Bangaladesh Violence: दो ट्विटर अकाउंट बंद होने पर इस्कान ने मांगा स्पष्टीकरण, बांग्लादेश अकाउंट क्यों बंद किया?

बांग्लादेश में अशांति के मद्देनजर इंटरनेशनल सोसाइटी फार कृष्णा कान्शियसनेस (इस्कन) के दो ट्विटर अकाउंट बंद कर दिया गया है। इस्कान के बांग्लादेश चैप्टर का ट्विटर ने अकाउंट बंद कर दिया है। ट्विटर के इस निर्णय के खिलाफ इस्कान के पदाधिकारियों ने अपना विरोध जताया है

Vijay KumarWed, 20 Oct 2021 05:40 PM (IST)
ट्विटर के इस निर्णय के खिलाफ इस्कान के पदाधिकारियों ने अपना विरोध जताया

राज्य ब्यूरो, कोलकाता: बांग्लादेश में अशांति के मद्देनजर इंटरनेशनल सोसाइटी फार कृष्णा कान्शियसनेस (इस्कन) के दो ट्विटर अकाउंट बंद कर दिया गया है। इस्कान के बांग्लादेश चैप्टर का ट्विटर ने अकाउंट बंद कर दिया है। ट्विटर के इस निर्णय के खिलाफ इस्कान के पदाधिकारियों ने अपना विरोध जताया है और सवाल पूछा है कि उनका बांग्लादेश अकाउंट क्यों बंद किया गया? संगठन, जो बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों पर हमलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहा है, उसने अब ट्विटर पर सवाल उठाया है, क्योंकि उसके दो अकाउंट स्पष्ट रूप से अनुपलब्ध है। माइक्रो-ब्लागिंग वेबसाइट पर इस्कान ने ट्विटर से यह स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की है कि इस्कान बांग्लादेश और बांग्लादेश हिंदू एकता परिषद के अकाउंट अनुपलब्ध क्यों हैं?

यह मांग इस्कान के संचार निदेशक युधिष्ठिर गोविंद दास ने की है। एक अन्य ट्वीट में दास ने यह भी सवाल किया कि क्या बांग्लादेश सरकार के दबाव में अकाउंट्स को हटाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आपातकाल के बीच हिंदुओं की आवाज को दबाया जा रहा है। इस्कान कोलकाता के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता राधारमण दास ने भी ट्विटर के कार्यों पर अपना गुस्सा व्यक्त किया और कहा कि जिन दो ट्विटर हैंडल को ब्लाक किया गया, वे पीड़ितों को दुनिया से जोड़ रहे थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि माइक्रो-ब्लागिंग प्लेटफार्म ने कुछ मौकों पर उनका अकाउंट लाक कर दिया है।

इस्कान के उपाध्यक्ष ने कहा कि ट्विटर ने इस्कान बांग्लादेश के लिए हमारे ट्विटर हैंडल को निलंबित कर दिया। कई और ट्विटर हैंडल जो बांग्लादेश में हुए नरसंहार की भयावह कहानियों के बारे में दुनिया को बताने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें भी निलंबित कर दिया गया है। वहां कट्टरपंथी ताकत बांग्लादेश के अल्पसंख्यक लोगों को मार रहा है, लेकिन आज ट्विटर ने बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों की आवाज को मार दिया है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि अमेरिकी सरकार ने भी कड़ी प्रतिक्रिया जारी की है, जिससे यह संकेत मिलता है कि दुनिया अब जानती है कि बांग्लादेश में क्या हो रहा है। ट्विटर पर निशाना साधते हुए दास ने दावा किया कि वेबसाइट बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमला करने वाले समूह का हिस्सा बन गई है। उन्होंने दावा किया कि अगर दुनिया भर के लोगों को नहीं पता कि बांग्लादेश में क्या हो रहा है, तो हिंसा जारी रहेगी।

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