सचिव थे। अब उन्हें गृह जैसे अहम विभाग की जिम्मेवारी ममता ने सौंपी हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य सचिव के पद पर करीब एक साल से तैनात वरिष्ठ आइएएस नारायण स्वरूप निगम भी मूलतः उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इससे पहले वे परिवहन सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पिछले साल जब कोरोना का प्रकोप बढ़ा तो ममता ने निगम को स्वास्थ्य जैसे अहम विभाग की जिम्मेवारी सौंपी। खास बात यह है कि गृह व स्वास्थ्य विभाग खुद ममता के ही पास हैं। वहीं, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पद पर एक साल से ज्यादा समय से तैनात वरिष्ठ आइपीएस वीरेंद्र भी मूलतः हरियाणा के रहने वाले हैं। अभी हाल में विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने वीरेंद्र को डीजीपी पद से हटा दिया था। लेकिन, सत्ता में वापसी के बाद मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ घंटे बाद ही ममता ने वीरेंद्र को पुनः डीजीपी पद पर बहाल कर दिया।

इसी तरह राज्य में कई और अहम पदों पर हिंदीभाषी अधिकारी काबिज हैं, जो ममता के चहेते माने जाते हैं। गौरतलब है कि ममता खुद कई बार कह चुकी हैं कि वह काम व प्रतिभा के मामले में किसी से भेदभाव नहीं करतीं, जो हकीकत में दिखाई भी दे रही है।

ममता के सुरक्षा निदेशक भी हैं हिंदीभाषी

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सुरक्षा निदेशक के पद पर तैनात वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी विवेक सहाय भी हिंदीभाषी हैं, जो बिहार के पटना के रहने वाले हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान नंदीग्राम में ममता के चोटिल होने के बाद उनकी सुरक्षा में चूक को लेकर चुनाव आयोग ने विवेक सहाय को निलंबित कर दिया था। लेकिन सत्ता में वापसी करते ही ममता ने सहाय को भी तुरंत बहाल कर दिया। बता दें कि राज्य में कई और अहम पदों पर व कई जिलों के डीएम- एसपी एवं पुलिस आयुक्त भी हिंदीभाषी हैं।

राज्य के चुनाव आयुक्त पद पर तैनात सौरभ कुमार दास (रिटायर्ड आइएएस) भी बिहार के मधुबनी से हैं। इसी तरह राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) आरिफ आफताब भी बिहार से ही हैं। इससे पहले कुछ साल पूर्व लंबे समय तक कोलकाता के पुलिस आयुक्त पद पर तैनात रहे राजीव कुमार भी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। कुमार भी ममता के बेहद करीबी अधिकारियों में शामिल रहे हैं जिनके लिए वह केंद्र तक से टकरा गईं थी।

 

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